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मध्य पूर्व युद्ध : DGCA का एयरलाइंस को अलर्ट

ब्रेकिंग: मध्य पूर्व युद्ध का असर… DGCA का भारतीय एयरलाइंस को खाड़ी देशों के हवाई क्षेत्र से बचने का सख्त निर्देश… लंबे रूट के कारण एअर इंडिया को फ्लाइट ड्यूटी में मिली छूट… पढ़ें ‘The Politics Again’ की विस्तृत रिपोर्ट…


मध्य पूर्व युद्ध का असर: DGCA का एयरलाइंस को खाड़ी देशों के हवाई क्षेत्र से बचने का निर्देश, एअर इंडिया को नियमों में छूट

नई दिल्ली | श्रीमती शिल्पा की रिपोर्ट , The Politics Again

पश्चिम एशिया (Middle East) में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच गहराते महायुद्ध का सीधा असर अब भारतीय विमानन क्षेत्र पर पड़ने लगा है।

यात्रियों और उड़ानों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने देश की सभी एयरलाइंस को खाड़ी देशों के हवाई क्षेत्रों (Airspace) से बचने के सख्त निर्देश जारी किए हैं।

DGCA की एडवाइजरी और कंटीजेंसी प्लान

DGCA ने सभी भारतीय एयरलाइंस से कहा है कि वे मध्य पूर्व के ऊपर उड़ान भरने से बचें और सुरक्षा जोखिम का आकलन करने के बाद अपनी आकस्मिक योजनाएं (Contingency Plans) तैयार रखें।

ईरान और इराक के हवाई क्षेत्र पर मंडराते खतरे के कारण उड़ानों को अब लंबे और वैकल्पिक मार्गों (Alternative Routes) से होकर गुजरना पड़ रहा है।

एअर इंडिया को फ्लाइट ड्यूटी में अस्थायी राहत

लंबे उड़ान मार्गों के इस्तेमाल से यात्रा का समय काफी बढ़ गया है, जिसका सीधा असर फ्लाइट क्रू की ड्यूटी पर पड़ रहा है।

इसी समस्या को देखते हुए DGCA ने एअर इंडिया (Air India) को ‘फ्लाइट ड्यूटी मानकों’ (Flight Duty Norms) में अस्थायी छूट प्रदान की है। यह राहत तब तक लागू रहेगी जब तक कि खाड़ी क्षेत्र में हालात सामान्य नहीं हो जाते।

‘चुनौतीपूर्ण हैं हालात, हम लगातार संपर्क में हैं’ – उड्डयन मंत्री

केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने बुधवार को स्पष्ट किया कि सरकार हालात पर पैनी नजर बनाए हुए है।

उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया, भारत से यूरोप और अमेरिका जाने के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण हवाई मार्ग है।

नायडू ने स्थिति को ‘चुनौतीपूर्ण’ मानते हुए कहा, “कुछ हवाई अड्डे फिलहाल बंद हैं जिससे स्थिति जटिल बनी हुई है।

हम शुरुआत से ही एयरलाइंस के साथ संपर्क में हैं क्योंकि हमारी प्राथमिकता है कि उनकी सेवाएं सुचारु रूप से और सुरक्षित ढंग से चलती रहें।”

क्यों सुलग रहा है मध्य पूर्व?

गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में यह ताजा और विनाशकारी संघर्ष 28 फरवरी को ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के साथ शुरू हुआ था।

इसके बाद अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच सीधा टकराव शुरू हो गया। ईरान द्वारा खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले के बाद पूरा क्षेत्र युद्ध की चपेट में है।

इस युद्ध के चलते दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक रास्तों में से एक ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) बाधित हो गया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट (Energy Crisis) का खतरा भी पैदा हो गया है।

Santosh SETH

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