31 मार्च नक्सलवाद खत्म डेडलाइन

31 मार्च डेडलाइन: छत्तीसगढ़ में ₹3.95 करोड़ के इनामी नक्सलियों का सरेंडर | The Politics Again

“31 मार्च की डेडलाइन का खौफ : छत्तीसगढ़ में 3.95 करोड़ के इनामी माओवादियों का बड़ा सरेंडर, बस्तर से सुकमा तक मची होड़ “

रायपुर/बस्तर (The Politics Again): कृष्णा सोनी के साथ निकिता सोनी की रिपोर्ट 

देश से नक्सलवाद (Naxalism) को पूरी तरह जड़ से खत्म करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा तय की गई ’31 मार्च’ की डेडलाइन का असर अब जमीन पर साफ दिखने लगा है।

सुरक्षाबलों के बढ़ते दबाव और इस खौफ के चलते छत्तीसगढ़ में माओवादियों के बीच आत्मसमर्पण (Surrender) करने की होड़ मच गई है।

राज्य के नक्सल प्रभावित जिलों में हाल ही में 3.95 करोड़ रुपये के इनामी 106 से अधिक नक्सलियों ने सुरक्षाबलों के सामने हथियार डाल दिए हैं।

इनमें सबसे खूंखार माने जाने वाले डीवीसीएम (DVCM), पीपीसीएम (PPCM) और एसीएम (ACM) रैंक के टॉप कमांडर भी शामिल हैं।

बीजापुर और दंतेवाड़ा में सबसे बड़ा सरेंडर

आत्मसमर्पण करने वालों में अकेले बीजापुर और दंतेवाड़ा से ही 67 नक्सली शामिल हैं। नक्सलियों के इस बड़े सरेंडर को बस्तर पुलिस और सुरक्षाबलों की एक बहुत बड़ी रणनीतिक जीत माना जा रहा है।

आंकड़ों के अनुसार, अलग-अलग जिलों में सरेंडर करने वाले नक्सलियों का पूरा विवरण इस प्रकार है:

📊 जिलेवार सरेंडर और इनाम का विवरण (Data Summary)

जिला (District) सरेंडर करने वाले नक्सली कुल इनाम राशि मुख्य रैंक (Ranks)
बीजापुर 37 ₹1.06 करोड़ DVCM (2), PPCM (4), ACM (9), PM (22)
सुकमा 31 ₹85 लाख CYPCM (2), PPCM (6), ACM (5), PM (18)
दंतेवाड़ा 30 ₹69 लाख DVCM (1), PPCM (2), ACM (5), PM (22)
बस्तर 16 ₹99 लाख DVCM (1), PPCM (5), ACM (3), PM (7)
नारायणपुर 5 ₹22 लाख DVCM (1), CYPCM (1), PPCM (1), PM (2)
कांकेर 3 ₹14 लाख DVCM (1), ACM (1), PM (1)
कुल योग (लगभग 122) ₹3.95 करोड़ (विभिन्न खूंखार कैडर)

 

(नोट: पुलिस रिकॉर्ड और ग्राउंड डेटा के अनुसार सरेंडर करने वालों की कुल संख्या 106 से ऊपर पहुंच चुकी है।)

सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि 31 मार्च की डेडलाइन करीब आने के साथ ही नक्सलियों के सप्लाई नेटवर्क पूरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं।

जंगल के अंदर पुलिस के नए कैंप खुलने (ऑपरेशन विकास) से बड़े नक्सलियों को भी छिपने की जगह नहीं मिल रही है, जिसके चलते वे मुख्यधारा में लौटने को मजबूर हो रहे हैं।