चीन को कड़ा संदेश: असम के हाईवे पर उतरे PM मोदी, ब्रह्मपुत्र के नीचे बनेगी रेल-रोड सुरंग; पूर्वोत्तर अब भारत का ‘नया किला’
“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को असम के डिब्रूगढ़ में मोरान बाईपास पर बनी ‘आपातकालीन लैंडिंग सुविधा’ (ELF) पर उतरकर न केवल एक इंफ्रास्ट्रक्चर का उद्घाटन किया, बल्कि पड़ोसी मुल्क चीन को एक कड़ा सामरिक संदेश भी दिया है”
गुवाहाटी/डिब्रूगढ़ : THE POLITICS AGAIN : शिल्पा की रिपोर्ट
मोदी सरकार ने पूर्वोत्तर (Northeast) को अब केवल ‘विकास’ ही नहीं, बल्कि ‘सामरिक शक्ति’ का केंद्र बना दिया है।
चीन सीमा से महज 300 किमी की दूरी पर लड़ाकू विमानों के लिए रनवे और ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे सुरंग बनाने की योजना भारत की बदलती रक्षा नीति का प्रमाण है।
मोरान बाईपास: जब हाईवे बना रनवे
प्रधानमंत्री मोदी ने जिस 4.2 किमी लंबी हवाई पट्टी का जायजा लिया, वह सामान्य सड़क नहीं है।
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दोहरा उपयोग (Dual Use): शांति काल में यह आम जनता के लिए हाईवे है, लेकिन युद्ध या आपदा के समय यह वायुसेना का एयरबेस बन जाएगा।
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क्षमता: विशेष कंक्रीट से बनी यह पट्टी लड़ाकू विमानों (Fighter Jets), भारी परिवहन विमानों और हेलीकॉप्टरों का वजन सह सकती है।
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संदेश: मुख्य एयरबेस पर हमला होने की स्थिति में वायुसेना के पास अब ‘वैकल्पिक रनवे’ का जाल तैयार है, जिसे दुश्मन आसानी से निष्क्रिय नहीं कर सकता।
ब्रह्मपुत्र के नीचे सुरंग: इंजीनियरिंग का चमत्कार
दूसरा बड़ा गेम-चेंजर है गोहपुर से नुमालीगढ़ तक प्रस्तावित 33.7 किमी लंबा कॉरिडोर।
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ट्विन ट्यूब टनल: इसमें ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे 15.79 किमी लंबी सुरंग बनेगी, जिसमें सड़क और रेल दोनों होंगी।
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लागत: ₹18,662 करोड़।
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फायदा: अभी जो सफर 240 किमी और 6 घंटे का है, वह घटकर मिनटों में रह जाएगा।
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सामरिक महत्व: चीन अक्सर ब्रह्मपुत्र पर बांध बनाता है, ऐसे में भारत ने नदी के नीचे से रास्ता बनाकर अपनी ‘लॉजिस्टिक्स लाइन’ को अभेद्य बना दिया है।
पूर्वोत्तर: सुरक्षा और समृद्धि का संगम
विश्लेषकों का मानना है कि मोदी सरकार ने पूर्वोत्तर को देखने का नजरिया बदल दिया है।
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आर्थिक: यह टनल और हाईवे असम, अरुणाचल और नागालैंड में व्यापार, पर्यटन और रोजगार (लाखों मानव दिवस) को बूस्ट करेंगे।
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सैन्य: सीमा पर त्वरित रसद (Logistics) और सैनिकों की तैनाती अब पहले से कहीं ज्यादा तेज होगी।











