Mojtaba Khamenei - Iran new Supreme Leader

ईरान के नए सुप्रीम लीडर बने मोजतबा खामेनेई | The Politics Again

“ईरान में बड़ा बदलाव : अली खामेनेई की मौत के बाद बेटे मोजतबा खामेनेई के हाथों में देश की कमान “

नई दिल्ली : द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और भारी तनाव के बीच ईरान से एक बड़ी और ऐतिहासिक खबर सामने आई है।

तेहरान की ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ ने 56 वर्षीय मोजतबा खामेनेई को देश का नया सुप्रीम लीडर चुना है।

मोजतबा, ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के सबसे बड़े बेटे हैं। हाल ही में अमेरिका और इस्राइल द्वारा किए गए हमलों में अली खामेनेई की मौत के बाद से ही ईरान के नए नेतृत्व को लेकर अटकलें तेज थीं, जिन पर अब विराम लग गया है।

आईआरजीसी का दबाव और वंशानुगत शासन पर उठे सवाल मोजतबा खामेनेई का चुनाव कई मायनों में विवादित माना जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि यह नियुक्ति ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के भारी दबाव में की गई है।

मोजतबा कोई उच्च पदस्थ धार्मिक नेता (ग्रैंड अयातुल्ला) नहीं हैं, जो आमतौर पर ईरान में सुप्रीम लीडर के लिए एक जरूरी योग्यता मानी जाती है।

इसके अलावा, ईरान की इस्लामिक रिपब्लिक ने हमेशा वंशानुगत शासन (पिता से बेटे को सत्ता सौंपने) की आलोचना की है और खुद को एक निष्पक्ष व्यवस्था के रूप में पेश किया है।

ऐसे में मोजतबा का चयन शासन के अपने ही स्थापित सिद्धांतों पर सवाल खड़े करता है। दिलचस्प बात यह है कि पिछले साल अली खामेनेई ने अपने संभावित उत्तराधिकारियों की जो सूची बनाई थी, उसमें मोजतबा का नाम शामिल नहीं था।

शिया धार्मिक नेतृत्व में भी पिता से बेटे को सत्ता का यह हस्तांतरण सामान्य रूप से स्वीकार नहीं किया जाता है।

कौन हैं मोजतबा खामेनेई?

1969 में माशहद शहर में जन्मे मोजतबा खामेनेई ने कभी कोई सरकारी पद नहीं संभाला और न ही शासन में उनकी कोई औपचारिक भूमिका रही। इसके बावजूद, देश की राजनीति और सत्ता के गलियारों में उनका गहरा प्रभाव माना जाता है।

  • सैन्य पृष्ठभूमि: उन्होंने ईरान-इराक युद्ध के दौरान ईरानी सेना में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया था।

  • गहरे संबंध: उनका ईरान की शक्तिशाली रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) के साथ बेहद करीबी रिश्ता है, जिसने उन्हें इस शीर्ष पद तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभाई।

  • पारिवारिक त्रासदी: हालिया हमलों में उनके परिवार के कई सदस्यों (पत्नी, बेटी, पोता, बहू और दामाद) की मौत हो गई। मोजतबा परिवार के उन गिने-चुने सदस्यों में शामिल हैं जो इन हमलों में जीवित बचे।

अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना

मोजतबा का विवादों से भी पुराना नाता रहा है। साल 2019 में संयुक्त राज्य अमेरिका के ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने उन पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे।

अमेरिकी अधिकारियों का आरोप था कि मोजतबा ने बिना किसी नियुक्ति या चुनाव के अपने पिता के कार्यालय में सरकारी पद पर काम किया और पर्दे के पीछे से आधिकारिक रूप से पूर्व सुप्रीम लीडर का प्रतिनिधित्व करते हुए सत्ता का संचालन किया।

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