भारत के खिलाफ साजिश : NIA ने 6 यूक्रेनी, 1 अमेरिकी को पकड़ा
बड़ा खुलासा: भारत के खिलाफ रची जा रही थी ‘विदेशी साजिश’… NIA ने 1 अमेरिकी और 6 यूक्रेनी नागरिकों को किया गिरफ्तार… म्यांमार बॉर्डर पर विद्रोहियों को दे रहे थे हथियारों और ड्रोन की ट्रेनिंग… रूस ने दी थी खुफिया जानकारी… मास्टरमाइंड मैथ्यू वैनडाइक भी शिकंजे में… पढ़ें ‘The Politics Again’ की पूरी रिपोर्ट…
भारत के खिलाफ बड़ी विदेशी साजिश नाकाम: NIA ने 6 यूक्रेनी और 1 अमेरिकी को किया गिरफ्तार, म्यांमार बॉर्डर पर विद्रोहियों को दे रहे थे ट्रेनिंग
नई दिल्ली/कोलकाता | नेशनल डेस्क, संतोष सेठ की रिपोर्ट The Politics Again
भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को एक बड़ी कामयाबी मिली है। नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने भारत के खिलाफ रची जा रही एक बेहद खतरनाक और अंतरराष्ट्रीय साजिश का पर्दाफाश करते हुए 7 विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है।
इनमें 6 यूक्रेन के और 1 अमेरिका का नागरिक शामिल है। इन सभी पर भारत-म्यांमार सीमा पर सक्रिय उग्रवादी गुटों को हथियारों, ड्रोन और गुरिल्ला युद्ध (Guerrilla Warfare) की ट्रेनिंग देने का गंभीर आरोप है।
कैसे और कहाँ से हुई गिरफ्तारियां?
सूत्रों के मुताबिक, 13 मार्च 2026 की शाम को कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट से एक अमेरिकी नागरिक को उस वक्त हिरासत में लिया गया, जब वह वापसी की फ्लाइट पकड़ने की कोशिश कर रहा था।
उसी शाम, एनआईए ने लखनऊ और दिल्ली एयरपोर्ट से भी 6 यूक्रेनी नागरिकों को कस्टडी में ले लिया।
15 मार्च को इन सातों को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 27 मार्च तक एनआईए की कस्टडी में भेज दिया गया है।
क्या थी साजिश और मिशन?
जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि ये विदेशी नागरिक मिजोरम के प्रतिबंधित क्षेत्रों से अवैध रूप से सीमा पार कर म्यांमार गए थे।
वहां उन्होंने ‘चिन स्टेट’ और ‘अराकान आर्मी’ जैसे विद्रोही गुटों के साथ संपर्क किया। इन गुटों के तार भारत के नॉर्थ-ईस्ट में सक्रिय उग्रवादी संगठनों (जैसे ULFA-I, NSCN के गुट) से जुड़े हुए हैं।
आरोप है कि ये विदेशी एजेंट इन उग्रवादियों को ड्रोन तकनीक, हथियार चलाने और आधुनिक युद्ध रणनीतियों की ट्रेनिंग दे रहे थे, ताकि भारत और म्यांमार में अस्थिरता फैलाई जा सके।
मास्टरमाइंड ‘मैथ्यू वैनडाइक’: CIA एजेंट या भाड़े का फौजी?
कोलकाता से गिरफ्तार किए गए अमेरिकी नागरिक की पहचान मैथ्यू एरॉन वैनडाइक (Matthew VanDyke) के रूप में हुई है।
46 वर्षीय मैथ्यू एक बेहद रहस्यमयी और विवादित चेहरा है। कोई उसे अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA का एजेंट बताता है, तो कोई भाड़े का सैनिक (Mercenary)।
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वह लीबिया, सीरिया, इराक और अफगानिस्तान जैसे दुनिया के हर बड़े युद्धग्रस्त क्षेत्र (Conflict Zone) में मौजूद रहा है।
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उसने ‘सन्स ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल’ नाम से एक संगठन बना रखा है, जो कथित तौर पर विदेशी लड़ाकों को ट्रेनिंग देता है।
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2011 में लीबिया के तानाशाह गद्दाफी के खिलाफ भी उसने विद्रोहियों का साथ दिया था।
रूस ने दी थी भारत को खुफिया जानकारी (Intel)
इस पूरे ऑपरेशन में एक बड़ा ‘रूसी एंगल’ भी सामने आया है। जानकारी के अनुसार, इन विदेशी नागरिकों की संदिग्ध गतिविधियों और मंसूबों की खुफिया जानकारी (Intel) रूस ने भारत के साथ साझा की थी। इसी इनपुट के आधार पर एनआईए ने जाल बिछाकर इन्हें एयरपोर्ट्स से गिरफ्तार किया।
यूक्रेन की सफाई और ‘ईसाई राज्य’ का अमेरिकी प्लान!
इस गिरफ्तारी के बाद यूक्रेन ने अपनी सफाई में इन आरोपों को खारिज किया है। यूक्रेन का कहना है कि वह खुद आतंकवाद का शिकार है और आतंकी गतिविधियों का समर्थन नहीं कर सकता।
यूक्रेन ने इसे रूस की साजिश बताते हुए कहा है कि रूस भारत-यूक्रेन के रिश्तों में दरार डालना चाहता है। हालांकि, यूक्रेन ने निष्पक्ष जांच में सहयोग की बात कही है।
वहीं, इस पूरी घटना को अमेरिका के उस कथित ‘प्लान’ से भी जोड़कर देखा जा रहा है, जिसका जिक्र कुछ समय पहले बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने किया था।
हसीना ने आरोप लगाया था कि अमेरिका भारत, म्यांमार और बांग्लादेश से सटे इलाकों को काटकर एक ‘ईसाई राज्य’ (Christian State) बनाना चाहता है।
एनआईए अब इन सातों आरोपियों के डिजिटल फुटप्रिंट और फंडिंग की गहनता से जांच कर रही है।











