Coal industries ban NCR Supreme Court

“दिल्ली-एनसीआर के दमघोंटू प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: केंद्र और राज्यों से मांगा जवाब—300 किमी के दायरे में नए कोयला प्लांट पर रोक की तैयारी”

“राजधानी दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में हवा की खराब होती गुणवत्ता पर सुप्रीम कोर्ट ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार और संबंधित राज्यों को कड़े निर्देश जारी किए हैं”

नई दिल्ली : The Politics Again : शिल्पा की रिपोर्ट 

सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रदूषण के मुख्य स्रोतों—कोयला आधारित उद्योगों, निर्माण कार्यों की धूल और वाहनों के धुएं—पर अब आर-पार की कार्रवाई की जरूरत है।

कोयले पर ‘300 किमी’ का पहरा

अदालत ने एक महत्वपूर्ण सुझाव पर केंद्र से जवाब मांगा है, जिसमें दिल्ली के 300 किलोमीटर के दायरे में कोई भी नया कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांट स्थापित न करने की बात कही गई है।

साथ ही, एनसीआर के भीतर संचालित कोयला आधारित उद्योगों को चरणबद्ध तरीके से बंद करने या उन्हें वैकल्पिक स्वच्छ ईंधन पर स्थानांतरित करने के लिए एक ‘संयुक्त प्रस्ताव’ (Joint Proposal) जमा करने का आदेश दिया गया है।

राज्यों को सार्वजनिक नोटिस जारी करने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान सरकार को सार्वजनिक नोटिस जारी कर सभी हितधारकों (Stakeholders) से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित करने को कहा है।

इन नोटिसों के आधार पर राज्यों को एक ‘एक्शन टेकन प्लान’ (Action Taken Plan) कोर्ट में पेश करना होगा।

निर्माण धूल और वाहनों पर 12 मार्च को ‘महामंथन’

निर्माण और तोड़-फोड़ (C&D) से उड़ने वाली धूल से निपटने के लिए बेंच ने सीएक्यूएम (CAQM) के सुझावों पर सभी पक्षों से जवाब मांगा है।

इसके अलावा, पीठ ने कहा कि वह 12 मार्च को विशेष रूप से वाहनों से होने वाले प्रदूषण के मुद्दे की गहन जांच करेगी।

दिल्ली सरकार को निर्देश दिया गया है कि वह सीएक्यूएम के लॉन्ग-टर्म सॉल्यूशन को लागू करने के लिए एक विस्तृत एक्शन प्लान पेश करे।

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