PM Modi and Russian President Putin solidify defense ties and discuss global peace ahead of the BRICS Summit.
ब्रिक्स 2026: मोदी-पुतिन वार्ता से दुनिया में हलचल, रूस ने दिया घातक रक्षा उपकरणों और तकनीक का महा-प्रस्ताव”
नई दिल्ली : संतोष सेठ, संपादक (THE POLITICS AGAIN)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से ठीक पहले हुई 45 मिनट की द्विपक्षीय वार्ता ने वैश्विक कूटनीति में खलबली मचा दी है।
दोनों नेताओं का एक ही कार में ‘भारत मंडपम’ पहुंचना उस अटूट भरोसे का प्रतीक है, जिसने दशकों पुराने भारत-रूस संबंधों को बदलती विश्व व्यवस्था में भी मजबूती से टिकाए रखा है।
इस मुलाकात में जहां एक तरफ रूस ने भारत को घातक रक्षा उपकरणों और उन्नत तकनीक का प्रस्ताव दिया है,
वहीं दूसरी तरफ पीएम मोदी ने पुतिन के सामने स्पष्ट रूप से यूक्रेन युद्ध समाप्त कर शांति की दिशा में आगे बढ़ने की बात रखी।
पश्चिमी देशों द्वारा रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों और अलगाव की नीति के बीच, भारत अपनी रक्षा, ऊर्जा और आर्थिक साझेदारी को मजबूती से आगे बढ़ा रहा है।
पीएम मोदी ने कूटनीतिक साहस का परिचय देते हुए राष्ट्रपति पुतिन से स्पष्ट कहा कि दुनिया को अब “अनंत युद्ध” से निकलकर शांति की ओर बढ़ना चाहिए।
यह भारत की स्वतंत्र और बहुध्रुवीय विदेश नीति की असली ताकत है, जहां वह एक रणनीतिक साझेदार होने के बावजूद असहमति व्यक्त करने और शांति की अपील करने की क्षमता रखता है।
रूस अब भारत को केवल हथियार बेचने तक सीमित नहीं है, बल्कि तकनीक हस्तांतरण और संयुक्त उत्पादन (Joint Production) का एक बड़ा पैकेज दे रहा है।
मास्को ने 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान Su-57 के भारत में संयुक्त उत्पादन और इंजन तकनीक साझा करने का बड़ा प्रस्ताव दिया है।
इसके अलावा, करीब 260 Su-30MKI विमानों को ‘सुपर सुखोई’ में बदलने की 11 अरब डॉलर की परियोजना पर भी चर्चा हुई है, जिसमें इन विमानों को 300 किमी मारक क्षमता वाली R-37M मिसाइलों और आधुनिक रडार से लैस किया जाएगा।
रूस ने पांच अतिरिक्त S-400 रेजीमेंट, Pantsir-S1M एयर डिफेंस सिस्टम और रणनीतिक पनडुब्बियों के प्रस्ताव भी भारत के सामने रखे हैं।
रक्षा से आगे बढ़कर, दोनों देश अब विमानन क्षेत्र में भी ‘बायर-सेलर’ मॉडल से बाहर निकलकर ‘जॉइंट मैन्युफैक्चरिंग’ की ओर बढ़ रहे हैं।
भारत में IL-114-300 और Sukhoi Superjet 100 के निर्माण पर बातचीत तेज हो गई है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और रूसी विमानन कंपनियों के बीच बढ़ती यह साझेदारी भारत के घरेलू विनिर्माण को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी।
मोदी-पुतिन की यह मुलाकात स्पष्ट संदेश देती है कि नई विश्व व्यवस्था में भारत किसी खेमे का पिछलग्गू नहीं, बल्कि रणनीतिक स्वायत्तता के साथ फैसले लेने वाली एक निर्णायक शक्ति है।
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