डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की तस्वीर और अमित शाह

अमित शाह डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर बंगाल दौरे पर

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती: ‘एक देश, एक विधान’ के प्रणेता, सम्मान में अमित शाह आज पहुंचेंगे बंगाल”

कोलकाता : THE POLITICS AGAIN डेस्क: संतोष सेठ की रिपोर्ट

भारतीय जनसंघ के संस्थापक, महान शिक्षाविद और प्रखर राष्ट्रवादी नेता डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की आज 6 जुलाई को 125वीं जयंती है।

उनका जन्म 6 जुलाई 1901 को उस दौर में हुआ था, जब देश ब्रिटिश शासन की जंजीरों में जकड़ा हुआ था।

उनके पिता आशुतोष मुखर्जी एक जाने-माने न्यायाधीश, शिक्षाविद और कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति थे।

पिता के पदचिह्नों पर चलते हुए डॉ. मुखर्जी ने अपना पूरा जीवन देश की शिक्षा, एकता और अखंडता के लिए समर्पित कर दिया।

इस ऐतिहासिक 125वीं जयंती के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पश्चिम बंगाल में बड़े राजनीतिक और वैचारिक कार्यक्रमों का आयोजन कर रही है, जिसमें शामिल होने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज बंगाल पहुंच रहे हैं।

महज़ 33 वर्ष की आयु में बने कुलपति

डॉ. मुखर्जी की मेधा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह मात्र 33 वर्ष की उम्र में कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति बन गए थे। इस पद पर वह चार वर्ष तक रहे। शिक्षा जगत के बाद उन्होंने राजनीति का रुख किया:

  • वह कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतकर पहली बार विधायक बने।

  • जब कांग्रेस ने विधायिका के बहिष्कार का फैसला किया, तो उन्होंने वैचारिक मतभेदों के चलते इस्तीफा दे दिया।

  • इसके बाद वह हिंदू महासभा से जुड़े और बाद में निर्दलीय चुनाव लड़कर जीत हासिल की।

नेहरू कैबिनेट से इस्तीफा और ‘जनसंघ’ की स्थापना

1937 के चुनावों के बाद डॉ. मुखर्जी हिंदू महासभा और निर्दलीय गुट के प्रमुख विपक्षी नेता बनकर उभरे।

स्वतंत्रता के बाद उनकी योग्यता को देखते हुए पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें केंद्र सरकार में उद्योग और आपूर्ति मंत्री बनाया।

लेकिन, भारत के हितों से समझौता न करते हुए ‘लियाकत-नेहरू समझौते’ के कड़े विरोध में उन्होंने 6 अप्रैल 1950 को मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया।

इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के तत्कालीन सरसंघचालक गुरु गोलवलकर से विचार-विमर्श कर 21 अक्टूबर 1951 को ‘भारतीय जनसंघ’ की स्थापना की और इसके पहले अध्यक्ष बने। जनसंघ ने 1952 के पहले आम चुनाव में तीन सीटों पर शानदार विजय हासिल की थी।

‘एक देश, एक विधान’ का नारा और संदिग्ध मौत

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी अनुच्छेद 370 (Article 370) के घोर विरोधी थे। उन्होंने जम्मू-कश्मीर को पूर्ण रूप से भारत में विलय कराने के लिए एक बड़ा आंदोलन छेड़ा और ‘एक देश, एक विधान, एक प्रधान, एक निशान’ का ऐतिहासिक नारा दिया।

  • जम्मू-कश्मीर के विशेषाधिकारों को चुनौती देते हुए वर्ष 1953 में वह बिना परमिट के कश्मीर गए, जहां उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

  • गिरफ्तारी के दौरान ही 23 जून 1953 को 51 वर्ष की आयु में श्रीनगर में संदिग्ध परिस्थितियों में उनका निधन हो गया, जो आज भी भारतीय इतिहास का एक अनसुलझा रहस्य है।

बंगाल में भव्य आयोजन: डॉ. मुखर्जी के बलिदान और उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए आज 125वीं जयंती पर बंगाल में विशेष आयोजन हो रहे हैं।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज इन कार्यक्रमों में शिरकत करेंगे और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के पैतृक गांव जाकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।

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