सुप्रीम कोर्ट इच्छामृत्यु फैसला

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: कोविड वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स पर मिलेगा मुआवजा | The Politics Again

“सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला : कोविड वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स पर मिलेगा मुआवजा, सरकार बनाए ‘नो-फॉल्ट कंपनसेशन’ नीति “

नई दिल्ली (The Politics Again): संतोष सेठ की रिपोर्ट 

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कोविड-19 वैक्सीनेशन के गंभीर साइड इफेक्ट्स और उससे हुई मौतों को लेकर दायर याचिकाओं पर एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह वैक्सीन से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए एक ‘नो-फॉल्ट कंपनसेशन पॉलिसी’ (No-fault compensation policy) तैयार करे।

यह फैसला उन परिवारों के लिए एक बड़ी कानूनी जीत माना जा रहा है, जिन्होंने वैक्सीन के कारण अपने प्रियजनों को खोने का दावा किया था।

क्या है ‘नो-फॉल्ट कम्पनसेशन पॉलिसी’?

इस पॉलिसी का सीधा मतलब यह है कि यदि किसी व्यक्ति को दवा या वैक्सीन के कारण कोई शारीरिक नुकसान होता है, तो उसे मुआवजा दिया जाएगा, भले ही इसमें किसी की स्पष्ट गलती साबित न हुई हो। इसके तहत पीड़ित पक्ष को लंबी कानूनी लड़ाई लड़े बिना राहत मिल सकेगी।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश की 3 अहम बातें:

  1. सार्वजनिक होंगे आंकड़े: वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स से जुड़े सभी आंकड़े समय-समय पर पब्लिक डोमेन (सार्वजनिक मंच) पर रखे जाएंगे।

  2. कानूनी विकल्प खुले रहेंगे: इस फैसले और मुआवजे का यह मतलब नहीं होगा कि प्रभावित व्यक्ति या परिवार दूसरे कानूनी उपायों का सहारा नहीं ले सकता।

  3. गलती की स्वीकारोक्ति नहीं: मुआवजा नीति लागू करने का यह अर्थ नहीं होगा कि सरकार या किसी अन्य अथॉरिटी ने अपनी गलती मान ली है।

(अदालत ने यह भी साफ किया कि साइड इफेक्ट्स की मॉनिटरिंग के लिए मौजूदा सिस्टम ही काम करेगा, इसके लिए अलग से कोई एक्सपर्ट पैनल बनाने की जरूरत नहीं है।)

किन मामलों पर आया यह फैसला?

सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला मुख्य रूप से रचना गंगू और वेणुगोपालन गोविंदन द्वारा 2021 में दायर याचिकाओं पर सुनाया है।

  • करुण्या की मौत: वेणुगोपाल गोविंदन का दावा है कि जुलाई 2021 में ‘कोवीशील्ड’ (Covishield) वैक्सीन लेने के महीने भर बाद उनकी बेटी की मौत हो गई थी।

  • रितिका/श्री ओमत्री की मौत: दूसरे परिवार ने बताया कि मई 2021 में कोवीशील्ड की पहली डोज लगवाने के 7 दिन के अंदर उनकी 8 वर्षीय बेटी को तेज बुखार हुआ। MRI में ब्रेन हैमरेज और ब्लड क्लॉटिंग का पता चला। RTI से खुलासा हुआ कि उसे वैक्सीन के कारण TTS (थ्रोम्बोसिस विथ थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम) हुआ था, जिससे उसकी मौत हो गई।

ICMR की स्टडी (जुलाई 2025) क्या कहती है?

अदालत में सरकार का शुरुआती तर्क था कि वैक्सीन अपनी मर्जी से लगवाई गई थी, इसलिए सरकार मुआवजे के लिए उत्तरदायी नहीं है।

इसके अलावा, जुलाई 2025 में इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) और NCDC ने अपनी स्टडी में दावा किया था कि भारत में हार्ट अटैक जैसी अचानक मौतों का कोविड वैक्सीन से कोई सीधा संबंध नहीं है।

स्टडी के मुताबिक, भारत में बनी वैक्सीन सुरक्षित हैं और गंभीर साइड इफेक्ट्स के मामले बेहद दुर्लभ (Rare) हैं। अचानक मौतों की वजह जेनेटिक्स, लाइफस्टाइल या कोविड के बाद के कॉम्प्लिकेशन हो सकते हैं।

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