Reservation Issue Hindi
“उत्तर प्रदेश के जौनपुर में मंगलवार को राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया। कलेक्ट्रेट परिसर में सवर्ण आर्मी (Savarn Army) के हजारों कार्यकर्ताओं ने यूजीसी (UGC) के नए नियमों और आरक्षण नीति के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया”
जौनपुर “THE POLITICS AGAIN” सुनील कुमार की रिपोर्ट
प्रदर्शनकारियों ने जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चंद्र को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा और सरकार को चेतावनी दी कि अगर यह “काला कानून” वापस नहीं लिया गया, तो इसका खामियाजा 2027 के विधानसभा चुनावों में भुगतना पड़ेगा।
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे प्रवीण तिवारी ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आरक्षण और जाति के आधार पर समाज को बांट रही है।
उन्होंने कहा, “यूजीसी में भी इसी तरह का नियम (आरक्षण/जातिगत) लागू किया गया है, जिसे स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसे तत्काल वापस लिया जाना चाहिए।”
सवर्ण आर्मी ने हाल ही में चर्चा में आए बरेली के एसडीएम अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे को साहसिक कदम बताया।
प्रवीण तिवारी ने कहा, “अग्निहोत्री ने वह काम किया है जो देश के सांसदों-विधायकों को करना चाहिए था। उन्होंने अपने समाज के नौजवानों के साथ खड़े होकर एक नजीर पेश की है।”
वहीं, प्रयागराज और शंकराचार्य विवाद पर उन्होंने कहा, “जो सरकार आज शंकराचार्य से उनकी योग्यता का प्रमाण मांग रही है, वही पीएम मोदी उनके पैर छूने क्यों गए थे? तमाम सांसद-विधायक उनसे पूजा क्यों करवाते हैं? यह संतों का अपमान है।”
इस आंदोलन को अब बड़े क्षत्रिय और सवर्ण नेताओं का साथ मिल रहा है। प्रवीण तिवारी ने दावा किया कि प्रतापगढ़ के सांसद रघुराज प्रताप सिंह ‘राजा भैया’, पूर्व सांसद धनंजय सिंह, बृजभूषण शरण सिंह, अनिल त्रिपाठी, शैलेंद्र त्रिपाठी और शिव चंद्र विधायक ने उनका साथ दिया है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “बाकी विधायक-सांसद इसलिए चुप हैं क्योंकि उनके बच्चे विदेश में पढ़ते हैं, उन्हें यूजीसी बिल से फर्क नहीं पड़ता। उन्हें सिर्फ अपने टिकट की चिंता है, जिसका जवाब हम 2027 के चुनाव में देंगे।”
संगठन ने अल्टीमेटम दिया है कि यह प्रदर्शन अभी जिला स्तर पर है, जल्द ही इसे प्रदेश स्तर पर और फिर दिल्ली के जंतर-मंतर पर ले जाया जाएगा। सिपाही भर्ती की तरह ही इस मुद्दे पर भी सवर्ण समाज आर-पार की लड़ाई के मूड में है।
आम पाठक अक्सर ‘यूजीसी बिल’ या ‘नियम’ की तकनीकी बातें नहीं समझ पाते। सरल भाषा में यह पूरा विवाद “आरक्षित सीटों के खाली रहने” और “डी-रिजर्वेशन” (De-reservation) से जुड़ा है।
पहले क्या होता था? यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर या स्टाफ की भर्ती में अगर SC/ST/OBC कोटे की सीट के लिए कोई “योग्य उम्मीदवार” (Suitable Candidate) नहीं मिलता था, तो उस सीट को खाली छोड़ दिया जाता था।
सवर्ण आर्मी की मांग: प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अगर आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार नहीं मिलता, तो उस सीट को “अनारक्षित” (General) कर देना चाहिए, ताकि वह सीट बेकार न जाए और किसी योग्य सामान्य वर्ग के छात्र/शिक्षक को मौका मिले।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार और UGC ने अब ऐसे नियम कड़े कर दिए हैं कि सीटें भले ही सालों तक खाली रहें, लेकिन उन्हें ‘जनरल’ नहीं किया जाएगा। सवर्ण आर्मी इसे “योग्यता की हत्या” और “जातिगत तुष्टिकरण” मान रही है।
विरोध का मुख्य बिंदु यह है कि शैक्षणिक संस्थानों (UGC) में ‘मेरिट’ (योग्यता) प्राथमिक होनी चाहिए, न कि ‘जाति’। नए नियमों में रोस्टर सिस्टम (Roster System) को इस तरह लागू किया गया है जिससे सामान्य वर्ग के लिए मौके कम होते जा रहे हैं।
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