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अमेरिका का भारत को झटका: ट्रंप प्रशासन ने आयात पर लगाया 10% टैरिफ

अमेरिका का भारत समेत 17 देशों को बड़ा झटका: ट्रंप प्रशासन ने आयातित उत्पादों पर लगाया 10% अतिरिक्त शुल्क, जानें क्या है वजह”

वाशिंगटन/नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार के मोर्चे पर एक बड़ा और कड़ा कदम उठाया है।

 

अमेरिका ने ‘जबरन श्रम’ (Forced Labor) से बने उत्पादों के आयात पर सख्त कार्रवाई करते हुए भारत, कनाडा, ब्रिटेन, बांग्लादेश और पाकिस्तान सहित 17 देशों से आयातित वस्तुओं पर 10 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क (Tariff) लगाने की घोषणा की है।

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जैमीसन ग्रीर ने शुक्रवार को 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत इस नए शुल्क का आधिकारिक ऐलान किया।

अमेरिका के इस फैसले से भारत और अमेरिका के बीच चल रहे द्विपक्षीय व्यापार पर गहरा असर पड़ने की संभावना है।

मानवाधिकारों की रक्षा का दिया हवाला

यूएसटीआर (USTR) के आधिकारिक बयान के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर जैमीसन ग्रीर ने दुनिया की उन 60 अर्थव्यवस्थाओं पर अंतिम कार्रवाई की है, जो जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात पर प्रभावी रोक लगाने में विफल रही हैं।

इस फैसले को सही ठहराते हुए जैमीसन ग्रीर ने कहा, “यह कदम मानवाधिकारों के उल्लंघन को रोकने और व्यापार में पैदा हुई विकृतियों को दूर करने की दिशा में उठाया गया है। हमारा मकसद दुनिया भर के श्रमिकों के हितों की रक्षा करना है।”

भारत के लिए क्या बदला? (12.5% से 10% तक का सफर)

प्रस्तावित सूची में पहले भारत को 12.5 प्रतिशत शुल्क वाले देशों की श्रेणी में रखा गया था। हालांकि, जब जून में इस प्रस्तावित शुल्क की घोषणा हुई, तो भारत ने सतर्कता दिखाते हुए 14 जून को अपनी विदेश व्यापार नीति में बड़ा संशोधन किया और जबरन श्रम से तैयार वस्तुओं के आयात पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया था।

इसके बावजूद, अब भारत को उन 17 देशों की अंतिम सूची में रखा गया है जिन पर 10 प्रतिशत शुल्क लागू होगा।

आपको बता दें कि यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा फरवरी में “पारस्परिक शुल्क (Reciprocal Tariff)” को अवैध करार दिए जाने के बाद लगाए गए 10 प्रतिशत आपातकालीन शुल्क की अवधि शुक्रवार को समाप्त हो रही थी।

भारत ने जताई कड़ी आपत्ति

भारत सरकार ने यूएसटीआर की इस कार्रवाई और जांच पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। भारत का स्पष्ट रुख है कि व्यापार से जुड़े ऐसे मुद्दों पर दोनों देशों के बीच चल रही ‘द्विपक्षीय व्यापार समझौता वार्ता’ के दौरान ही चर्चा की जानी चाहिए, न कि एकतरफा टैरिफ थोपा जाना चाहिए।

भारत-अमेरिका व्यापार पर कितना पड़ेगा असर?

अमेरिका भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और भारतीय निर्यात (Export) के लिए दुनिया का सबसे बड़ा बाजार है।

वाणिज्य विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2025 में भारत और अमेरिका के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार लगभग 141 अरब अमेरिकी डॉलर का रहा था।

इसमें भारत से अमेरिका को किया गया निर्यात 87.3 अरब अमेरिकी डॉलर का था। ऐसे में 10% अतिरिक्त शुल्क लागू होने से भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

Santosh SETH

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