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असम में सियासी भूचाल: CM हिमंत का गौरव गोगोई पर ‘पाकिस्तानी लिंक’ का सनसनीखेज आरोप, MHA जांच की सिफारिश

“असम की राजनीति में उस वक्त हड़कंप मच गया जब मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस सांसद और लोकसभा में उप-नेता गौरव गोगोई पर राष्ट्र की सुरक्षा से जुड़े गंभीर आरोप लगाए”

गुवाहाटी | संतोष सेठ की रिपोर्ट : The Politics Again ब्यूरो

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीएम सरमा ने दावा किया कि गौरव गोगोई और उनकी पत्नी एलिजाबेथ के तार एक ‘पाकिस्तानी एजेंट’ से जुड़े हैं।

राज्य कैबिनेट ने विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट के आधार पर इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) को सौंपने की सिफारिश कर दी है।

क्या है ‘पाकिस्तानी लिंक’ का आरोप?

मुख्यमंत्री सरमा ने सीधे तौर पर गौरव गोगोई की ब्रिटिश मूल की पत्नी एलिजाबेथ को लेकर सवाल उठाए।

उन्होंने आरोप लगाया कि एलिजाबेथ, अली तौकीर शेख नामक व्यक्ति के संपर्क में थीं, जिसे सरमा ने पाकिस्तानी एजेंट बताया है।

सीएम ने दावा किया, “अली तौकीर शेख ने यूपीए शासनकाल (2010-2013) के दौरान 13 बार भारत का दौरा किया, लेकिन मोदी सरकार आने के बाद ये दौरे बंद हो गए। हमारा मानना है कि गौरव, उनकी पत्नी और शेख के बीच गहरे संबंध हैं।”

9 बार पाकिस्तान यात्रा और ‘गुप्त रिपोर्ट’

आरोपों की गंभीरता को बढ़ाते हुए सरमा ने कहा कि एलिजाबेथ ने दो भारतीय संगठनों में काम करते हुए 9 बार पाकिस्तान की यात्रा की।

इन यात्राओं को छिपाने के लिए उन्होंने पंजाब के अटारी बॉर्डर का इस्तेमाल किया। सबसे चौंकाने वाला दावा एक ‘अगस्त 2014’ की रिपोर्ट को लेकर किया गया।

सरमा ने कहा, “एलिजाबेथ ने एक रिपोर्ट भेजी थी जिसमें कहा गया था कि पीएम मोदी के सत्ता में आने के बाद ‘क्लाइमेट एक्शन’ समूहों को मनमानी की छूट नहीं मिलेगी, इसलिए भारत सरकार को बाईपास (दरकिनार) करने की रणनीति अपनानी होगी। उन्हें कथित तौर पर आईबी (IB) के स्रोतों से भी जानकारियां मिली थीं।”

गिरफ्तारी अभी नहीं, लेकिन जांच जरूरी

हालांकि, मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि विधानसभा चुनाव के मद्देनजर वे अभी गौरव गोगोई को गिरफ्तार करने जैसा कोई ‘कठोर कदम’ नहीं उठाएंगे, ताकि इसे राजनीतिक प्रतिशोध न कहा जाए।

लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है, इसलिए एनआईए (NIA) या सीबीआई (CBI) जैसी केंद्रीय एजेंसी से जांच अनिवार्य है।

SIT की रिपोर्ट

असम सरकार ने इससे पहले मामले की जांच के लिए एक एसआईटी गठित की थी, जिसने 10 सितंबर को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। इसी रिपोर्ट के आधार पर अब गेंद केंद्र सरकार के पाले में डाल दी गई है।

Santosh SETH

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