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कोयला मंत्रालय का बड़ा फैसला: बीमा शुरिटी बांड को मिली मंजूरी

कोयला मंत्रालय का व्यापार सुगमता की दिशा में बड़ा कदम: MMDR कोयला ब्लॉकों के लिए ‘बीमा शुरिटी बांड’ को मिली मंजूरी, आवंटियों को मिलेगी भारी वित्तीय राहत”

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

देश के कोयला क्षेत्र में व्यापार करने की सुगमता (Ease of Doing Business) को और मजबूत करने तथा आवंटियों को अधिक वित्तीय लचीलापन प्रदान करने के उद्देश्य से कोयला मंत्रालय ने एक बड़ा नीतिगत सुधार किया है।

मंत्रालय ने खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम (MMDR Act), 1957 के तहत आवंटित कोयला ब्लॉकों के लिए ‘निष्पादन बैंक गारंटी’ (PBG) के स्थान पर ‘बीमा शुरिटी बांड’ (Insurance Surety Bond – ISB) के उपयोग की आधिकारिक अनुमति प्रदान कर दी है।

संशोधित नियम लागू, राजपत्र में अधिसूचना जारी

इस बड़े बदलाव को ‘कोयला ब्लॉक आवंटन (संशोधन) नियम, 2026’ के जरिए लागू किया गया है। 22 जून, 2026 की अधिसूचना [जीएसआर 508(ई)] के माध्यम से इसे भारत के राजपत्र (Gazette of India) में प्रकाशित कर दिया गया है।

क्या होंगे इस नए नियम के प्रमुख फायदे?

संशोधित व्यवस्था के लागू होने से कोयला सेक्टर के कारोबारियों और खदान आवंटियों को कई स्तरों पर बड़ी राहत मिलेगी:

  • विकल्प की सुविधा: अब कोयला ब्लॉक आवंटियों को अपनी निष्पादन सुरक्षा संबंधी बाध्यता पूरी करने के लिए ‘बैंक गारंटी’ (PBG) या ‘बीमा शुरिटी बांड’ (ISB) में से किसी एक को चुनने की छूट होगी।

  • पुराने आवंटियों को भी लाभ: यह सुविधा वर्तमान आवंटियों पर भी लागू होगी। वे अपनी पहले से जमा कराई गई बैंक गारंटी को वापस लेकर उसकी जगह ‘बीमा शुरिटी बांड’ जमा कर सकेंगे।

  • पूंजीगत संसाधनों की बचत: इस कदम से पारंपरिक बैंक गारंटी व्यवस्था से जुड़े भारी वित्तीय बोझ में कमी आएगी। इससे कारोबारी अपने पूंजीगत संसाधनों (Capital Resources) का उपयोग खदान के विकास और परिचालन (Operations) में ज्यादा अच्छे तरीके से कर सकेंगे।

  • सरकार के हित सुरक्षित: बीमा बांड के जरिए वित्तीय साधनों तक कारोबारियों की पहुंच तो बेहतर होगी ही, साथ ही सरकार की सुरक्षा संबंधी शर्तें और हित भी पूर्णतः सुरक्षित रहेंगे।

जल्द ही दूसरे ब्लॉकों पर भी लागू होगा नियम

मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि बीमा शुरिटी बांड की यह सुविधा शुरुआत में केवल ‘एमएमडीआर अधिनियम’ (MMDR Act) के तहत आवंटित कोयला ब्लॉकों के लिए पेश की गई है।

हालांकि, बहुत जल्द सरकार ‘कोयला खदान (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 2015’ (CMSP Act) के तहत आवंटित ब्लॉकों के लिए भी इस प्रावधान का विस्तार करने की प्रक्रिया शुरू करेगी।

यह ऐतिहासिक पहल कोयला मंत्रालय के उन निरंतर नियामक सुधारों का हिस्सा है, जो देश में निवेश को प्रोत्साहित करते हैं।

इस कदम से देश में वाणिज्यिक कोयला खनन (Commercial Coal Mining) के लिए एक अधिक पारदर्शी, कुशल और निवेशक-अनुकूल इकोसिस्टम का निर्माण होगा।

Santosh SETH

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