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छत्‍तीसगढ़ – एक ही परिवार के पांच लोगों की हत्‍या, जादू टोना के शक में लाठी-डंडे से पीट-पीट कर मार डाला

“छत्‍तीसगढ़ के सुकमा जिले में दिल दहला देने वाली घटना में जादू–टोने के संदेह में एक ही परिवार के पांच सदस्यों की ग्रामीणों ने डंडे से पीट–पीट कर हत्या कर दी। मृतकों में तीन महिला व दो पुरुष हैं। बतादें कि तीन दिन पहले बलौदाबाजार के कसडोल में टोनही का संदेह जताते हुए एक ही परिवार के चार लोगों की कुल्हाड़ी से निर्मम हत्या कर दी गई थी” 

रायपुर 16 / 09 / 2024 कृष्णा सोनी की रिपोर्ट 

छत्‍तीसगढ़ के सुकमा जिले में दिल दहला देने वाली घटना में रविवार को जादू–टोना के संदेह में एक ही परिवार के पांच सदस्यों की ग्रामीणों ने डंडे से पीट–पीट कर हत्या कर दी। मृतकों में तीन महिला व दो पुरुष हैं।

इससे गुस्साए ग्रामीणों ने यह जघन्य कदम उठा लिया। हत्या करने वाले सभी पांच आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। मौके पर पुलिस अधिकारी उपस्थित है। गांव में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

मृतकों के नाम: मौसम कन्ना पिता लच्छा, मौसम बुच्चा पिता कन्ना, मौसम बिरी पति मौसम कन्ना, करका लच्छी पति करका लच्छा, मौसम अरजो पति मौसम बुच्चा।

आरोपितों के नाम: सवलम राजेश पिता सवलम कन्ना, सवलम हिड़मा पिता सवलम लच्छा, कारम सत्यम पिता कारम रामा, कुंजाम मुकेश पिता कुंजाम कन्ना व पोड़ियाम एंका पिता पोड़ियाम जोगा।

बलौदाबाजार में भी हुई थी दिल दहला देने वाली घटना

बतादें कि तीन दिन पहले 12 सितंबर को भी छत्‍तीसगढ़ के बलौदाबाजार से दिल दहला देने वाली घटना सामने आई थी, जहां टोनही का संदेह जताते हुए एक ही परिवार के चार लोगों की कुल्हाड़ी से निर्मम हत्या कर दी गई थी। यह घटना बलौदाबाजार जिले के कसडोल विकासखंड की है।
मृतकों में दो बहनें, एक भाई और एक बच्चा है। आरोपियों ने 45 वर्षीय भाई चेतराम केवट, यशोदा बाई, जमुना और उसके 11 माह के बच्चे को मार डाला। कसडोल पुलिस ने तीन संदेहियों रामनाथ पाटले व उनके बेटों दीपक व दिल कुमार को हिरासत में लिया है। सभी मृतक परिवार के पड़ोसी हैं।
जानकारी के अनुसार ग्राम छरछेद में रामनाथ की बेटी की एक माह से तबीयत खराब चल रही है। इस मामले में केवट परिवार पर जादू-टोना करने का आरोप लगाया गया था। इसी के चलते संदेहियों ने जघन्य हत्याकांड को अंजाम दिया।
पुलिस आरोपियों के साथ ही स्थानीय लोगों से भी पूछताछ कर रही है। पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल भी पुलिस टीम के साथ पहुंचे।
फोरेंसिक की टीम बलौदाबाजार से रवाना हो गई है। इसके बाद शवों का पोस्टमार्टम कराया जाएगा। स्थिति को काबू करने के लिए गांव में पुलिस बल भी तैनात किया गया है।

5 लोगों की हत्या करने के बाद थाने में किया सरेंडर, बोले- ‘अब आपदा से मुक्त हो जाएगा गांव’

सलवा जुड़ूम आंदोलन के बाद बसे मुरलीगुड़ा पंचायत के इतकल गांव में अंधविश्वास की जड़ें इतनी गहरी थीं कि पूरा गांव ही हत्यारा बन बैठा।

रविवार को इस गांव में राज्य पुलिस बल में पदस्थ प्रधान आरक्षक मौसम बुच्चा, उनके माता-पिता, पत्नी व बहन सहित पांच सदस्य की हत्या ग्रामीणों ने ही मिलकर कर दी।

इस दिल दहला देने वाले हत्याकांड के बाद भी ग्रामीणों के मन में किसी बात का कोई रंज नहीं है। ग्रामीण हत्या के बाद साक्ष्य के साथ समर्पण करने कोंटा थाना पहुंचे थे।

कोंटा मुख्यालय से दस किमी दूर गांव में पहुंचने के बाद बुच्चा के घर में मातम पसरा हुआ था। बुच्चा की बहन रवली व ममेरी बहन नागी दहाड़े मार कर विलाप कर रही थी। गांव में पुलिस बल का पहरा था।

ग्रामीण अभी भी इस घर से दूरी बनाए हुए थे। गांव के भीतर हत्याकांड के बाद कोई शोक दिखाई नहीं दिया। ग्रामीणों को यह भरोसा था कि अब यह गांव आपदा से मुक्त हो जाएगा।

दो वर्ष से गांव में लगातार हो रही थी मृत्यु

इतकल में हुए दर्दनाक हत्याकांड की जड़ में अशिक्षा और अंधविश्वास कारण है। दोरला जनजाति बहुल 36 परिवार की इस बस्ती की जनसंख्या लगभग 150 है। गांव में पिछले दो वर्ष से ग्रामीणों की आकस्मिक मृत्यु हो रही थी।

ग्रामीणों ने बताया कि दो वर्ष में लगभग 30 लोगों की बीमारी व अन्य कारण से मृत्यु हुई है। इसमें भी वर्ष 2023 में अधिकतर लोगों की मृत्यु बुधवार को और 2024 में मंगलवार के दिन हुई।

इस हत्याकांड के पहले लगातार तीन मंगलवार को गांव में लोगों की मृत्यु हुई थी। इस कारण गांव के लोगों के मन में धीरे-धीरे मृत्यु का भय बैठना शुरु हाे गया था। बुच्चा की माता बीरी गांव में वड्डे (झाड़-फूंक करने वाली) का काम करती थी।

गांव में यह अफवाह फैलनी शुरु हो गई कि इस आपदा के पीछे बीरी का हाथ है। वह जादू-टोना कर लोगों को मार रही है। इस कारण से धीरे-धीरे लोगों में आक्रोश बढ़ने लगा।

शिक्षित नहीं होना बड़ा कारण

इतकल गांव के अधिकतर लोग अनपढ़ है। पूरे गांव में 25 लोग ही पढ़े-लिखे हैं। गांव में प्राथमिक स्कूल खोला गया है, पर 13 ही बच्चे पढ़ाई करने आते हैं। पूरे गांव में चार बच्चों ने दसवीं व आठ ने पांचवीं तक की पढ़ाई की है।

शिक्षित नहीं होने से वे अपनी समस्या का उपचार जादू-टोने या तंत्र-मंत्र से करने पर भरोसा रखते हैं। यहीं कारण है कि गांव में बीमारी से हो रही मृत्यु के पीछे भी वे तंत्र-मंत्र को जिम्मेदार मान बैठे।

Santosh SETH

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