यूपी में डॉ. बीआर आंबेडकर मूर्ति स्थल विकास योजना का शंखनाद; 4,030 प्रतिमाओं के संरक्षण और सौंदर्यीकरण के लिए योगी सरकार ने जिलाधिकारियों को आवंटित किए 403 करोड़ रुपये।
यूपी की सभी 403 विधानसभाओं में होगा आंबेडकर प्रतिमा स्थलों का विकास: योगी सरकार ने जारी किए 403 करोड़ रुपये, दिसंबर तक पूरा होगा काम”
लखनऊ: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश में सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय विभूतियों के सम्मान को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से योगी सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है।
प्रदेश सरकार ने ‘डॉ. बीआर आंबेडकर मूर्ति स्थल विकास योजना’ के तहत राज्य के सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों में स्थापित बाबा साहब आंबेडकर और अन्य महान विभूतियों की प्रतिमा स्थलों के विकास एवं सौंदर्यीकरण का निर्णय लिया है।
प्रथम चरण में कुल 4,030 प्रतिमा स्थलों (प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में 10-10) का कायाकल्प किया जाएगा। इसके लिए शासन ने 403 करोड़ रुपये की धनराशि जिलाधिकारियों (DM) को आवंटित कर दी है।
शासन के दस्तावेजों के अनुसार, प्रदेश भर में स्थापित कई प्रतिमाएं बाउंड्री वॉल और छतरी (छत) जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में मौसम की मार, अतिक्रमण और उपेक्षा का शिकार हो रही थीं।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य इन स्थलों को सुरक्षित, संरक्षित और सम्मानजनक स्वरूप प्रदान करना है।
22 सितंबर 2026 को निदेशालय स्तर से जिलाधिकारियों को 403 करोड़ रुपये आवंटित किए गए। औसतन प्रत्येक प्रतिमा स्थल के विकास के लिए 10 लाख रुपये उपलब्ध होंगे।
हालांकि, आवश्यकतानुसार एक स्थल के विकास की अधिकतम लागत 40 लाख रुपये तक हो सकती है।
सुरक्षा और सौंदर्यीकरण: प्रतिमा स्थलों पर रैलिंग युक्त स्टील की सीढ़ी, छत (कैनोपी), बाउंड्री वॉल, फिनिशिंग, हरियाली (Plantation) और समुचित प्रकाश व्यवस्था (Lighting) की जाएगी।
सूचना बोर्ड: महापुरुषों के नाम और उनके संक्षिप्त इतिहास को दर्शाने वाला 3×2.5 फीट का सूचना बोर्ड लगाया जाएगा।
नई प्रतिमा: यदि कोई पुरानी प्रतिमा क्षतिग्रस्त है, तो योजना के तहत उसकी जगह नई संगमरमर की प्रतिमा स्थापित करने का भी प्रावधान है।
योजना को तय समय में और पारदर्शी तरीके से लागू करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में एक राज्य स्तरीय स्टीयरिंग कमेटी का गठन किया गया है।
इसमें न्याय, संस्कृति, पर्यटन और समाज कल्याण समेत कई विभागों के मंत्री व अधिकारी शामिल हैं। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक अंतरविभागीय समन्वय समिति भी बनाई गई है।
शासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी परियोजनाओं को 31 दिसंबर 2026 तक हर हाल में पूरा कर लिया जाए।
इसके लिए ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत या नगर निकाय के माध्यम से कार्यदायी संस्थाएं काम करेंगी और निर्माण कार्य पूरा होने के बाद जनप्रतिनिधियों द्वारा इनका लोकार्पण किया जाएगा।
यह पहल न केवल ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का प्रयास है, बल्कि नई पीढ़ी में डॉ. आंबेडकर सहित महान विभूतियों के प्रति सम्मान और गौरव की भावना को मजबूत करने की एक व्यापक योजना है।
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