पश्चिम बंगाल वोटर लिस्ट SIR: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, ‘चुनाव की पवित्रता सर्वोपरि, तुरंत बढ़ाएं जज’ | The Politics Again
“पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है”
नई दिल्ली/कोलकाता (The Politics Again) : संतोष सेठ की रिपोर्ट
सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि चुनाव प्रक्रिया की पवित्रता बनाए रखना सबसे जरूरी है।
काम का बोझ बहुत बड़ा है और समय बेहद कम है, इसलिए न्यायिक अधिकारियों की संख्या को तत्काल बढ़ाना आवश्यक है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस अहम प्रक्रिया को निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को अतिरिक्त सिविल जजों को तैनात करने की अनुमति दे दी है।
क्या है जजों की कमी का पूरा गणित?
सुनवाई के दौरान कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की ओर से बताया गया कि अब तक 294 जिला और अतिरिक्त जिला जजों को एसआईआर (SIR) के अंतिम चरण में तैनात किया जा चुका है।
लेकिन यह संख्या इस विशाल कार्य के लिए पर्याप्त नहीं है। आंकड़ों के मुताबिक, यदि एक जज रोजाना 250 मामलों की सुनवाई करता है, तब भी दावों और आपत्तियों के निपटारे की पूरी प्रक्रिया में लगभग 80 दिन लग जाएंगे।
जबकि, चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार अंतिम मतदाता सूची 28 फरवरी को प्रकाशित होनी है। इस कारण समय की भारी कमी देखी जा रही है।
झारखंड और उड़ीसा हाईकोर्ट से भी ली जाएगी मदद
सुप्रीम कोर्ट ने इस समस्या का समाधान निकालते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट को निर्देश दिया है कि वे 3 साल से अधिक अनुभव वाले सिविल जजों (सीनियर या जूनियर डिवीजन) को इस काम में लगा सकते हैं।
कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि राज्य में उपलब्ध मानव संसाधन कम पड़ते हैं, तो पड़ोसी राज्यों—झारखंड और उड़ीसा हाईकोर्ट—से सेवारत या सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारियों की मदद मांगी जा सकती है।
इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने दोनों राज्यों के मुख्य न्यायाधीशों से अनुरोध किया है कि वे ऐसे किसी भी आग्रह पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करें।
सुप्रीम कोर्ट के कलकत्ता हाईकोर्ट को प्रमुख निर्देश:
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अनुभवी जजों की तैनाती: कम से कम 3 साल का अनुभव रखने वाले अतिरिक्त सिविल जजों (सीनियर और जूनियर डिवीजन) की तुरंत तैनाती की जाए।
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अतिरिक्त बल: पहले से काम कर रहे 294 जिला और अतिरिक्त जिला जजों के अलावा, आवश्यकतानुसार और न्यायिक अधिकारी लगाए जाएं।
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पड़ोसी राज्यों से सहयोग: जरूरत पड़ने पर झारखंड और उड़ीसा के सेवारत या रिटायर जजों की सेवाएं ली जाएं।
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निगरानी और सत्यापन: तैनात किए गए न्यायिक अधिकारी SIR प्रक्रिया में आने वाले दावों और आपत्तियों की बारीकी से निगरानी और सत्यापन करेंगे।
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समयबद्धता और निष्पक्षता: अदालत ने जोर देकर कहा है कि यह पूरी प्रक्रिया तय समय-सीमा के भीतर और पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से संपन्न होनी चाहिए।












