जौनपुर में अलर्ट: सुजानगंज में मिला ‘दिमागी बुखार’ (JE) का पहला केस
जौनपुर में अलर्ट: सुजानगंज में मिला ‘दिमागी बुखार’ (जेई) का पहला केस, स्वास्थ्य विभाग ने तेज कीं निरोधात्मक गतिविधियां”
जौनपुर: द पॉलिटिक्स अगेन : वरुण यादव की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश के जौनपुर जनपद में स्वास्थ्य विभाग में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब सुजानगंज ब्लॉक में इस वर्ष का ‘दिमागी बुखार’ (जापानी एन्सेफलाइटिस – JE) का पहला केस रिपोर्ट हुआ।
ब्लॉक के ग्राम भावुपुर की रहने वाली सुशीला देवी में जेई (JE) की पुष्टि हुई है। मरीज का फिलहाल उपचार चल रहा है और स्थिति पर स्वास्थ्य विभाग नजर बनाए हुए है।
केस की जानकारी मिलते ही जिला मलेरिया अधिकारी (DMO) और महामारी विशेषज्ञों की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और गांव में सघन केस सत्यापन व मच्छर निरोधात्मक गतिविधियां शुरू कर दीं।
स्वास्थ्य टीम का ग्राम भ्रमण और निरोधात्मक कार्रवाई
जिला मलेरिया अधिकारी सुनील कुमार यादव और महामारी रोग विशेषज्ञ डॉ. जियाउल हक ने सुजानगंज के ग्राम भावुपुर पहुंचकर जेई पीड़ित सुशीला देवी के घर का भ्रमण किया। टीम ने केस का सत्यापन और फॉलोअप (Follow-up) किया।
संक्रमण को गांव में फैलने से रोकने के लिए स्वास्थ्य टीम ने युद्ध स्तर पर निरोधात्मक गतिविधियां (Preventive Measures) संपादित कराईं। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
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ब्रीडिंग सोर्स सर्वे और रिडक्शन: मच्छरों के पनपने के स्थानों की पहचान करना और उन्हें नष्ट करना (सोर्स रिडक्शन)।
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जागरूकता अभियान: गांव में प्रचार-प्रसार, पोस्टर पेस्टिंग और पैम्फलेट वितरण।
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स्वास्थ्य शिक्षा: ग्रामीणों को दिमागी बुखार से बचाव के प्रति जागरूक किया गया।
क्या है दिमागी बुखार (जेई/एईएस) और कैसे फैलता है?
जिला मलेरिया अधिकारी सुनील कुमार यादव ने अवगत कराया कि दिमागी बुखार को जेई/एईएस (जापानी एन्सेफलाइटिस/एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम) भी कहते हैं।
यह एक गंभीर वायरस जनित संक्रामक रोग है, जो संक्रमित ‘मादा क्यूलेक्स मच्छर’ (Culex Mosquito) के काटने से फैलता है।
उन्होंने बताया कि इस वायरस का मुख्य स्रोत (Host) सुअर (Pigs) और जंगली पक्षी होते हैं। मादा क्यूलेक्स मच्छर इन संक्रमित जानवरों और पक्षियों का खून पीने के बाद जब स्वस्थ मनुष्य को काटता है, तो यह संक्रमण मानव शरीर में फैल जाता है।
इसका खतरा उन इलाकों में सबसे अधिक होता है जहां लंबे समय तक जलभराव और गंदगी रहती है, क्योंकि ऐसे स्थानों पर मच्छर और उनके होस्ट जानवर दोनों पनपते हैं।
दिमागी बुखार के लक्षण और प्रथम उपचार
नोडल अधिकारी डॉ. आलोक सिंह ने बताया कि वर्षा काल के दौरान वेक्टर जनित (Vector-borne) रोगों का प्रकोप बढ़ जाता है, इसलिए इसके लक्षणों को पहचानना जरूरी है।
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प्रमुख लक्षण: तेज बुखार, भयंकर सिर दर्द, बदन दर्द, उल्टी-मितली, बेहोशी या चक्कर आना, शरीर में झटके (दौरे) पड़ना, मानसिक भ्रम, बोलने में दिक्कत और मुंह से झाग आना।
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गंभीर मामलों में मरीज कोमा (Coma) में जा सकता है, लकवा (Paralysis) मार सकता है या विकलांगता भी आ सकती है।
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प्राथमिक सावधानी: यदि मरीज को झटके आ रहे हों, तो उसे पीठ के बल न लिटाकर बाएं या दाएं करवट लिटाएं।
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बेहोशी की हालत में मरीज के मुंह में कुछ भी न डालें। झोलाछाप डॉक्टरों से बचें और सीधे जिला चिकित्सालय जाएं।
बचाव के उपाय और सरकारी अभियान
स्वास्थ्य विभाग ने अपील की है कि घरों के आसपास साफ-सफाई रखें, जलजमाव न होने दें, पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें, मच्छरदानी का प्रयोग करें और बच्चों को जेई (JE) का टीका अवश्य लगवाएं।
गौरतलब है कि दिमागी बुखार से बचाव के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ‘संचारी दस्तक अभियान’ चला रही है।
इसके तहत पंचायती राज, नगर विकास, पशुपालन और स्वास्थ्य विभाग मिलकर साल में तीन बार गांव-गांव जाकर साफ-सफाई, झाड़ी कटाई, जल निकासी और मच्छरों की ब्रीडिंग रोकने का सघन अभियान चलाते हैं।
जौनपुर में ‘दिमागी बुखार’ (JE/AES): मुख्य बातें और लक्षण
| विषय / जानकारी | महत्वपूर्ण तथ्य |
| पहला केस | सुशीला देवी (ग्राम भावुपुर, ब्लॉक सुजानगंज, जौनपुर) |
| बीमारी का नाम | जापानी एन्सेफलाइटिस / एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम (JE/AES) |
| कैसे फैलता है? | संक्रमित ‘मादा क्यूलेक्स मच्छर’ (Culex Mosquito) के काटने से। |
| वायरस के मुख्य वाहक | सुअर (Pigs), जंगली पक्षी और जलभराव वाले इलाके। |
| स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई | केस सत्यापन, सोर्स रिडक्शन, पोस्टर व पैम्फलेट वितरण। |
| प्रमुख लक्षण | तेज बुखार, सिर दर्द, झटके आना (दौरे), बेहोशी, कोमा, बोलने में दिक्कत। |
| सरकारी पहल | स्वास्थ्य, पंचायत और नगर विकास विभाग का ‘संचारी दस्तक अभियान’। |











