डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा ANRF डिजिटल पोर्टल की घोषणा
शोधकर्ताओं के लिए खुशखबरी: डॉ. जितेंद्र सिंह ने की ANRF डिजिटल पोर्टल की घोषणा, पेटेंट और रिसर्च पेपर में मिलेगी मदद “
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
भारत के अनुसंधान (Research) और वैज्ञानिक इको-सिस्टम को विश्वस्तरीय बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है।
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज ‘अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF)’ के सहयोग से एक नए डिजिटल पोर्टल की घोषणा की।
‘The Politics Again’ की रिपोर्ट के अनुसार, यह अनूठा मंच देशभर के शोधकर्ताओं, छात्रों और नवोन्मेषकों को पेटेंट दाखिल करने और उच्च गुणवत्ता वाले शोध पत्र (Research Papers) लिखने में सीधी सहायता प्रदान करेगा।
यह महत्वपूर्ण घोषणा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST), जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT), वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग (DSIR) और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) की एक संयुक्त उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान की गई।
ANRF पोर्टल के मुख्य लाभ
डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि यह नया डिजिटल पोर्टल युवा नवप्रवर्तकों के लिए एक बेहतरीन ‘क्षमता-निर्माण संसाधन’ (Capacity-building resource) के रूप में कार्य करेगा।
वैज्ञानिक लेखन: यह शोधकर्ताओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर के शोध पत्र लिखने के लिए संरचित (Structured) सहायता देगा।
बौद्धिक संपदा (IP) संरक्षण: पेटेंट दाखिल करने की जटिल प्रक्रियाओं को आसान बनाया जाएगा, जिससे शोधकर्ताओं की वैज्ञानिक मेहनत को एक ‘बौद्धिक संपदा परिसंपत्ति’ में बदला जा सके।
गुणवत्ता में सुधार: इससे न केवल शोध परिणामों की गुणवत्ता मजबूत होगी, बल्कि देश में नवाचार (Innovation) का स्तर भी सुधरेगा।
संस्थानों के बीच समन्वय और ‘साइलो’ कल्चर पर रोक समीक्षा बैठक में डॉ. सिंह ने एक अहम मुद्दे की ओर ध्यान दिलाया।
उन्होंने कहा कि अक्सर देखा गया है कि विभिन्न वैज्ञानिक प्रयोगशालाएं और संस्थान जानकारी के अभाव में एक ही तरह का काम (पूरक कार्य) करते रहते हैं।
उन्होंने सभी वैज्ञानिक विभागों को ‘सहयोगात्मक और एकीकृत’ तरीके से काम करने का निर्देश दिया ताकि सार्वजनिक निवेश का अधिकतम राष्ट्रीय लाभ मिल सके।
इसके लिए तकनीकी सफलताओं को एक-दूसरे के साथ साझा करने का एक मजबूत तंत्र विकसित किया जाएगा।
विज्ञान संचार और प्रशासनिक दक्षता पर जोर
केंद्रीय मंत्री ने विज्ञान संचार (Science Communication) के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियों को आम नागरिकों, छात्रों और स्टार्टअप्स तक पहुंचाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया का भरपूर उपयोग होना चाहिए।
इसके साथ ही, प्रशासनिक पदों पर बैठे वैज्ञानिकों के लिए ‘मिशन कर्मयोगी’ के तहत क्षमता निर्माण कार्यक्रमों को विस्तार देने की बात कही गई, ताकि वे वित्तीय और प्रशासनिक नियमों को बेहतर ढंग से समझ सकें।
ESTIC 2026 की तैयारियों की समीक्षा
बैठक के अंत में डॉ. सिंह ने आगामी ‘उभरता विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सम्मेलन (ESTIC 2026)’ की तैयारियों का भी जायजा लिया।
उन्होंने निर्देश दिया कि इस सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों, स्टार्टअप्स, उद्योग जगत और युवा नवोन्मेषकों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित की जाए, ताकि यह मंच भारत की उभरती प्रौद्योगिकी क्षमताओं का वैश्विक शोकेस बन सके।
इस अहम बैठक में सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद और ANRF के सीईओ डॉ. शिवकुमार कल्याणरमन सहित कई शीर्ष अधिकारी मौजूद रहे।
प्रधानमंत्री आवास योजना–शहरी (PMAY-U): 1.25 करोड़ घरों की स्वीकृति, 'PMAY-U 2.0' से समावेशी विकास और…
NHRIMH कोट्टायम: होम्योपैथी मानसिक स्वास्थ्य अनुसंधान और इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेगी नई रफ्तार, वित्त समिति ने…
EPFO में बड़ा बदलाव: वेतन सीमा ₹15,000 से बढ़ाकर हुई ₹25,000, 51 लाख नए कर्मचारियों…
लोलार्क छठ 2026: संतान प्राप्ति के लिए प्राचीन लोलार्क कुंड में आस्था की डुबकी, 10…
मेरठ: सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर शास्त्री नगर सेंट्रल मार्केट में चला बुलडोजर, 44 सील…
मक्का के आसमान में मंडराया ड्रोन का खतरा, सऊदी ने किया नष्ट; हूतियों के हमलों…