लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'दिमागी नक्सल' वाले तंज के बाद सोशल मीडिया पर एक नई डिजिटल पहल 'दिमागी नक्सल जनता पार्टी' सामने आई है, जिसने महज दो दिन में लाखों फॉलोअर्स जोड़ लिए हैं।
‘कॉकरोच’ के बाद अब ‘दिमागी नक्सल पार्टी’ की सोशल मीडिया पर एंट्री, PM मोदी के तंज से उपजा नया डिजिटल आंदोलन”
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
भारत की राजनीति में इन दिनों ‘डिजिटल पार्टियों’ और सोशल मीडिया आंदोलनों का एक नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है।
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) की तर्ज पर अब सोशल मीडिया पर एक और नई पार्टी ने दस्तक दी है, जिसका नाम है— ‘दिमागी नक्सल जनता पार्टी’ (DNJP)।
यह डिजिटल मंच 15 अगस्त को लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए भाषण के बाद अस्तित्व में आया है और देखते ही देखते यह सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा था कि देश ने हथियार उठाने वाले नक्सलियों के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल की है,
लेकिन अब समाज में कुछ ‘दिमागी नक्सली’ (Urban/Mental Naxals) मौजूद हैं, जो विचारधारा के जरिए अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री के इस तंज को आधार बनाकर ‘दिमागी नक्सल पार्टी’ के नाम से इंस्टाग्राम और एक्स (X) पर पेज बना दिए गए।
यह कोई चुनाव आयोग से मान्यता प्राप्त दल नहीं है, बल्कि एक राजनीतिक व्यंग्य और विरोध दर्ज कराने का नया तरीका है।
तेज ग्रोथ: कॉकरोच जनता पार्टी (जिसने 10 दिन में 20 मिलियन फॉलोअर्स जुटाए थे) की तरह ही, दिमागी नक्सल पार्टी ने इंस्टाग्राम पर महज 24 घंटे में 1 लाख और 2 दिनों के अंदर 2 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स जुटा लिए हैं।
मुख्य नारा: इस डिजिटल पहल का स्पष्ट नारा है— “सोचो, रिसर्च करो, विरोध करो।”
फिलहाल इस डिजिटल पहल के संस्थापकों की आधिकारिक पहचान गुप्त रखी गई है।
बायो: इंस्टाग्राम बायो में संस्थापक का नाम ‘एक दिमागी भारतीय’ और सह-संस्थापक का नाम ’56 इंच वाले’ लिखा गया है।
विचारधारा: पार्टी खुद को शहीद भगत सिंह की विचारधारा का अनुयायी बताती है। उनका दावा है कि यदि उनके पेज को बंद करने या देशद्रोही बताने की कोशिश की गई, तो यह भगत सिंह की सोच का अपमान होगा।
फॉलोइंग लिस्ट: यह पेज कुणाल कामरा, श्याम रंगीला, ध्रुव राठी, प्रकाश राज, अनुराग कश्यप, सोनाक्षी सिन्हा, सोनम वांगचुक और पत्रकार रवीश कुमार जैसी मुखर हस्तियों को फॉलो करता है।
पार्टी ने स्पष्ट किया है कि उसका न तो कांग्रेस, न आम आदमी पार्टी, न समाजवादी पार्टी और न ही कॉकरोच पार्टी से कोई सीधा संबंध है,
लेकिन वैचारिक रूप से वह इन सबके साथ चल सकती है। वेबसाइट पर इनके कुछ प्रमुख नियम (‘दिमागी बनो, बेवकूफ नहीं’) सूचीबद्ध हैं:
सवाल पूछना: सरकार या पार्टी कोई भी हो, सवाल हर हाल में पूछा जाना चाहिए।
आपसी सामंजस्य: लोगों को अपनी राजनीतिक पार्टी बदलने की जरूरत नहीं है, बस अलग-अलग तरह के सवाल पूछने वाले लोग एक-दूसरे को दुश्मन समझना बंद करें।
कोई सांगठनिक ढांचा नहीं: पार्टी का कोई झंडा, तय फॉन्ट या प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाला आधिकारिक प्रवक्ता नहीं है।
गाली से नारा: उनका स्पष्ट संदेश है— “आप इसे (दिमागी नक्सल को ) गाली की तरह इस्तेमाल करेंगे, हम दोपहर तक इसे अपना नारा बना लेंगे।”
इस शब्द ने भारी राजनीतिक घमासान भी पैदा कर दिया है।
कांग्रेस का हमला: पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ कहे जाने पर गर्व है।
वहीं, महासचिव जयराम रमेश ने इसे सरकार की ‘राजनीतिक हताशा’ करार दिया और याद दिलाया कि कैसे जातिगत जनगणना की मांग करने वालों को पहले नक्सल कहा जाता था।
CJP का समर्थन: कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पढ़े-लिखे युवाओं को सिर्फ सवाल पूछने पर नक्सली कहना सरकार का अहंकार और नाकामियों को छिपाने का प्रयास है।
लगातार हो रहे हमलों के बीच बीजेपी ने भी इस शब्द की व्याख्या की है। राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने एक टीवी डिबेट में बताया कि दिमागी नक्सल वे लोग हैं:
जिन्हें भारत की 1.8% ‘हिंदू ग्रोथ रेट’ में सामंजस्य नजर आता था, लेकिन 7.4% की सबसे तेज आर्थिक विकास दर रास नहीं आ रही है।
जिन्हें CAA कानून में मुस्लिमों की नागरिकता छिनती दिख रही थी, जबकि 5 साल में किसी की नागरिकता नहीं गई।
जिन्हें ‘जय श्री राम’ के नारे में युद्ध घोष (War Cry) नजर आता है, लेकिन ‘सर तन से जुदा’ की घटनाओं में भी सेक्युलर संगीत सुनाई देता है।
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