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एक्शन में भाजपा के ‘बॉस’ नितिन नबीन: पहले ही दिन किए चौंकाने वाले फैसले, विनोद तावड़े से राम माधव तक ‘दिग्गजों’ को सौंपी नई जिम्मेदारी

“भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। 20 जनवरी (मंगलवार) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह जैसे दिग्गजों की मौजूदगी में नितिन नबीन (45) ने पार्टी के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाला”

नई दिल्ली | The Politics Again ।  संतोष सेठ की रिपोर्ट। दिनांक: 22 जनवरी, 2026 (गुरुवार)

पीएम मोदी ने जिस युवा नेता को अपना ‘बॉस’ बताया था, उसने कुर्सी संभालते ही अपने इरादे जाहिर कर दिए हैं।

पहले ही दिन नितिन नबीन ने ताबड़तोड़ फैसले लेते हुए यह संदेश दे दिया है कि उनका फोकस केवल कुर्सी संभालने पर नहीं, बल्कि ‘मिशन साउथ’ और आगामी विधानसभा चुनावों में जीत सुनिश्चित करने पर है।

पहली परीक्षा: 5 राज्यों के चुनाव और दक्षिण का दुर्ग

बतौर अध्यक्ष नितिन नबीन के सामने राह आसान नहीं है। उनकी पहली और सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु, असम और पुडुचेरी में होने वाले विधानसभा चुनाव होंगे।

इसके साथ ही कर्नाटक में खोई हुई सत्ता वापस लाना और तेलंगाना में पार्टी की जड़ें जमाना उनकी प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर है।

एक्शन मोड: पहले दिन ही दिग्गजों की तैनाती

नबीन ने अपने अध्यक्षीय कार्यकाल की शुरुआत ‘वेट एंड वॉच’ की जगह ‘एक्शन’ से की है। उन्होंने केरल, तेलंगाना, बेंगलुरु और चंडीगढ़ के लिए चुनाव प्रभारी और सह-प्रभारियों की नियुक्ति कर दी है, जिसमें कई नाम चौंकाने वाले हैं।

1. केरल: ‘कमल’ खिलाने की जिम्मेदारी विनोद तावड़े पर

अटल-आडवाणी के दौर से लेकर जेपी नड्डा तक, केरल भाजपा के लिए हमेशा एक ‘अभेद्य किला’ रहा है। इसे भेदने के लिए नबीन ने अपने भरोसेमंद सिपहसालार को चुना है।

  • चुनाव प्रभारी: राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े (जो बिहार प्रभारी भी हैं)। उन्हें चंडीगढ़ मेयर चुनाव का पर्यवेक्षक भी बनाया गया है।

  • सह-प्रभारी: केंद्रीय राज्य मंत्री और कर्नाटक की सांसद शोभा करंदलाजे।

2. कर्नाटक (ग्रेटर बेंगलुरु): राम माधव की वापसी

दक्षिण भारत में भाजपा का प्रवेश द्वार माने जाने वाले कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है। यहाँ वापसी के लिए नबीन ने एक बड़ा दांव खेला है।

  • चुनाव प्रभारी: राम माधव। अमित शाह की टीम में महासचिव रह चुके राम माधव की मुख्य धारा में यह वापसी बेहद अहम मानी जा रही है।

  • सह-प्रभारी: राजस्थान बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष सतीश पूनिया और महाराष्ट्र विधायक संजय उपाध्याय।

3. तेलंगाना (नगर निगम चुनाव): आशीष शेलार को कमान

तेलंगाना में अपनी पैठ बढ़ाने के लिए तीन बड़े नेताओं को उतारा गया है।

  • चुनाव प्रभारी: महाराष्ट्र सरकार में मंत्री आशीष शेलार। शेलार और नबीन पुराने साथी हैं और दोनों ने युवा मोर्चा में साथ काम किया है। वे सीएम देवेंद्र फडणवीस के करीबी हैं।

  • सह-प्रभारी: राजस्थान के पूर्व अध्यक्ष अशोक परनामी और हरियाणा से राज्यसभा सांसद रेखा शर्मा।

क्या हैं इन फैसलों के मायने?

राजनीतिक पंडितों का मानना है कि नबीन की ये नियुक्तियां उनकी आक्रामक कार्यशैली (Aggressive Working Style) को दर्शाती हैं। उन्होंने अनुभव और युवा जोश का संतुलन बनाया है।

  • विनोद तावड़े और राम माधव जैसे रणनीतिकारों को मोर्चे पर लाकर उन्होंने साफ कर दिया है कि वे कोई भी रिस्क नहीं लेना चाहते।

  • आशीष शेलार जैसे युवा चेहरों को बड़ी जिम्मेदारी देकर उन्होंने अपनी नई टीम की झलक दिखा दी है।

The Politics Again का नज़रिया:

नितिन नबीन के लिए यह सफर कांटों भरा ताज पहनने जैसा है। अगर वे इन चुनावों में भाजपा को जीत दिलाने में कामयाब रहे, तो वे पार्टी में अपनी स्थिति को अभेद्य बना लेंगे।

लेकिन अगर नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं आए, तो सवाल उठने में भी देर नहीं लगेगी। फिलहाल, ‘बॉस’ ने अपनी गोटियां बिछा दी हैं, अब देखना है कि चुनाव की बिसात पर ऊंट किस करवट बैठता है।

Santosh SETH

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