AAP Rajya Sabha Crisis

AAP में अब तक का सबसे बड़ा ‘भूचाल’: पढ़ें पूरी इनसाइड स्टोरी

AAP में ऐतिहासिक ‘भूचाल’: राघव चड्ढा समेत 7 सांसदों ने किया BJP में विलय; जानें कैसे बिखर गई केजरीवाल की सबसे मजबूत ‘राज्यसभा ब्रिगेड’

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

‘भ्रष्टाचार मुक्त भारत’ का सपना दिखाकर अस्तित्व में आई आम आदमी पार्टी (AAP) शुक्रवार को देश के राजनीतिक इतिहास की शायद सबसे बड़ी टूट का शिकार हो गई।

पार्टी के सबसे चर्चित युवा चेहरे राघव चड्ढा के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी के सात (7) राज्यसभा सांसदों ने न केवल इस्तीफा दिया, बल्कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) में अपने गुट का विलय करने का भी ऐलान कर दिया।

दिल्ली और पंजाब की राजनीति में इस घटनाक्रम को अरविंद केजरीवाल के लिए एक ‘सियासी जलजला’ माना जा रहा है।

सात सांसदों का इस्तीफा और BJP में विलय

नई दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में आयोजित एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस में राघव चड्ढा, पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महासचिव संदीप पाठक और राज्यसभा में उपनेता अशोक मित्तल ने खुलेआम बगावत का ऐलान किया।

  • 2/3 का आंकड़ा पार: चड्ढा ने दावा किया कि 10 में से 7 राज्यसभा सांसद उनके साथ हैं। इनमें राघव चड्ढा, संदीप पाठक, अशोक मित्तल के अलावा हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता, विक्रमजीत सिंह साहनी और स्वाति मालीवाल शामिल हैं।

  • बचा लिया दल-बदल कानून: दो-तिहाई बहुमत होने के कारण इन सांसदों ने दल-बदल (Anti-Defection Law) कानून से बचने के लिए सीधे अपने गुट का BJP में विलय कर दिया है और इसके दस्तावेज राज्यसभा सभापति को सौंप दिए हैं।

  • BJP कार्यालय में स्वागत: प्रेस कॉन्फ्रेंस के तुरंत बाद, डीडीयू मार्ग स्थित भाजपा मुख्यालय में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने मिठाई खिलाकर इन बागी सांसदों का स्वागत किया।

राघव चड्ढा का तीखा प्रहार: ‘मैं सही आदमी, गलत पार्टी में’

कभी अरविंद केजरीवाल के सबसे करीबी रहे और 24 साल की उम्र में लोकपाल बिल का मसौदा तैयार करने वाले राघव चड्ढा ने कहा, “मैंने अपनी जवानी के 15 साल आम आदमी पार्टी को दिए हैं।

लेकिन अब यह पार्टी अपने सिद्धांतों और बुनियादी नैतिकताओं से पूरी तरह भटक गई है।” चड्ढा ने खुद को ‘गलत पार्टी में सही आदमी’ (Right man in the wrong party) करार दिया और कहा कि अब पार्टी राष्ट्रीय हित की बजाय केवल निजी स्वार्थों के लिए काम कर रही है।

संदीप पाठक और अशोक मित्तल: AAP के लिए दोहरा झटका

इस टूट में राघव चड्ढा के साथ संदीप पाठक और अशोक मित्तल का जाना आम आदमी पार्टी के लिए एक गहरा संगठनात्मक झटका है:

  • संदीप पाठक: कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से पढ़े डॉ. पाठक को AAP की पंजाब जीत का प्रमुख रणनीतिकार और ‘चाणक्य’ माना जाता था।

  • वे पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महासचिव थे। उन्होंने कहा, “मैं राजनीति में सिर्फ देश सेवा के लिए आया था, लेकिन अब स्थिति ऐसी बन गई है कि मुझे यह कदम उठाना पड़ा।”

