Breaking News

छत्तीसगढ़ : सुकमा के 50 अति-दुर्गम गांवों में पहली बार फहरा तिरंगा

ऐतिहासिक बदलाव: सुकमा के 50 अति-दुर्गम नक्सल प्रभावित गांवों में आजादी के बाद पहली बार फहरा तिरंगा”

सुकमा/रायपुर : द पॉलिटिक्स अगेन : कृष्णा सोनी की रिपोर्ट

छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के सुदूर और दुर्गम गांवों के लिए वर्ष 2026 का स्वतंत्रता दिवस एक नया इतिहास रच गया।

जिन इलाकों में कभी नक्सलियों की बंदूकों का खौफ गूंजता था, वहां आजादी के दशकों बाद पहली बार ग्रामीणों ने पूरे उत्साह और गर्व के साथ तिरंगा फहराकर स्वतंत्रता का उत्सव मनाया।

जिले के अति दुर्गम और कभी नक्सल हिंसा के गढ़ रहे लगभग 50 गांवों में यह पहला मौका था जब राष्ट्रगान की धुन गूंजी और लोगों ने खुले आसमान के नीचे राष्ट्रध्वज को सलामी दी।

नक्सलवाद के साये से निकलकर लोकतंत्र की छांव में बस्तर

यह ऐतिहासिक दृश्य केवल एक राष्ट्रीय पर्व का आयोजन नहीं, बल्कि बदलते बस्तर की एक नई और सुखद तस्वीर है।

चिंतागुफा, चिंतलनार, जगरगुंडा, किस्टाराम और कोंटा जैसे विभिन्न थाना क्षेत्रों के उन गांवों में ग्रामीण घरों से बाहर निकले, जहां कभी नक्सली दहशत के कारण सरकारी गतिविधियां और राष्ट्रीय पर्व मनाना नामुमकिन माना जाता था।

नक्सलवाद के कमजोर पड़ने के बाद, अब इन गांवों में लोकतांत्रिक व्यवस्था और प्रशासन की पहुंच मजबूत हो रही है।

सुकमा पुलिस की भूमिका: खौफ की जगह पनपा विश्वास

बस्तर के इन गांवों में आई इस नई सुबह के पीछे सुकमा पुलिस और सुरक्षाबलों की अहम भूमिका रही है।

सुरक्षाबलों ने केवल नक्सलियों को खदेड़ने का काम नहीं किया, बल्कि ग्रामीणों के बीच विश्वास कायम करने, शासन की लाभकारी योजनाओं को गांवों तक पहुंचाने और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने पर भी जोर दिया।

सुरक्षाबलों की लगातार मौजूदगी से ग्रामीणों के मन से नक्सलियों का डर खत्म हुआ है, और वे खुद आगे आकर राष्ट्रीय पर्वों में भागीदार बन रहे हैं।

“बंदूक की जगह लोकतंत्र ने ली” : एसपी मयंक गुर्जर

सुकमा के पुलिस अधीक्षक (SP) मयंक गुर्जर ने इस बदलाव को एक बड़ा मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा, “सुकमा में नक्सलमुक्ति के बाद यह स्वतंत्रता दिवस पूरे जिले के लिए एक ऐतिहासिक अवसर है।

जिन 40 से 50 गांवों में आजादी के बाद पहली बार तिरंगा फहराया गया है, वहां हमारा प्रयास है कि देशभक्ति की भावना के साथ ग्रामीणों को शासन से जोड़ा जाए और उनकी समस्याओं का समाधान किया जाए।”

एसपी गुर्जर ने आगे कहा कि यह बदलाव इस बात का प्रमाण है कि नक्सलमुक्ति के बाद ग्रामीण अब शासन-प्रशासन के साथ खुलकर संवाद कर रहे हैं।

आज इन गांवों में बंदूक की जगह लोकतंत्र, भय की जगह विश्वास और अलगाव की जगह राष्ट्र की मुख्यधारा मजबूत हो रही है।

Santosh SETH

Recent Posts

पश्चिम बंगाल: लागू होगी आयुष्मान भारत योजना, देशभर में मिलेगा मुफ्त इलाज

पश्चिम बंगाल में स्वास्थ्य क्रांति: सीएम शुभेंदु अधिकारी का बड़ा ऐलान, राज्य में लागू होगी…

2 hours ago

‘वंदे मातरम्’ विवाद: शुभेंदु अधिकारी ने सोनिया गांधी से माफी की मांग की

'वंदे मातरम्' पर गरमाई राजनीति: शुभेंदु अधिकारी और बंकिम चंद्र के वंशज ने सोनिया गांधी…

2 hours ago

नाग पंचमी और सावन सोमवार पर जानें आज का अपना राशिफल

17 अगस्त 2026 का राशिफल: नाग पंचमी और सावन की तीसरी सोमवारी का महासंयोग, जानें…

3 hours ago

बंगाल: तारापीठ के होटल में भीषण आग, 5 श्रद्धालुओं की दर्दनाक मौत

पश्चिम बंगाल: तारापीठ के होटल में तड़के लगी भीषण आग, 5 श्रद्धालुओं की दर्दनाक मौत,…

3 hours ago

बिहार: लखीसराय के अशोकधाम मंदिर में भगदड़, 6 की दर्दनाक मौत

बिहार में दर्दनाक हादसा: लखीसराय के अशोकधाम मंदिर में मची भगदड़, 6 श्रद्धालुओं की मौत,…

3 hours ago

जौनपुर: पैक्ड पानी में BIS की अनिवार्यता खत्म, अब FSSAI देगा लाइसेंस

जौनपुर: पैक्ड पानी के कारोबारियों को बड़ी राहत, BIS सर्टिफिकेशन की अनिवार्यता खत्म, अब FSSAI…

3 hours ago