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वजन उपकरणों के सत्यापन नियमों में संशोधन, कारोबारी सुगमता को बढ़ावा

सरकार का बड़ा कदम: उच्च क्षमता वाले वजन उपकरणों के सत्यापन नियमों में संशोधन, कारोबारियों को मिलेगी भारी राहत”

नई दिल्ली :THE POLITICS AGAIN डेस्क: संतोष सेठ की रिपोर्ट

व्यापार और उद्योग जगत में ‘कारोबारी सुगमता’ (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उपभोक्ता कार्य विभाग ने एक महत्वपूर्ण पहल की है।

विभाग ने उच्च क्षमता वाले वजन उपकरणों (Weighing Instruments) के सत्यापन के लिए मानक वजन की आवश्यकता को काफी कम कर दिया है।

इसके लिए ‘कानूनी माप विज्ञान (सामान्य) नियमावली, 2011’ (Legal Metrology Rules) में संशोधन किया गया है, जिसमें अब एक वैज्ञानिक और पुनरावृत्ति-आधारित (Repeatability-based) सत्यापन दृष्टिकोण लागू किया गया है।

क्या हुआ है मुख्य बदलाव?

पहले उद्योगों और वजन पुल (Weighbridge) संचालकों को भारी रसद और परिवहन लागत का सामना करना पड़ता था।

  • पुराना नियम: एक टन या उससे अधिक क्षमता वाले वजन यंत्रों के सत्यापन के समय, स्थिर भारों से प्रतिस्थापित करने से पहले कम से कम एक टन या यंत्र की अधिकतम क्षमता का 50 प्रतिशत मानक भार (Standard Weight) का उपयोग करना अनिवार्य था।

  • नया नियम (संशोधन): अब इस अनिवार्यता को युक्तिसंगत बनाया गया है। पुनरावृत्ति परीक्षण के सफल संचालन के आधार पर, आवश्यक मानक भारों की मात्रा को अधिकतम क्षमता के 50 प्रतिशत से घटाकर केवल 20 प्रतिशत (पांचवां हिस्सा) कर दिया गया है।

खास बात: इस कटौती के बावजूद सत्यापन की सटीकता, विश्वसनीयता और उपभोक्ता संरक्षण के निर्धारित मानकों से कोई समझौता नहीं किया गया है।

इस ऐतिहासिक सुधार के प्रमुख लाभ

विनियामक नियमों में इस बदलाव से कई सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे:

  • अनुपालन बोझ में कमी: उद्योगों, गोदामों, लॉजिस्टिक संचालकों और वजन पुल मालिकों के लिए नियमों का पालन करना आसान होगा।

  • लागत में भारी बचत: मानक वजन की बड़ी मात्रा के परिवहन और हैंडलिंग से जुड़ी भारी-भरकम लॉजिस्टिक लागत बचेगी।

  • समय की बचत: उच्च क्षमता वाले उपकरणों का सत्यापन अब तेजी से हो सकेगा, जिससे परिचालन में लगने वाले समय में कमी आएगी।

  • बेहतर संसाधन प्रबंधन: सरकारी अधिकारियों द्वारा सत्यापन संसाधनों का अधिक कुशलता से उपयोग किया जा सकेगा।

  • दक्षता में सुधार: सटीकता को बनाए रखते हुए कानूनी माप-विज्ञान सत्यापन गतिविधियों की कुल दक्षता बढ़ेगी।

क्या है इसका वैज्ञानिक आधार?

यह सुधार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत माप संबंधी सिद्धांतों पर आधारित है। वैज्ञानिक मापदंडों के अनुसार, दोहराव परीक्षण (Repeatability Test) किसी भी वजन उपकरण की स्थिरता और स्थायित्व को स्थापित करता है।

यही कारण है कि अब मानक वजन की कम मात्रा के साथ भी 100% विश्वसनीय सत्यापन संभव हो पाता है।

विभाग का यह कदम कानूनी मापन प्रणाली के आधुनिकीकरण और साक्ष्य-आधारित सुधारों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

यह संशोधन एक अधिक पारदर्शी, कुशल और उद्योग-अनुकूल विनियामक वातावरण बनाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा, जो वाणिज्यिक लेन-देन में निष्पक्षता और विश्वास दोनों सुनिश्चित करेगा।

Santosh SETH

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