भारत एलपीजी जहाज

पश्चिम एशिया तनाव : संकट के बीच नंदा देवी और शिवालिक LPG लेकर पहुंचे

मध्य पूर्व संकट के बीच भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत: ‘शिवालिक’ के बाद 47,000 टन LPG लेकर ‘नंदा देवी’ पहुंचा गुजरात ‘

नई दिल्ली : द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

पश्चिम एशिया और मध्य पूर्व में गहराते तनाव के बीच भारत ने एक बड़ी कूटनीतिक सफलता हासिल की है।

ईरान और इजराइल के बीच जारी संघर्ष के कारण दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्तों में से एक, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से भारत के दो विशाल एलपीजी (LPG) वाहक जहाज सुरक्षित स्वदेश लौट आए हैं।

सोमवार को ‘शिवालिक’ नामक जहाज के मुंद्रा बंदरगाह पहुंचने के बाद, अब ‘नंदा देवी’ टैंकर 47,000 मीट्रिक टन द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) लेकर गुजरात के वडीनार बंदरगाह पर पहुंच गया है।

एक दिन की पूरी जरूरत पूरी करेगा एक जहाज

अधिकारियों के मुताबिक, नंदा देवी में लाई गई गैस की मात्रा इतनी अधिक है कि यह अकेले ही भारत की कुल एलपीजी आयात आवश्यकता का लगभग एक दिन का हिस्सा पूरा कर सकता है।

इससे पहले, ‘शिवालिक’ 46,000 मीट्रिक टन से अधिक एलपीजी लेकर मुंद्रा बंदरगाह पहुंचा था। इसमें लगभग 32.4 लाख मानक 14.2 किलोग्राम के घरेलू गैस सिलेंडरों के बराबर एलपीजी थी।

मुंद्रा बंदरगाह के अधिकारियों ने बताया कि यह गैस इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) के लिए मंगाई गई थी, जिसमें से 20,000 मीट्रिक टन मुंद्रा और बाकी 26,000 मीट्रिक टन मंगलुरु में उतारी जाएगी।

पीएम मोदी की कूटनीति का असर

गुजरात के कृषि मंत्री एवं राज्य सरकार के प्रवक्ता जीतू वाघाणी ने विधानसभा में जानकारी देते हुए इस सफलता का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया।

उन्होंने कहा कि वैश्विक तनाव के बावजूद, प्रधानमंत्री मोदी के विश्व नेताओं के साथ मजबूत कूटनीतिक संबंधों के कारण ही यह जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर पाए।

आपको बता दें कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर काफी निर्भर है। देश अपनी जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल, 50 प्रतिशत प्राकृतिक गैस और 60 प्रतिशत एलपीजी विदेशों से आयात करता है। ऐसे में इन जहाजों का सुरक्षित लौटना देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद अहम है।

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