Indian farmers using modern agricultural machinery and drones in the field

कृषि मशीनीकरण: किसानों को मशीनरी पर 80% तक की भारी सब्सिडी

कृषि मशीनीकरण से बदल रही खेती: सरकार दे रही 80% तक सब्सिडी, 100% एफडीआई (FDI) को मंजूरी”

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट

भारतीय कृषि को आधुनिक और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने के लिए सरकार बड़े कदम उठा रही है।

कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में बताया कि छोटे और सीमांत किसानों को खेती की आधुनिक मशीनों से जोड़ने के लिए ‘कृषि मशीनीकरण उप-मिशन’ (SMAM) तेजी से काम कर रहा है।

इसके तहत किसानों को कृषि उपकरण खरीदने पर भारी सब्सिडी, 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति और महिला-अनुकूल उपकरणों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

किसानों के लिए सब्सिडी और कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC)

सरकार का मुख्य फोकस छोटे किसानों पर है जो महंगी मशीनें नहीं खरीद सकते। एसएमएएम (SMAM) योजना के तहत व्यक्तिगत किसानों को मशीनरी और उपकरण खरीदने के लिए 40-50% तक की सब्सिडी दी जा रही है।

इसके अलावा, मशीनें किराए पर उपलब्ध कराने के लिए ‘कस्टम हायरिंग सेंटर’ (CHC) स्थापित करने पर 40% (250 लाख रुपये तक के प्रोजेक्ट पर) और ‘कृषि मशीनरी बैंक’ (FMB) बनाने पर 80% (30 लाख रुपये तक के प्रोजेक्ट पर) की भारी वित्तीय सहायता दी जा रही है। पूर्वोत्तर राज्यों में यह सहायता 95% तक है।

ड्रोन, महिला-अनुकूल उपकरण और 100% FDI

कृषि मंत्री ने बताया कि खेती में इंटेलिजेंट रोबोट, प्रिसिजन उपकरण, ड्रोन और महिलाओं के लिए आसान कृषि उपकरणों को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है।

भारत में आधुनिक मशीनों के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने स्वचालित मार्ग से 100% एफडीआई (FDI) की अनुमति दी है।

इससे विदेशी कंपनियां भारत में अपनी उत्पादन इकाइयां लगा सकेंगी। साथ ही, कृषि क्षेत्र के स्टार्टअप्स को भी ‘रफ्तार’ (RAFTAAR) योजना के तहत आर्थिक मदद दी जा रही है।

पराली जलाने की समस्या का समाधान

पराली जलाने (फसल अवशेष) की समस्या से निपटने के लिए पंजाब, हरियाणा, यूपी और दिल्ली एनसीआर में चल रही ‘फसल अवशेष प्रबंधन’ (CRM) योजना को अब एसएमएएम के साथ मिला दिया गया है। इसके तहत किसानों को रियायती दरों पर मशीनें दी जा रही हैं।

विदेशी सहयोग और अनुसंधान

सांसद परषोत्तमभाई रुपाला द्वारा दक्षिण कोरिया, जापान आदि देशों के साथ सहयोग के सवाल पर मंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में केवल दक्षिण कोरिया के साथ कोई विशेष प्रस्ताव नहीं है,

लेकिन भारत आईसीएआर (ICAR) के माध्यम से लगातार वैश्विक तकनीक अपना रहा है और विभिन्न देशों के साथ मिलकर शोध और तकनीक हस्तांतरण पर काम कर रहा है।