विजय का शपथ ग्रहण आज: तमिलनाडु के नए CM बनेंगे ‘थलापति’
तमिलनाडु में ‘थलापति’ युग की शुरुआत: कल सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे विजय, लेफ्ट और कांग्रेस के समर्थन से बनी सरकार
चेन्नई: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
दक्षिण भारतीय सिनेमा के मेगास्टार और ‘तमिलगा वेत्री कषगम’ (TVK) के प्रमुख विजय शनिवार (9 मई, 2026) को तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेकर एक नए राजनीतिक इतिहास की शुरुआत करेंगे।
राजभवन से मिली जानकारी के अनुसार, शपथ ग्रहण समारोह सुबह 11 बजे आयोजित किया जाएगा।
शुक्रवार को विजय ने राज्यपाल आर.वी. अर्लेकर से मुलाकात कर 121 विधायकों के समर्थन का दावा पेश किया, जिसके बाद राज्य में नई सरकार के गठन का रास्ता साफ हो गया है।
बहुमत का गणित: कैसे सत्ता के करीब पहुंचे विजय?
234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटों की आवश्यकता है। हालिया चुनाव नतीजों में विजय की पार्टी TVK 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी।
हालांकि, यह जादुई आंकड़े से 10 सीटें कम थी। बहुमत जुटाने के लिए TVK ने द्रमुक (DMK) के सहयोगी दलों से संपर्क साधा, जिसमें उन्हें बड़ी सफलता मिली है:
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कांग्रेस: 5 विधायकों वाली कांग्रेस ने सबसे पहले TVK को अपना समर्थन दिया।
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वामपंथी दल (CPI & CPIM): भाकपा और माकपा (2-2 विधायक) ने भी लंबी चर्चा के बाद विजय को समर्थन देने का ऐलान किया है।
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सीटों का समीकरण: चुनाव नियमों के अनुसार, विजय ने दो सीटों (चेन्नई की पेरम्बूर और तिरुचिरापल्ली पूर्व) से जीत दर्ज की थी, जिनमें से उन्हें एक सीट छोड़नी होगी।
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एक सीट छोड़ने के बाद TVK (107) + कांग्रेस (5) + वामपंथी दल (4) को मिलाकर कुल समर्थन 116 पहुंच गया है।
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निर्णायक मोड़: अब सबकी निगाहें वीसीके (VCK) के 2 विधायकों पर टिकी हैं, जो शनिवार को अपना रुख साफ करेंगे।
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प्रबल संभावना है कि वे भी वामपंथी दलों की तरह TVK को समर्थन देंगे, जिससे विजय बहुमत का 118 का आंकड़ा छू लेंगे।
लेफ्ट का ‘बाहर’ से समर्थन: BJP को रोकने की कवायद
द्रमुक गठबंधन का हिस्सा रहे वामपंथी दलों (माकपा और भाकपा) का विजय को समर्थन देना राज्य की राजनीति में बड़ा उलटफेर माना जा रहा है।
दोनों दलों ने स्पष्ट किया है कि उनका यह निर्णय भारतीय जनता पार्टी (BJP) को राज्य में “पिछले दरवाजे से प्रवेश” करने से रोकने के लिए लिया गया है।
हालांकि, वामदलों ने यह भी साफ कर दिया है कि वे विजय के मंत्रिमंडल (कैबिनेट) का हिस्सा नहीं बनेंगे और केवल बाहर से समर्थन देंगे। राज्य के अधिकारों के मुद्दों पर वे अभी भी द्रमुक के साथ खड़े रहेंगे।
पेरम्बूर या तिरुचिरापल्ली? कौन सी सीट छोड़ेंगे विजय?
निर्वाचन आयोग के नियमों के मुताबिक, विजय को अपनी दोनों जीती हुई सीटों में से एक का चुनाव करना होगा।
चेन्नई की ‘पेरम्बूर’ और ‘तिरुचिरापल्ली पूर्व’—इन दोनों में से वे किसे अपने पास रखते हैं, यह देखना दिलचस्प होगा।
उनके इस फैसले के बाद ही विधानसभा में सीटों का आधिकारिक गणित पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगा।
तमिलनाडु की जनता अपने चहेते ‘थलापति’ को अब ‘मुधलवन’ (मुख्यमंत्री) के रूप में देखने के लिए उत्साहित है।
शनिवार का दिन न केवल विजय के प्रशंसकों के लिए, बल्कि पूरी द्रविड़ राजनीति के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित होने वाला है।











