Earthmover clearing debris from a blocked mountain road in Himachal Pradesh following heavy monsoon rains and landslides

हिमाचल: मानसून से 67 सड़कें बंद, 114 मौतें और 1423 करोड़ का नुकसान

हिमाचल में मानसून का तांडव: 67 सड़कें बंद, मंडी सबसे ज्यादा प्रभावित; आपदा से अब तक 114 मौतें और 1423 करोड़ का नुकसान”

शिमला : संतोष सेठ की रिपोर्ट : THE POLITICS AGAIN

हिमाचल प्रदेश में मानसून की बारिश एक बार फिर कहर बरपा रही है। लगातार हो रही भारी बारिश के कारण राज्य के कई हिस्सों में सड़क संपर्क टूट गया है और जनजीवन अस्त-व्यस्त है।

राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र द्वारा 8 सितंबर 2026 को जारी ताजा रिपोर्ट के अनुसार, पूरे प्रदेश में कुल 67 सड़कें बंद हैं।

हालांकि, प्रशासन के लिए राहत की बात यह है कि फिलहाल किसी भी राष्ट्रीय राजमार्ग (National Highway) के बंद होने की सूचना नहीं है।

मंडी और कुल्लू में सबसे ज्यादा तबाही

जिलावार स्थिति पर नजर डालें तो मंडी जिला बारिश से सबसे ज्यादा प्रभावित है।

  • मंडी: यहां कुल 33 सड़कें बंद हैं (सराज उपमंडल में 27, सरकाघाट में 3, थलौट डिवीजन में 2 और सुंदरनगर में 1)।

  • कुल्लू: यहां 11 सड़कें बाधित हैं (कुल्लू उपमंडल में 4, आनी में 3, बंजार और निरमंड में 2-2)।

  • कांगड़ा और सिरमौर: कांगड़ा में 10 और सिरमौर में 6 (नाहन में 4, संगड़ाह में 2) सड़कें बंद हैं।

  • अन्य जिले: ऊना में 3, शिमला में 2, सोलन और लाहौल-स्पीति में 1-1 सड़क बंद है। बिलासपुर, चंबा, हमीरपुर और किन्नौर से फिलहाल कोई मार्ग बाधित होने की सूचना नहीं है।

बिजली और पेयजल सेवाओं पर असर

सड़कों के साथ-साथ बुनियादी सेवाओं पर भी बारिश की मार पड़ी है। प्रदेश में कुल दो डीटीआर (DTR) बाधित हैं और दो जलापूर्ति योजनाएं भी प्रभावित हुई हैं। ये सभी रुकावटें केवल शिमला जिले में दर्ज की गई हैं।

मानसून से अब तक 1423 करोड़ का नुकसान, 114 लोगों की गई जान

राज्य सरकार की मानसून क्षति रिपोर्ट के आंकड़े बेहद डराने वाले हैं। 30 जून 2026 से 7 सितंबर 2026 तक:

  • आपदा (भूस्खलन, बाढ़, डूबने, करंट लगने आदि) के कारण 114 लोगों की मौत हो चुकी है।

  • इसी अवधि में सड़क दुर्घटनाओं में 169 लोगों ने जान गंवाई है।

  • मानसून के दौरान सरकारी और निजी संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचा है, जिसका कुल अनुमानित आंकड़ा 1,423 करोड़ रुपये (1,42,308.82 लाख रुपये) को पार कर गया है।

प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती मंडी और कुल्लू जैसे दुर्गम इलाकों में बंद सड़कों को जल्द से जल्द खोलना और प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक आपूर्ति बहाल करना है, ताकि स्थानीय निवासियों को राहत मिल सके।