बुजुर्गों के कल्याण के लिए 142 नए वृद्धाश्रमों को मंजूरी, बंटे 23 लाख उपकरण
बुजुर्गों के सम्मान और स्वास्थ्य के लिए सरकार की बड़ी पहल: बांटे गए 23.93 लाख सहायक उपकरण, 142 नए वृद्धाश्रमों को मंजूरी”
नई दिल्ली:संतोष सेठ, संपादक (THE POLITICS AGAIN)
केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय देश के वरिष्ठ नागरिकों (बुजुर्गों) के कल्याण, संरक्षण, बेहतर स्वास्थ्य और सम्मानजनक जीवन को सुनिश्चित करने के लिए लगातार बड़े कदम उठा रहा है।
मंत्रालय का मुख्य फोकस संस्थागत देखभाल का विस्तार करने और गरीब व असहाय बुजुर्गों तक जरूरी सुविधाएं और सहायक उपकरण पहुंचाने पर है, ताकि वे बुढ़ापे में आत्मनिर्भर होकर जीवन जी सकें।
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के सचिव श्री सुधांश पंत ने मंत्रालय की इन अहम पहलों की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि अब तक देश के 2.88 लाख से अधिक वरिष्ठ नागरिकों को आश्रय (शेल्टर), पौष्टिक भोजन, बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाओं, फिजियोथेरेपी और मनोरंजन जैसी आवश्यक सुविधाओं का सीधा लाभ मिल चुका है, जिससे उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार आ रहा है।
बुजुर्गों के कल्याण के लिए प्रमुख कार्य और उपलब्धियां:
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142 नए वरिष्ठ नागरिक गृह: बेसहारा बुजुर्गों के लिए संस्थागत देखरेख और बुनियादी ढांचे को मजबूत करते हुए देश भर के विभिन्न हिस्सों में 142 नए वृद्धाश्रमों (वरिष्ठ नागरिक गृहों) के निर्माण को आधिकारिक मंजूरी दी गई है।
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23.93 लाख निःशुल्क उपकरण: गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) और कम आय वर्ग वाले पात्र बुजुर्गों के जीवन को सुगम बनाने के लिए 228 विशेष शिविर आयोजित किए गए।
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इनके जरिए 4.91 लाख से अधिक लाभार्थियों को लगभग 23.93 लाख निःशुल्क सहायक जीवन-उपकरण बांटे गए हैं। इनमें व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र (सुनने की मशीन), चलने की छड़ियां और चश्मे शामिल हैं।
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वरिष्ठ नागरिक कल्याण पोर्टल: सूचनाओं के आसान प्रसार के लिए भारत के माननीय राष्ट्रपति द्वारा एक विशेष ‘वरिष्ठ नागरिक कल्याण पोर्टल’ का शुभारंभ किया गया है।
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यह वेब पोर्टल बुजुर्गों के कल्याण से जुड़ी हर जानकारी और मदद के लिए एक साझा प्लेटफॉर्म (सिंगल सॉल्यूशन) के रूप में काम करेगा।
सचिव श्री पंत ने स्पष्ट किया कि सरकार के ये सभी उपाय सुलभ देखभाल और बेहतर कल्याणकारी बुनियादी ढांचे के माध्यम से वरिष्ठ नागरिकों के प्रति मंत्रालय की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करते हैं, जिससे हमारे बुजुर्ग एक स्वतंत्र और सम्मानजनक जीवन जी सकें।











