महायुति सरकार
“महाराष्ट्र नगरपालिका चुनावों में ‘महायुति’ (Mahayuti) की प्रचंड जीत के बाद मुंबई महानगरपालिका (BMC) के मेयर पद को लेकर चल रहा हाई-वोल्टेज ड्रामा अब खत्म हो गया है”
मुंबई | द पॉलिटिक्स अगेन ब्यूरो
एक तरफ जहां बीजेपी को सबसे ज्यादा सीटें मिलने से उसका दावा मजबूत माना जा रहा था, वहीं मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे द्वारा अपने पार्षदों को अचानक फाइव स्टार होटल में शिफ्ट करने से राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म हो गया था। क्या शिंदे कोई नया समीकरण बना रहे हैं? क्या महायुति में दरार है?
इन तमाम सवालों और अफवाहों पर सोमवार को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने खुद पूर्णविराम लगा दिया।
उन्होंने दो टूक शब्दों में ऐलान किया है कि मुंबई में मेयर ‘महायुति’ का ही बनेगा और जनादेश के साथ कोई विश्वासघात नहीं होगा।
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सस्पेंस खत्म करते हुए स्पष्ट किया कि शिवसेना और भाजपा ने यह चुनाव गठबंधन (महायुति) के धर्म का पालन करते हुए लड़ा है।
विश्वासघात का सवाल नहीं: शिंदे ने कहा, “मुंबई की जनता ने महायुति पर भरोसा जताया है। हम उस जनादेश का सम्मान करेंगे। शिवसेना कोई अलग फैसला लेकर जनता के विश्वास को नहीं तोड़ेगी। अफवाहों पर ध्यान न दें।”
सिर्फ मुंबई ही नहीं: सीएम ने साफ किया कि मुंबई के अलावा ठाणे, कल्याण-डोंबिवली और उल्हासनगर जैसी जिन भी नगरपालिकाओं में गठबंधन ने साथ चुनाव लड़ा है, वहां मेयर महायुति का ही होगा।
दरअसल, बीएमसी चुनाव में किसी एक पार्टी को अपने दम पर स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था, लेकिन गठबंधन के तौर पर महायुति के पास जादुई आंकड़ा मौजूद है।
सस्पेंस तब गहराया जब शिंदे गुट ने अपने पार्षदों को अज्ञातवास (होटल) में भेज दिया। लेकिन अब स्थिति साफ है।
बीएमसी में महायुति का गणित: बीएमसी में मेयर बनने के लिए 114 पार्षदों के समर्थन की जरूरत है। महायुति का गणित इस प्रकार है:
आंकड़ों के लिहाज से बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी है, इसलिए मेयर पद पर बीजेपी का दावा स्वाभाविक माना जा रहा है, हालांकि अंतिम मुहर आपसी सहमति से लगेगी।
अब सबकी निगाहें 22 जनवरी पर टिकी हैं। महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई समेत 29 नगर निकायों में मेयर चुनाव की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
आरक्षण लॉटरी: 22 जनवरी को मेयर पद के लिए आरक्षण की लॉटरी निकाली जाएगी। इससे तय होगा कि मेयर की सीट सामान्य होगी या किसी वर्ग (महिला/आरक्षित) के लिए सुरक्षित।
बीजेपी का निर्देश: इधर, बीजेपी ने अपने नवनिर्वाचित पार्षदों को अगले 8 से 10 दिनों तक मुंबई से बाहर न जाने का सख्त निर्देश दिया है, ताकि किसी भी तरह की रणनीतिक चूक न हो।
एकनाथ शिंदे के बयान ने विपक्ष की उन उम्मीदों पर पानी फेर दिया है जो महायुति में फूट की आस लगाए बैठे थे। मुंबई पर अब भगवा परचम के साथ महायुति का राज तय है।
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