दिल्ली में ₹50,000 करोड़ का ‘वॉटर मिशन’: 16,000 किमी लंबी पाइपलाइन बदली जाएगी, 55% पानी की बर्बादी रुकेगी

“दिल्ली की जनता को दूषित पानी और किल्लत से निजात दिलाने के लिए वर्तमान सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट शुरू किया है”

विशेष ब्यूरो, नई दिल्ली | 11 जनवरी, 2026

‘The Politics Again’ की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के अनुसार, पूरी दिल्ली में 16,000 किलोमीटर लंबी पुरानी और जर्जर पाइपलाइनों को बदलने के लिए ₹50,000 करोड़ का मेगा प्लान तैयार किया गया है। अगले 10 वर्षों में दिल्ली की 95% पाइपलाइन बदल दी जाएगी।

क्यों जरूरी है पाइपलाइन बदलना?

जलमंत्री प्रवेश वर्मा ने बताया कि दिल्ली का जल ढांचा दशकों पुराना हो चुका है, जिसके कारण दिल्ली जल बोर्ड का 55% पानी बर्बाद (Non-Revenue Water) हो जाता है।

  • जर्जर स्थिति: कुल 16,000 किमी नेटवर्क में से 5,200 किमी पाइपलाइन 30 साल से ज्यादा पुरानी है।

  • 2,700 किमी पाइपलाइन 20-30 साल पुरानी है।

  • नतीजा: जगह-जगह पाइप फटना, सीवर का पानी मिक्स होना और कम दबाव जैसी समस्याएं आम हैं।

चंद्रावल और वजीराबाद प्रोजेक्ट: मिशन की शुरुआत

पिछली सरकारों में वर्षों से लटके प्रोजेक्ट्स को वर्तमान सरकार ने 11 महीनों के भीतर गति दी है।

  • चंद्रावल प्रोजेक्ट: ₹2,406 करोड़ की लागत से 9 विधानसभा क्षेत्रों में काम शुरू। इसके तहत 1,044 किमी नई पाइपलाइन और 21 अंडरग्राउंड रिज़र्वॉयर (UGR) बनाए जाएंगे।

  • वजीराबाद प्रोजेक्ट: ADB (एशियाई विकास बैंक) के सहयोग से ₹3,715 करोड़ का प्रोजेक्ट पुनर्जीवित किया गया है, जिससे 11 विधानसभा क्षेत्रों को लाभ होगा।

सरकार का 11 महीने का रिपोर्ट कार्ड

जल मंत्री के अनुसार, वर्तमान सरकार के कार्यकाल में अब तक ₹7,212 करोड़ के 94 बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी जा चुकी है। रेखा गुप्ता सरकार ने अपने वर्तमान कार्यकाल में 30% पाइपलाइन बदलने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।

अनधिकृत कॉलोनियों और गांवों के लिए सौगात

सरकार का ध्यान केवल पॉश इलाकों पर ही नहीं, बल्कि उन क्षेत्रों पर भी है जहां पानी की पाइपलाइन कभी पहुंची ही नहीं:

  • 262 नए ट्यूबवेल चालू किए गए।

  • 200 किमी नई पाइपलाइन बिछाई गई ताकि अनधिकृत कॉलोनियों में पहली बार नियमित जलापूर्ति हो सके।

  • नए UGR: पल्ला (37 MLD), बिजवासन (9 MLD) और सिरसपुर (12 MLD) में भंडारण क्षमता बढ़ाई गई।

पानी की उपलब्धता के लिए दूसरे राज्यों से वार्ता

दिल्ली में पानी बढ़ाने के लिए सरकार पड़ोसी राज्यों के साथ समन्वय कर रही है:

  • हिमाचल प्रदेश: 113 MGD अतिरिक्त पानी के लिए बातचीत।

  • हरियाणा व UP: 51 क्यूसेक जल के लिए चर्चा जारी।

  • तकनीकी सुधार: मुनक नहर की लाइनिंग और IIT रुड़की के माध्यम से कंड्यूट पाइपलाइन पर स्टडी कराई जा रही है।


The Politics Again विश्लेषण:

दिल्ली सरकार का यह कदम दूरदर्शी है। केवल पानी की उपलब्धता बढ़ाना समस्या का हल नहीं है, बल्कि उसके रिसाव (Leakage) को रोकना असली समाधान है। 55% बर्बादी को रोककर दिल्ली बिना किसी अतिरिक्त स्रोत के भी ‘वॉटर सरप्लस’ सिटी बन सकती है।

Santosh SETH

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