भारतीय सेना ने अरुणाचल प्रदेश में चीनी PLA के कथित कब्जे और कैंप स्थापित करने संबंधी मीडिया रिपोर्टों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया।
अरुणाचल में चीनी घुसपैठ की खबरों को सेना ने बताया बेबुनियाद, बोले- LAC पर स्थिति स्थिर लेकिन सतर्कता जरूरी”
नई दिल्ली : द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
भारतीय सेना ने अरुणाचल प्रदेश में चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) द्वारा कथित कब्जा करने और नया कैंप स्थापित करने संबंधी मीडिया रिपोर्टों का स्पष्ट रूप से खंडन किया है।
सेना ने इन दावों को “गलत, भ्रामक और पूरी तरह बेबुनियाद” बताते हुए कहा कि ऐसी खबरों में कोई तथ्य नहीं है।
सेना की ओर से जारी बयान में कहा गया कि कुछ मीडिया रिपोर्टों में अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्र में चीनी सेना द्वारा हालिया अतिक्रमण और कैंप स्थापित किए जाने का दावा किया गया है।
जबकि वास्तविक स्थिति इससे बिल्कुल अलग है। भारतीय सेना ने लोगों से अपुष्ट और भ्रामक सूचनाओं पर विश्वास न करने की अपील भी की।
सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने सोमवार को कहा कि भारत-चीन सीमा पर हालात फिलहाल स्थिर हैं, हालांकि सीमा क्षेत्र संवेदनशील बना हुआ है और वहां लगातार सतर्कता बनाए रखना आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि दोनों देशों की सेनाओं के बीच गलतफहमियों को रोकने और स्थानीय स्तर के विवादों का समाधान करने के लिए नियमित संवाद जारी रहता है।
हर वर्ष 1,100 से अधिक जमीनी स्तर की बैठकें, हॉटलाइन वार्ता, फ्लैग मीटिंग और कमांडर स्तर की बातचीत आयोजित की जाती हैं, जिससे सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलती है।
जनरल द्विवेदी ने कहा कि सेनाओं के पीछे हटने (Disengagement) से जुड़े समझौतों ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर स्थिरता कायम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उन्होंने कहा कि जब भी दोनों देशों के बीच LAC की अलग-अलग व्याख्या के कारण स्थानीय स्तर पर कोई विवाद उत्पन्न होता है, तो उसे स्थापित सैन्य तंत्र के माध्यम से शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाया जाता है।
उनके अनुसार, नियमित संवाद और समन्वय के कारण सीमावर्ती इलाकों में गश्त, निगरानी और अन्य परिचालन गतिविधियों का संचालन भी अधिक व्यवस्थित तरीके से हो रहा है।
सेना प्रमुख ने स्पष्ट किया कि भारतीय सेना की प्राथमिकताएं पूरी तरह स्पष्ट हैं। पहली प्राथमिकता LAC पर शांति और स्थिरता बनाए रखना है।
दूसरी प्राथमिकता बातचीत और स्थापित तंत्रों के माध्यम से स्थानीय मुद्दों का समाधान करना है। वहीं तीसरी प्राथमिकता किसी भी संभावित खतरे का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने के लिए मजबूत सैन्य तैनाती बनाए रखना है।
उन्होंने कहा कि भारतीय सेना उत्तरी सीमाओं पर बुनियादी ढांचे, लॉजिस्टिक्स, निगरानी प्रणाली और परिचालन तैयारियों को लगातार मजबूत कर रही है।
उन्होंने दोहराया कि भारत बातचीत का पक्षधर है, लेकिन उसकी नीति “ताकत के जरिए शांति” पर आधारित है और देश की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए सेना पूरी तरह सक्षम और तैयार है।
गौरतलब है कि पिछले महीने बीजिंग में भारत और चीन के बीच भारत-चीन सीमा मामलों पर परामर्श एवं समन्वय कार्य तंत्र (WMCC) की 35वीं बैठक आयोजित हुई थी।
बैठक के बाद दोनों देशों ने सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थिति की समीक्षा की और सीमा पर शांति एवं स्थिरता बनाए रखने की दिशा में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया।
बैठक में सीमा प्रबंधन, सीमा निर्धारण, सीमा पार सहयोग और तंत्र को और प्रभावी बनाने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
भारत ने सीमा-पार नदियों से जुड़े विशेषज्ञ-स्तरीय तंत्र की अगली बैठक जल्द आयोजित करने पर भी जोर दिया।
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