Prashant Kishor's Jan Suraaj party creates history by defeating traditional strongholds of BJP and RJD in the Bankipur assembly by-election in Bihar.
बांकीपुर उपचुनाव: प्रशांत किशोर की ‘जन सुराज’ ने रचा इतिहास, ढह गए भाजपा और राजद के मजबूत किले”
पटना: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
बिहार के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के नतीजों ने राज्य की राजनीति में एक नए युग का शंखनाद कर दिया है।
प्रशांत किशोर की पार्टी ‘जन सुराज’ ने अपने पहले ही चुनाव में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग/NDA) और विपक्षी महागठबंधन (राजद) के सबसे मजबूत गढ़ में उन्हें करारी पटखनी दी है।
इस नतीजे ने न केवल दो दशक पुरानी राजद बनाम राजग केंद्रित राजनीति के लिए खतरे की घंटी बजा दी है, बल्कि मुख्यधारा के राजनीतिक दलों को युवाओं की आकांक्षाओं के प्रति सचेत होने का कड़ा संदेश भी दिया है।
बांकीपुर उपचुनाव के नतीजे स्पष्ट करते हैं कि बिहार का पारंपरिक वोट बैंक अब बदलाव चाहता है।
भाजपा का बिखरा गढ़: चुनाव में भाजपा का ‘अगड़ा-अति पिछड़ा’ समीकरण पूरी तरह फेल साबित हुआ।
हालत यह रही कि भाजपा उम्मीदवार अपने ही बूथ पर पीछे रह गए और उनका जनाधार केवल स्वजातीय कायस्थ और दूसरे अगड़े वर्ग के कुछ हिस्सों तक ही सीमित रह गया।
राजद के ‘M-Y’ समीकरण में सेंध: दूसरी ओर, राजद (RJD) के वोट बैंक में 30 हजार से अधिक वोटों की भारी कमी दर्ज की गई।
यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि पार्टी के मूल ‘यादव-मुस्लिम’ (M-Y) मतदाता (जो करीब 22 फीसदी हैं) ने इस बार राजद से दूरी बना ली है।
जन सुराज का शानदार उदय: महज एक वर्ष पूर्व जिस ‘जन सुराज’ पार्टी के 238 में से 236 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी, उसी पार्टी ने अपने मजबूत विजन के दम पर यह ऐतिहासिक जीत दर्ज की है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उपचुनाव अक्सर बड़े बदलावों की नींव रखते हैं। बांकीपुर के नतीजे को भारतीय राजनीति के कुछ सबसे ऐतिहासिक उपचुनावों की कड़ी में देखा जा रहा है:
वैशाली (1993): जनता दल सांसद के निधन के बाद हुए उपचुनाव में बीपीपी (BPP) की लवली आनंद ने सत्ताधारी दल को हराया था, जिसने 1995 के चुनावों में वोट बांटकर लालू प्रसाद यादव की राह आसान की थी।
इलाहाबाद (1988): वीपी सिंह ने कांग्रेस के सुनील शास्त्री को भारी अंतर से हराया था। इस हार ने राजीव गांधी सरकार के खिलाफ माहौल बनाया और 1989 में वीपी सिंह प्रधानमंत्री बने।
चिकमगलूर (1978): आपातकाल के बाद हारीं पूर्व पीएम इंदिरा गांधी ने 1978 के इस उपचुनाव में जीत दर्ज कर अपनी वापसी की थी।
आज बांकीपुर की हार भाजपा के लिए महज एक सीट गंवाना नहीं है, बल्कि यह उसके शहरी और पारंपरिक वोट बैंक में एक बड़ी सेंध का अलार्म है।
बांकीपुर उपचुनाव में मिली इस अप्रत्याशित हार पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने प्रतिक्रिया दी है।
उन्होंने कहा कि “भाजपा जनादेश का सम्मान करती है और बांकीपुर तथा दतिया (मध्य प्रदेश) के नतीजों पर पूरी गंभीरता से आत्ममंथन करेगी।”
नवीन ने आश्वस्त किया कि पार्टी अपनी कमियों को दूर कर नई ऊर्जा और संकल्प के साथ जनता के बीच जाएगी।
साथ ही, उन्होंने गुजरात की मांजलपुर सीट पर मिली जीत के लिए वहां के मतदाताओं और कार्यकर्ताओं का आभार भी व्यक्त किया।
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