“कृषि, ग्रामीण और अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों के समर्थन में आज, 12 फरवरी को 14 राष्ट्रीय ट्रेड यूनियनों और संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) द्वारा बुलाए गए ‘भारत बंद’ का असर सुबह से ही दिखाई देने लगा है”
नई दिल्ली | गुरुवार, 12 फरवरी 2026: संतोष सेठ की रिपोर्ट
देश के श्रमिक वर्ग ने सरकार की नई नीतियों के खिलाफ एकजुट होकर राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल शुरू कर दी है।
आज सुबह घर से निकलने वाले लोगों को कई जगहों पर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। हड़ताल का सबसे ज्यादा असर परिवहन और बैंकिंग सेवाओं पर है।
1. परिवहन व्यवस्था (Transport): सड़कों पर ‘चक्का जाम’ की स्थिति देखने को मिल रही है। सार्वजनिक परिवहन सेवाएं, विशेष रूप से राज्य परिवहन की बसें, टैक्सियां और ऑटो-रिक्शा, कई शहरों में सड़कों से नदारद हैं।
सड़क यातायात: प्रदर्शनकारियों द्वारा किए जा रहे अवरोधों के कारण प्रमुख मार्गों पर जाम लगा है।
रेल और हवाई सेवा: हालांकि ट्रेनें और उड़ानें अपने निर्धारित समय पर संचालित हो रही हैं, लेकिन टैक्सी और बसों की कमी के कारण यात्रियों को रेलवे स्टेशनों और हवाई अड्डों तक पहुँचने में भारी मशक्कत करनी पड़ रही है।
स्थानीय ट्रेन: कुछ शहरों में लोकल ट्रेन सेवाओं के बाधित होने की भी खबरें हैं।
2. बैंकिंग सेवाएं (Banking Services): आज बैंक जाने वालों को निराशा हाथ लग सकती है। ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉइज़ एसोसिएशन (AIBEA), ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (AIBOA) और बैंक एम्प्लॉइज़ फेडरेशन ऑफ इंडिया (BEFI) ने हड़ताल का समर्थन किया है।
इसके चलते सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में कामकाज पूरी तरह से ठप रहने की संभावना है। चेक क्लियरेंस और नकद लेनदेन जैसी सेवाएं प्रभावित हुई हैं।
3. बाजार और व्यापार: जिन राज्यों में वामपंथी संगठनों और श्रमिक संघों की पकड़ मजबूत है (जैसे केरल, पश्चिम बंगाल और ओडिशा), वहां बाजार, दुकानें और रेस्तरां पूरी तरह बंद हैं। अन्य राज्यों में मिला-जुला असर देखने को मिल रहा है।
केंद्र सरकार की ओर से किसी भी राष्ट्रव्यापी अवकाश की घोषणा नहीं की गई है। हालांकि, स्थिति को देखते हुए:
प्रभावित राज्य: केरल, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में अधिकांश स्कूल और कॉलेज बंद हैं।
अन्य राज्य: अन्य जगहों पर संस्थान खुले हो सकते हैं, लेकिन परिवहन न होने के कारण छात्रों की उपस्थिति कम रहने की संभावना है। अभिभावकों को सलाह दी गई है कि वे बच्चों को भेजने से पहले स्कूल प्रशासन से पुष्टि कर लें।
ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कई अहम मांगें रखी हैं। प्रदर्शनकारी मुख्य रूप से चार नए श्रम संहिताओं (Labor Codes) और निजीकरण का विरोध कर रहे हैं।
प्रमुख मांगें:
श्रम कानून: नवंबर 2025 में अधिसूचित चार नए श्रम संहिताओं और नियमों को तत्काल रद्द किया जाए।
विधेयक वापसी: बिजली संशोधन विधेयक 2025, बीज विधेयक 2025 और पशु एवं पशु कृषि अधिनियम 2025 को वापस लिया जाए।
मनरेगा (MGNREGA): महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम को पूरी तरह बहाल किया जाए और बजट बढ़ाया जाए।
नया विरोध: ‘विकसित भारत – रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025’ का कड़ा विरोध किया जा रहा है।
यह हड़ताल 14 प्रमुख राष्ट्रीय ट्रेड यूनियनों का संयुक्त प्रयास है, जिनमें INTUC, AITUC, HMS, CITU, AIUTUC, TUCC, SEWA, AICCTU, LPF और UTUC शामिल हैं।
साथ ही, केंद्रीय और राज्य कर्मचारियों, सार्वजनिक उपक्रमों (PSU) के कर्मियों और संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने भी इस बंद को पूर्ण समर्थन दिया है।
प्रशासन और यातायात पुलिस ने नागरिकों के लिए सुझाव जारी किए हैं:
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