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भारतीय कूटनीति का ‘नया तेवर’ : न दबाव, न समझौता

“विदेश मंत्रालय (MEA) की हालिया साप्ताहिक ब्रीफिंग केवल सूचनाओं का आदान-प्रदान नहीं, बल्कि भारत की बदलती और सख्त होती कूटनीतिक मुद्रा का घोषणापत्र साबित हुई है”

नई दिल्ली | शनिवार, 10 जनवरी 2026, संतोष सेठ की रिपोर्ट 

प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने अमेरिका, चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे मोर्चों पर भारत का रुख स्पष्ट करते हुए संदेश दिया कि 140 करोड़ भारतीयों के हित और देश की संप्रभुता सर्वोपरि है।

ऊर्जा सुरक्षा: “जनता के हित पहले, दबाव बाद में”

अमेरिकी कांग्रेस में भारत पर 500 प्रतिशत शुल्क लगाने वाले प्रस्तावित विधेयक पर भारत ने कड़ा प्रहार किया है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि रूसी तेल की खरीद या ऊर्जा स्रोतों का चयन वैश्विक बाजार की स्थितियों पर आधारित है।

  • बयान: “ऊर्जा सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी देश के दबाव में आकर हम अपनी जनता के हितों से समझौता नहीं करेंगे।”

भारत-अमेरिका व्यापार: “दुष्प्रचार बनाम हकीकत”

व्यापार वार्ता पटरी से उतरने और प्रधानमंत्री मोदी व राष्ट्रपति ट्रंप के बीच संवाद की कमी के दावों को भारत ने आंकड़ों से ध्वस्त कर दिया।

  • तथ्य: वर्ष 2025 में पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच 8 बार फोन पर बातचीत हुई है।

  • रुख: वार्ता संतुलित और पारस्परिक लाभ के लिए जारी है। दोनों नेताओं के संबंध मैत्रीपूर्ण और कूटनीतिक मर्यादा के अनुरूप हैं।

चीन-पाकिस्तान गठजोड़ को चेतावनी: “संप्रभुता का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं”

शक्सगाम घाटी में चीन द्वारा ‘सीपेक’ (CPEC) के तहत बुनियादी ढांचे के निर्माण पर भारत ने सख्त आपत्ति जताई है।

  • अवैध समझौता: भारत ने 1963 के चीन-पाक सीमा समझौते को पूरी तरह अवैध और अमान्य करार दिया।

  • कड़ा संदेश: जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न हिस्सा हैं। चीन को जमीनी हकीकत बदलने की कोशिश नहीं करनी चाहिए; भारत अपने हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने को स्वतंत्र है।

पड़ोसी देशों और वैश्विक संस्थाओं पर स्टैंड

  • बांग्लादेश: अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों से इनकार करने की बांग्लादेश सरकार की प्रवृत्ति को भारत ने “खतरनाक” बताया। भारत का मानना है कि सच से मुंह मोड़ना अपराधियों का मनोबल बढ़ाता है।

  • सिंधु जल संधि: फिलहाल यह प्रक्रिया स्थगन (Abeyance) की स्थिति में है।

  • वैश्विक सहयोग: अमेरिका के कई बहुपक्षीय संस्थाओं से हटने पर भारत ने कहा कि समस्याओं का समाधान केवल ‘परामर्श और सहयोग’ से संभव है।

आगामी उच्च स्तरीय दौरा

जर्मन चांसलर ओलाफ शोल्ज 12 और 13 जनवरी को भारत आ रहे हैं। अहमदाबाद में होने वाली इस द्विपक्षीय वार्ता में कूटनीतिक और आर्थिक संबंधों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।


‘The Politics Again’ का विश्लेषण

विदेश मंत्रालय की यह ब्रीफिंग दर्शाती है कि भारत अब रक्षात्मक नहीं, बल्कि आक्रामक और स्पष्टवादी कूटनीति (Bold Diplomacy) अपना रहा है। चाहे वह 500% शुल्क की धमकी हो या संप्रभुता का मुद्दा, भारत अब “अस्पष्ट भाषा” के बजाय “सीधे संवाद” में विश्वास रखता है।

मोदी-ट्रंप संवाद के आंकड़े पेश करना उन घरेलू और विदेशी आलोचकों को करारा जवाब है जो भारत-अमेरिका संबंधों में दरार का दावा कर रहे थे।

Santosh SETH

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