मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन (MAHSR) के साथ भारत में स्वदेशी हाई-स्पीड रेल निर्माण और 7 नए कॉरिडोर की नींव रखी जा रही है।
भारत में हाई-स्पीड रेल का नया युग: मुंबई-अहमदाबाद के बाद 7 नए बुलेट ट्रेन कॉरिडोर की तैयारी”
THE POLITICS AGAIN डेस्क: संतोष सेठ की रिपोर्ट
भारतीय रेलवे की तस्वीर अब तेजी से बदल रही है। तेज, सुरक्षित और बेहतर कनेक्टिविटी के साथ भारत अपनी पहली बुलेट ट्रेन परियोजना— ‘मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (MAHSR) कॉरिडोर’ को पूरा करने के बेहद करीब पहुंच चुका है।
वंदे भारत एक्सप्रेस ने जहां 180 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से देश को नई गति दी है, वहीं इन बुलेट ट्रेनों की डिजाइन गति 350 किलोमीटर प्रति घंटा तक होगी, जो भारतीय परिवहन के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगी।
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन सिर्फ एक रूट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भविष्य के हाई-स्पीड रेल कॉरिडोरों के लिए एक ‘मानकीकृत मॉडल’ (Standardized Model) तैयार कर रही है।
एक बार इस मॉडल के सफल होने के बाद, देश भर में नई बुलेट ट्रेन परियोजनाओं में इसी सिद्ध इंजीनियरिंग डिजाइन, पटरियों और विद्युतीकरण प्रणाली का उपयोग किया जाएगा। इससे निर्माण कार्य की गति तेज होगी और लागत में भी भारी कमी आएगी।
विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करने के लिए भारतीय रेलवे ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत स्वदेशी हाई-स्पीड ट्रेन के निर्माण को बढ़ावा दे रहा है।
इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) और BEML के सहयोग से 280 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार वाले स्वदेशी हाई-स्पीड ट्रेन सेट का डिजाइन तैयार किया जा रहा है।
विशेष रूप से बेंगलुरु में हाल ही में उद्घाटित ‘आदित्य’ परिसर में आधुनिक कोचों का विकास किया जा रहा है, जिससे भारत का अपना उत्पादन इकोसिस्टम मजबूत हो रहा है।
देश के इस पहले बुलेट ट्रेन कॉरिडोर में जापानी शिनकान्सेन (Shinkansen) तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसकी कुछ प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:
दूरी और समय: 508 किलोमीटर लंबे इस रूट पर मुंबई से अहमदाबाद का सफर मात्र 1 घंटा 58 मिनट में पूरा होगा।
स्टेशन: पूरे मार्ग पर कुल 12 अत्याधुनिक स्टेशन बनाए जाएंगे।
पहला चरण: पहली हाई-स्पीड रेल सेवा अगस्त 2027 में शुरू होने की उम्मीद है, जिसका पहला चरण सूरत से वापी के बीच संचालित होगा।
तकनीक: भारत में पहली बार पटरियों के लिए जे-स्लैब बैलेस्टलेस ट्रैक (J-Slab Ballastless Track) तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है। इसके अलावा 20,000 से अधिक ओवरहेड विद्युतीकरण (OHE) मास्ट लगाए जा रहे हैं।
मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर से आगे बढ़ते हुए, सरकार ने भविष्य के विकास के लिए लगभग 4,000 किलोमीटर लंबाई के सात (7) नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर चिन्हित किए हैं। इन परियोजनाओं से देश में लगभग 16 लाख करोड़ रुपये का निवेश आने की उम्मीद है।
दिल्ली-वाराणसी: सफर का समय – 3 घंटे 50 मिनट
वाराणसी-पटना-सिलीगुड़ी: सफर का समय – 2 घंटे 55 मिनट
चेन्नई-बेंगलुरु: सफर का समय – 1 घंटा 13 मिनट
बेंगलुरु-हैदराबाद: सफर का समय – 2 घंटे
चेन्नई-हैदराबाद: सफर का समय – 2 घंटे 55 मिनट
मुंबई-पुणे: सफर का समय – मात्र 48 मिनट
पुणे-हैदराबाद: सफर का समय – 1 घंटा 55 मिनट
मुंबई-अहमदाबाद परियोजना से मिलने वाले तकनीकी ज्ञान और अनुभव का लाभ उठाते हुए, भारत एक विशाल और अत्याधुनिक हाई-स्पीड रेल नेटवर्क की दिशा में मजबूती से कदम बढ़ा रहा है।
आने वाले वर्षों में, ये बुलेट ट्रेन कॉरिडोर न केवल यात्रा के समय को कम करेंगे, बल्कि देश के आर्थिक विकास को भी एक अभूतपूर्व गति प्रदान करेंगे।
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