अयोध्या राम मंदिर: SIT जांच का दिखा असर, चढ़ावे में 72% की भारी गिरावट

अयोध्या राम मंदिर: SIT जांच का दिखा असर, चढ़ावे में 72% की भारी गिरावट

अयोध्या राम मंदिर: SIT जांच और चोरी के आरोपों का दिखा असर, चढ़ावे में आई 72% की भारी गिरावट; जानें पूरा गणित “

अयोध्या: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

भव्य राम मंदिर के निर्माण और प्राण-प्रतिष्ठा के बाद देश-दुनिया से रामभक्तों ने दिल खोलकर दान दिया था।

लेकिन हाल ही में चढ़ावा राशि की कथित चोरी के आरोपों और उस पर बैठी विशेष जांच दल (SIT) की जांच ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है।

इसका सीधा असर मंदिर के दानपात्रों पर पड़ा है। श्रद्धालुओं में भ्रम का माहौल बनने के कारण रामलला के दरबार में आने वाले चढ़ावे (Donation) में लगभग 72% की भारी गिरावट दर्ज की गई है।

15 लाख से 5 लाख पर सिमटा रोजाना का चढ़ावा

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े सूत्रों के अनुसार, सामान्य दिनों में रोजाना लगभग 15 लाख रुपये का चढ़ावा आता था, जो शनिवार को सिमटकर महज 5 लाख रुपये तक रह गया।

आंकड़ों के मुताबिक, खास पर्वों और त्योहारों पर मंदिर में महीने का चढ़ावा 14 करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है, जबकि सामान्य दिनों में हर महीने 8 से 9 करोड़ रुपये का दान आता है। लेकिन वर्तमान में इसमें बड़ी कमी देखी जा रही है।

SIT जांच से ठप पड़ी काउंटिंग व्यवस्था

गिरावट का एक बड़ा कारण SIT जांच के चलते प्रशासनिक व्यवस्थाओं का प्रभावित होना भी है। जानकारी के अनुसार:

  • दान की गिनती करने वाले बैंक के 40 आउटसोर्स कर्मचारियों से लगातार 6 दिनों तक रोजाना 5-6 घंटे पूछताछ की गई।

  • इस पूछताछ के दौरान चढ़ावे की काउंटिंग (गिनती) पूरी तरह बंद रही।

  • नतीजतन, दान की भारी राशि ‘बैक्लॉग’ में रखी जा रही है, जिसकी गिनती अभी होनी बाकी है। इस अव्यवस्था ने भी श्रद्धालुओं के बीच भ्रम और अविश्वास का माहौल पैदा किया है।

राम मंदिर की आय का पूरा लेखा-जोखा (वर्ष 2024-25)

मंदिर सूत्रों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 में ट्रस्ट को विभिन्न मदों से बंपर आय प्राप्त हुई थी, जिसका विवरण इस प्रकार है:

आय का स्रोत

प्राप्त धनराशि

कुल आय (ऑनलाइन, कैश, चेक आदि)

327.07 करोड़ रुपये

दान (सीधा चढ़ावा)

153 करोड़ रुपये

बैंक एफडी (1400 करोड़) पर ब्याज

173 करोड़ रुपये

 

हालांकि, वित्तीय वर्ष 2025-26 की शुरुआत अब तक सुस्त रही है। नए वित्तीय वर्ष में अब तक केवल 5 करोड़ रुपये से अधिक की ही चढ़ावा राशि प्राप्त हो सकी है।

अब ट्रस्ट के सामने सबसे बड़ी चुनौती श्रद्धालुओं का विश्वास वापस जीतना और दान व्यवस्था को पारदर्शी बनाना है।