पाकिस्तान पेट्रोल प्राइस

पाकिस्तान में पेट्रोल 458, डीजल 520 रुपये के पार, महंगाई का टूटा रिकॉर्ड

पाकिस्तान में महंगाई का ‘बम’: पेट्रोल 458 और डीजल 520 रुपये के पार, अमेरिका-ईरान युद्ध का दिखा भयानक असर 

इस्लामाबाद/नई दिल्ली : द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान की जनता पर महंगाई का सबसे बड़ा बम फूटा है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध और ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी के कारण पाकिस्तान सरकार ने ईंधन के दामों में ऐतिहासिक वृद्धि की है। नई दरें गुरुवार आधी रात से लागू हो गई हैं, जिससे देश में त्राहिमाम मच गया है।

पेट्रोल में 43% और डीजल में 55% का भारी इजाफा पाकिस्तानी रुपये (PKR) में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 137.23 रुपये बढ़कर 458.41 रुपये पर पहुंच गई है (43% की वृद्धि)।

वहीं, हाई-स्पीड डीजल (HSD) की कीमत 184.49 रुपये बढ़कर 520.35 रुपये प्रति लीटर हो गई है (55% का उछाल)। केरोसिन के दाम भी 34.08 रुपये बढ़ाकर 457.80 रुपये प्रति लीटर कर दिए गए हैं।

(तुलनात्मक रूप से: भारत के 1 रुपये की वैल्यू पाकिस्तान में करीब 3 रुपये के बराबर है। दिल्ली में फिलहाल पेट्रोल 94 और डीजल 87 भारतीय रुपये प्रति लीटर है।)

टैक्स का गणित: पेट्रोल पर बढ़ा, डीजल पर शून्य

कीमतों में संतुलन बनाने और राजस्व जुटाने के लिए सरकार ने पेट्रोल पर टैक्स 105 रुपये से बढ़ाकर 160 रुपये प्रति लीटर कर दिया है।

वहीं, डीजल की कीमतों में इससे भी ज्यादा उछाल न आए, इसलिए उस पर टैक्स को 55 रुपये से घटाकर शून्य कर दिया गया है।

खपत रोकने और वित्तीय अनुशासन के लिए उठाया कदम

पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने इसे एक “मुश्किल लेकिन जरूरी फैसला” बताया है।

वहीं, प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार खुर्रम शहजाद ने बताया कि पिछले महीने पेट्रोल और डीजल की खपत में क्रमशः 8% और 13% की बढ़ोतरी हुई थी।

इस खपत को नियंत्रित करने और IMF की शर्तों को पूरा करने के लिए यह कदम उठाना पड़ा।

पाकिस्तान में कीमतें बढ़ने की 5 मुख्य वजहें:

  1. होर्मुज रूट और युद्ध: अमेरिका-ईरान जंग से होर्मुज रूट प्रभावित हुआ है, जिससे ब्रेंट क्रूड ऑयल 109.03 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया है।

  2. IMF की सख्त शर्तें: बेलआउट पैकेज के लिए IMF ने ईंधन पर सब्सिडी खत्म करने और टैक्स वसूलने की शर्त रखी है।

  3. पाकिस्तानी रुपये की गिरावट: डॉलर के मुकाबले पाकिस्तानी रुपया (PKR) लगातार कमजोर हो रहा है, जिससे आयात महंगा हो गया है।

  4. विदेशी मुद्रा भंडार की कमी: डॉलर की कमी के कारण तेल आयात करने वाले जहाजों (L/Cs) के क्लीयरेंस में देरी हो रही है।

  5. पेट्रोलियम टैक्स (लेवी): सरकार अपना राजस्व बढ़ाने के लिए पेट्रोलियम लेवी को अधिकतम सीमा तक बढ़ा रही है।

आम जनता पर क्या होगा असर?

डीजल महंगा होने से माल ढुलाई की लागत आसमान छू लेगी, जिससे फल, सब्जियां और रोजमर्रा का राशन आम आदमी की पहुंच से बाहर हो जाएगा।

वहीं, कृषि क्षेत्र में ट्रैक्टर और ट्यूबवेल चलाने की लागत बढ़ने से खेती भी महंगी होगी। जानकारों का मानना है कि यदि युद्ध लंबा खिंचा, तो पाकिस्तान में ईंधन 600 रुपये का आंकड़ा भी पार कर सकता है।

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