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बांग्लादेश ‘कट्टरपंथी गृहयुद्ध’: उस्मान हादी की मौत के बाद हिंदुओं का नरसंहार

“बांग्लादेश इस समय अपने इतिहास के सबसे काले दौर से गुजर रहा है। कट्टरपंथी युवा नेता और ‘इंकलाब मंच’ के पूर्व प्रवक्ता शरीफ उस्मान हादी की सिंगापुर में मौत की खबर मिलते ही पूरा देश दंगों की आग में झुलस गया है”

ढाका/नई दिल्ली | 20 दिसंबर 2025 संतोष सेठ की रिपोर्ट 

राजधानी ढाका से लेकर इंडस्ट्रियल हब खुलना और पोर्ट सिटी चटगांव तक, कट्टरपंथी भीड़ ने सड़कों पर कब्जा कर लिया है। सबसे भयावह स्थिति अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदुओं की है, जिन्हें चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है।

रूह कंपा देने वाली बर्बरता: चौराहे पर हिंदू को जलाया

बांग्लादेश के मेमनसिंह शहर से मानवता को शर्मसार करने वाली खबर आई है। यहाँ दंगाइयों की एक हिंसक भीड़ ने एक हिंदू व्यक्ति को पकड़कर चौराहे पर सरेआम जिंदा जला दिया।

चश्मदीदों के मुताबिक, भीड़ ’18 करोड़ हादियों’ का नारा लगा रही थी और भारत के खिलाफ ‘जिहाद’ का एलान कर रही थी। यह घटना बांग्लादेश में कानून-व्यवस्था के पूरी तरह ध्वस्त होने का प्रमाण है।

मीडिया पर हमला: पत्रकारों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा

ढाका में दंगाइयों ने प्रेस की आजादी पर भी हमला बोला है। उग्र भीड़ ने दो प्रमुख अखबारों के दफ्तरों में आग लगा दी। पत्रकारों और मीडिया कर्मियों को दफ्तरों से बाहर निकालकर बेरहमी से पीटा गया। रिपोर्टों के अनुसार, स्थिति इतनी खराब थी कि सेना को हस्तक्षेप करना पड़ा और तब कहीं जाकर कुछ पत्रकारों की जान बचाई जा सकी।

शरीफ उस्मान हादी: मौत और दंगों का ट्रिगर

  • तख्तापलट का चेहरा: उस्मान हादी पिछले साल शेख हसीना की सरकार गिराने वाले प्रमुख चेहरों में से एक था। वह बांग्लादेश में कट्टरपंथी इस्लामिक कानून लागू करने और भारत के साथ संबंध खत्म करने का प्रबल समर्थक था।

  • जानलेवा हमला: 12 दिसंबर को जब हादी ने एक निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अपना चुनावी अभियान शुरू किया, तब अज्ञात हमलावरों ने उसे गोली मार दी थी।

  • सिंगापुर में मौत: मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने उसे इलाज के लिए सिंगापुर भेजा था, जहाँ गुरुवार देर रात उसने दम तोड़ दिया।

ढाका में ‘जमातियों’ का कब्जा, सरकार मौन

शुक्रवार शाम जैसे ही हादी का पार्थिव शरीर ढाका पहुँचा, ‘इंकलाब मंच’ के हजारों समर्थक सड़कों पर उतर आए। देखते ही देखते ओल्ड ढाका, शाहबाग, कारवां बाजार और धानमंडी जैसे इलाके युद्ध के मैदान में तब्दील हो गए। उपद्रवियों ने शेख हसीना की पार्टी ‘आवामी लीग’ के नेताओं के घरों और दफ्तरों को लूट लिया और आग के हवाले कर दिया।

हैरानी की बात यह है कि इस व्यापक हिंसा के बावजूद मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार खामोश बैठी है। पुलिस सड़कों से गायब है और दंगाइयों को खुली छूट मिली हुई है।

भारत के लिए चिंता की स्थिति

बॉर्डर के इलाकों में तनाव चरम पर है। कट्टरपंथियों द्वारा खुलेआम भारत के खिलाफ जंग का एलान करने और हिंदुओं को निशाना बनाने से भारत में भी गहरी चिंता व्यक्त की जा रही है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से इस नरसंहार पर तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की जा रही है।

Santosh SETH

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