तिनका तिनका बिखरता झाड़ू; राघव चड्ढा समेत 7 सांसदों ने थामा BJP का दामन
AAP में अब तक की सबसे बड़ी बगावत: राघव चड्ढा समेत 7 राज्यसभा सांसदों ने थामा BJP का दामन, जानें ‘झाड़ू’ के बिखरने की पूरी इनसाइड स्टोरी
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
देश की राजनीति में बदलाव और ‘भ्रष्टाचार मुक्त भारत’ का नारा देकर उभरी आम आदमी पार्टी (AAP) आज अपने सबसे बड़े राजनीतिक और अस्तित्व के संकट से गुजर रही है।
अन्ना हजारे के ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ (IAC) आंदोलन की कोख से जन्मी पार्टी का कुनबा बुरी तरह बिखर गया है।
आम आदमी पार्टी के प्रमुख और युवा चेहरे राघव चड्ढा ने पार्टी से इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने का औपचारिक ऐलान कर दिया है।
सबसे बड़ा झटका यह है कि इस टूट में वह अकेले नहीं हैं; उनके साथ 6 अन्य राज्यसभा सांसदों ने भी ‘झाड़ू’ का साथ छोड़कर ‘कमल’ थाम लिया है।
7 सांसदों की बगावत और दल-बदल कानून से बचाव
इस राजनीतिक भूकंप ने दिल्ली से लेकर पंजाब तक की सियासत में हलचल मचा दी है।
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ये सांसद हुए बागी: राघव चड्ढा के नेतृत्व में संदीप पाठक, अशोक मित्तल, स्वाति मालीवाल, हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता और विक्रम साहनी ने AAP से नाता तोड़ लिया है।
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बच गया दल-बदल कानून: राघव चड्ढा ने स्पष्ट किया कि राज्यसभा में AAP के 10 में से 7 सांसद (दो-तिहाई से अधिक बहुमत) उनके साथ हैं।
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संवैधानिक प्रावधानों का उपयोग करते हुए इस गुट ने BJP में विलय करने के लिए राज्यसभा सभापति को आधिकारिक दस्तावेज सौंप दिए हैं, जिससे उन पर दल-बदल (Anti-Defection Law) कानून लागू नहीं होगा।
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संजय सिंह की मांग: इस अभूतपूर्व टूट के बाद AAP के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने तत्काल राज्यसभा सभापति को पत्र लिखकर राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक सहित बागी सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग की है।
राघव चड्ढा का प्रहार: ‘गलत पार्टी में सही आदमी’
BJP में शामिल होने के बाद राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि AAP अपने 15 साल पुराने मूल सिद्धांतों और नैतिकता से पूरी तरह भटक गई है।
खुद को ‘गलत पार्टी में सही आदमी’ (Right man in the wrong party) करार देते हुए चड्ढा ने कहा कि पार्टी में अब आंतरिक लोकतंत्र समाप्त हो चुका है और आवाज को दबाया जा रहा है।
क्यों बिखर रहा है ‘झाड़ू’ का हर तिनका? (इनसाइड स्टोरी)
राघव चड्ढा जैसे युवा और कभी अरविंद केजरीवाल के सबसे करीबी माने जाने वाले चेहरों का इस तरह छिटकना कोई रातों-रात हुई घटना नहीं है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस बिखराव के पीछे 5 गहरे सांगठनिक और रणनीतिक कारण हैं:
1. आदर्शों और सत्ता की राजनीति में टकराव: अन्ना आंदोलन के समय लोग एक निस्वार्थ उद्देश्य (जन लोकपाल) के लिए जुड़े थे। लेकिन जब आंदोलन एक राजनीतिक पार्टी में तब्दील हुआ, तो चुनाव जीतने की मजबूरियों और राजनीतिक समझौतों ने मूल आदर्शों की जगह ले ली।
2. नेतृत्व का केन्द्रीकरण (सुप्रीमो कल्चर): पार्टी पर शुरुआत से ही ‘वन मैन शो’ या अरविंद केजरीवाल के इर्द-गिर्द सिमटने के आरोप लगते रहे हैं।
पहले प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव और कुमार विश्वास जैसे संस्थापक नेता अलग हुए। अब राघव चड्ढा (जिन्हें हाल ही में राज्यसभा में उपनेता पद से हटाया गया था) का छिटकना यह दर्शाता है कि पार्टी के भीतर असहमति या दूसरी पंक्ति के नेताओं के लिए स्पेस खत्म हो गया है।
3. कानूनी संकट और असुरक्षा की भावना: दिल्ली शराब नीति मामले और भ्रष्टाचार के अन्य आरोपों ने पार्टी की ‘कट्टर ईमानदार’ छवि को गहरी चोट पहुंचाई है।
शीर्ष नेतृत्व के जेल जाने से पार्टी में ‘लीडरशिप वैक्यूम’ पैदा हुआ। ऐसे संकट के समय में कई नेताओं के भीतर अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर भारी असुरक्षा पनपी।
4. व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाएं और गुटबाजी: जब युवा और महत्वाकांक्षी नेताओं को लगा कि उन्हें दरकिनार किया जा रहा है, तो उनका असंतोष बगावत में बदल गया।
संकट के समय जब एकजुटता की सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब आपसी अविश्वास ने ‘झाड़ू’ के तिनकों को अलग कर दिया।
5. भाजपा की आक्रामक विस्तारवादी रणनीति: भारतीय जनता पार्टी (BJP) की रणनीति विपक्षी दलों के मजबूत चेहरों को अपने पाले में लाने की रही है।
जब आम आदमी पार्टी अपने सबसे कमजोर दौर से गुजर रही थी, तब भाजपा ने इस महा-टूट को अंजाम देने में सफलता हासिल की।
आगे की राह: केजरीवाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती
जो ‘झाड़ू’ कभी एक समान विचारधारा के धागे से बंधी थी, वह अब सत्ता की राजनीति, नेताओं के अहम के टकराव और कानूनी संकटों के कारण बिखर चुकी है।
राज्यसभा में अपने दो-तिहाई सांसदों को खोने के बाद, अरविंद केजरीवाल के सामने अब अपनी राजनीतिक जमीन (खासकर दिल्ली और पंजाब में) और बचे हुए विधायकों को एकजुट रखने की सबसे ऐतिहासिक चुनौती खड़ी हो गई है।











