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डेमोग्राफी और घुसपैठ पर केंद्र का एक्शन, हाई लेवल कमिटी गठित

घुसपैठ और ‘डेमोग्राफी’ परिवर्तन पर केंद्र का महा-एक्शन : अमित शाह का मास्टरप्लान और हाई-लेवल कमेटी का ब्लूप्रिंट तैयार “

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

भारत के कई राज्यों—विशेषकर असम, पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तराखंड और झारखंड—में तेजी से बदलती डेमोग्राफी (जनसांख्यिकी) और अवैध घुसपैठ अब देश की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक बन चुकी है।

पाकिस्तान, बांग्लादेश, म्यांमार और श्रीलंका से आने वाले अवैध प्रवासियों के कारण उत्पन्न इस चुनौती से निपटने के लिए मोदी सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है।

केंद्र सरकार ने ‘हाई लेवल कमिटी ऑन डेमोग्राफिक चेंज’ (High-Level Committee on Demographic Change) के गठन का आधिकारिक ऐलान कर दिया है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह खुद इस पूरे मिशन की निगरानी कर रहे हैं और ईस्टर्न से लेकर वेस्टर्न बाउंड्री तक लगातार दौरे कर रहे हैं।

PM मोदी का विजन और अमित शाह का ‘सुपरविजन’

पिछले साल लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री ने एक हाई पावर्ड डेमोग्राफिक मिशन की घोषणा की थी, जिसे अब कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है।

गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर स्पष्ट किया है कि “घुसपैठ और अन्य अननेचुरल कारणों से हो रहा डेमोग्राफिक चेंज राष्ट्र के वर्तमान और भविष्य के लिए बड़ी चुनौती है।”

आईबी (IB) द्वारा जारी नोटिफिकेशन में साफ तौर पर लिखा गया है कि डेमोग्राफिक बदलाव हमारी संप्रभुता, राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक संरचना के लिए एक गंभीर खतरा है।

कमेटी के 8 मुख्य टास्क (What the Committee will Study)

इस उच्च स्तरीय समिति को पूरे मामले का गहन विश्लेषण कर समाधान सुझाने के लिए मुख्य रूप से 8 बिंदु सौंपे गए हैं:

  • अलग-अलग इलाकों में डेमोग्राफिक चेंज और अवैध घुसपैठ से पैदा हुई समस्याओं की ग्राउंड स्टडी।

  • जनसंख्या बदलाव के मूल कारणों (बॉर्डर पार की घुसपैठ, रोजगार, या पर्यावरणीय कारण) का पता लगाना।

  • विशिष्ट इलाकों में असामान्य तरीके से बढ़ी बसावट की जांच करना।

  • विभिन्न धर्मों और सामाजिक समुदायों की आबादी में हो रहे असामान्य पैटर्न का विश्लेषण।

  • अवैध प्रवासियों की पहचान, उन्हें हिरासत में लेने और डिपोर्ट (वापस भेजने) के लिए तय समय वाली निष्पक्ष व्यवस्था बनाना।

  • सीमा सुरक्षा, जनसंख्या नियंत्रण और आइडेंटिफिकेशन सिस्टम को मजबूत करने के उपाय खोजना।

  • अवैध घुसपैठ से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर तालमेल के सुझाव देना।

  • जनसंख्या असंतुलन से निपटने के लिए अन्य जरूरी और कठोर कदम उठाना।

IB की रिपोर्ट: दंगों और पत्थरबाजी के पीछे घुसपैठिए !

गृह मंत्रालय की टेबल पर मौजूद इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) की एक बेहद संवेदनशील रिपोर्ट ने चिंताएं और बढ़ा दी हैं।

  • आंतरिक सुरक्षा को खतरा: रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ सालों में पत्थरबाजी, आगजनी और सड़कों पर तोड़फोड़ की घटनाओं (जैसे दिल्ली दंगे या नोएडा हिंसा) में बड़े पैमाने पर बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों की संलिप्तता पाई गई है।

  • ड्रग्स कार्टेल पर प्रहार: पश्चिमी और पूर्वी सीमाओं (विशेषकर बंगाल) पर ड्रग्स का कारोबार सीमा के 15 किलोमीटर के दायरे से संचालित हो रहा है।

  • इसके जवाब में गृह मंत्रालय ने आदेश दिया है कि सीमा के 15 किमी के अंदर सभी अवैध निर्माण तुरंत तोड़े जाएं और बीएसएफ (BSF) की नजर 50 किमी तक पूरी तरह पैनी रहे।

आंकड़ों में घुसपैठ: 1 करोड़ से ज्यादा अवैध प्रवासियों का अनुमान

भारत में घुसपैठ की समस्या नई नहीं है। आजादी के बाद से ही यह सिलसिला जारी है। इंडिया टुडे की एक पुरानी रिपोर्ट और गृह मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से अवैध प्रवासियों के कुछ ऐतिहासिक और अनुमानित आंकड़े इस प्रकार हैं:

राज्य

अनुमानित अवैध प्रवासी (ऐतिहासिक आंकड़े)

पश्चिम बंगाल

54 लाख

असम

40 लाख

त्रिपुरा

8 लाख

बिहार

5 लाख

महाराष्ट्र

5 लाख

राजस्थान

5 लाख

दिल्ली

3 लाख

 

(नोट: 2001 में माधव गोडबोले की टास्क फोर्स रिपोर्ट ने भारत में अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों की संख्या करीब 1.5 करोड़ बताई थी।)

बंगाल में नई सरकार: ‘डिटेक्ट, डिटेन और डिपोर्ट’ पॉलिसी

पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अवैध घुसपैठियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए ‘डिटेक्ट, डिटेन और डिपोर्ट’ (Detect, Detain and Deport) पॉलिसी का ऐलान किया है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) भी इस जनसंख्या असंतुलन को देश के विभाजन का कारण मानता रहा है।

2022 में सर संघचालक मोहन भागवत ने स्पष्ट किया था कि जनसांख्यिकी असंतुलन के कारण ही ईस्ट तिमोर, साउथ सूडान और कोसोवो जैसे नए देश बने।

ऐसे में भारत के सामाजिक और राजनीतिक ढांचे को बचाने के लिए केंद्र सरकार का यह नया ‘मास्टरप्लान’ एक निर्णायक कदम साबित हो सकता है।

Santosh SETH

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