  • अशोक मित्तल: इनका नाम सबसे चौंकाने वाला है। मित्तल वही शख्स हैं जिनके फिरोजशाह कोटला स्थित सरकारी आवास में अरविंद केजरीवाल अपना सरकारी बंगला खाली करने के बाद रह रहे थे।

  • हाल ही में AAP ने राघव चड्ढा को हटाकर मित्तल को ही राज्यसभा में उपनेता बनाया था।

कैसे पड़ी इस बगावत की नींव? (इनसाइड स्टोरी)

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस बगावत की पटकथा महीनों पहले लिखी जा चुकी थी:

  1. जेल के दौर में दूरियां: जब अरविंद केजरीवाल शराब नीति मामले में जेल में थे, तब राघव चड्ढा अपनी पत्नी परिणीति के साथ लंदन में छुट्टियां मना रहे थे।

  2. संगठन में अनदेखी: चड्ढा को लोकसभा और पंजाब चुनावों से लगभग दूर रखा गया। हाल ही में उन्हें राज्यसभा में उपनेता पद से भी हटा दिया गया था, जिससे उनका असंतोष चरम पर पहुंच गया।

  3. एजेंसियों का दबाव?: AAP के पंजाब महासचिव बलतेज पन्नू ने आरोप लगाया है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ED की रेड का डर दिखाकर और केंद्रीय मंत्री पद का लालच देकर इन सांसदों को तोड़ा है।

AAP की जवाबी कार्रवाई और तीखी प्रतिक्रियाएं

इस बड़ी टूट पर आम आदमी पार्टी के खेमे में भारी उबाल है:

  • मनीष सिसोदिया का ‘गद्दार’ तंज: दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने भड़कते हुए कहा कि गुजरात में जहां कार्यकर्ता पसीना बहा रहे हैं, वहीं कुछ ‘गद्दारों’ ने पंजाब के कार्यकर्ताओं की मेहनत का सौदा कर लिया। उन्होंने कहा, “पंजाब गद्दारों को कभी माफ नहीं करता है।”

  • संजय सिंह और अरविंद केजरीवाल: AAP के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने इसे सीधे तौर पर BJP का “ऑपरेशन लोटस” (Operation Lotus) करार देते हुए इन सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग की है। वहीं, अरविंद केजरीवाल ने कहा कि “भाजपा ने पंजाबियों के साथ धक्का (धोखा) किया है।”

  • फरीदाबाद में संगठन को सहेजने की कोशिश: टूट की खबरों के बीच फरीदाबाद इकाई के जिला अध्यक्ष रविंद्र फौजदार ने कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की और दावा किया कि कुछ नेताओं के जाने से पार्टी की विचारधारा और कैडर के मनोबल पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

BJP का तंज: ‘AAP को आत्मनिरीक्षण की जरूरत

दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने इस घटनाक्रम को AAP के भ्रष्टाचार और ‘सुप्रीमो कल्चर’ का नतीजा बताया है।

बांसुरी स्वराज, अनुराग ठाकुर और तरुण चुघ जैसे भाजपा नेताओं ने कहा कि आप नेतृत्व को इस महा-टूट पर आत्मनिरीक्षण करना चाहिए क्योंकि अब पार्टी अपने मुख्य लक्ष्यों से पूरी तरह भटक चुकी है।

अब राज्यसभा में केवल 1 सांसद के भरोसे AAP

इस बगावत के बाद अब उच्च सदन (राज्यसभा) में आम आदमी पार्टी का कुनबा 10 से घटकर महज 1 रह गया है।

अब पंजाब से केवल पर्यावरण प्रेमी और ‘काली बेईं’ नदी को पुनर्जीवित करने वाले ‘ईको बाबा’ संत बलबीर सिंह सीचेवाल ही AAP के इकलौते राज्यसभा सांसद बचे हैं।

यह ऐतिहासिक टूट न केवल राज्यसभा में AAP की आवाज को कमजोर करेगी, बल्कि आने वाले दिल्ली और पंजाब विधानसभा चुनावों में भी इसके दूरगामी परिणाम देखने को मिल सकते हैं।

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