ईरान का नया सुप्रीम लीडर

मोजतबा खामेनेई के सुप्रीम लीडर बनने से ईरान का इनकार, इस्राइल की धमकी

“क्या इस्राइल की धमकी से डरा ईरान? मोजतबा खामेनेई को ‘सुप्रीम लीडर’ बनाने की खबरों का किया खंडन, ट्रंप पर भी साधा निशाना “

नई दिल्ली : द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

मध्य पूर्व (पश्चिम एशिया) में तनाव और कूटनीतिक चालबाजियों का दौर चरम पर है। अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद उनके 56 वर्षीय बेटे मोजतबा खामेनेई को ईरान का नया सर्वोच्च नेता (Supreme Leader) चुने जाने की जो खबरें आ रही थीं, उन पर ईरान सरकार ने अचानक यू-टर्न ले लिया है।

ईरान ने इन मीडिया रिपोर्ट्स को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। यह खंडन ठीक उस वक्त आया है जब इस्राइल के रक्षा मंत्री ने खुलेआम धमकी दी थी कि ईरान जो भी नया नेता चुनेगा, उसे खत्म कर दिया जाएगा।

इस्राइल की सीधी धमकी और ईरान का खंडन

दरअसल, इस्राइल के रक्षा मंत्री इस्राइल काट्ज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर खुली चेतावनी देते हुए कहा था कि ईरान जिस भी व्यक्ति को अपना अगला ‘सुप्रीम लीडर’ चुनेगा, उसे सीधे ‘निशाने पर’ लिया जाएगा।

इस धमकी और इस्राइली मीडिया में मोजतबा के नाम की चर्चाओं के बीच, भारत स्थित ईरानी वाणिज्य दूतावास ने आधिकारिक तौर पर इन दावों को खारिज कर दिया है।

दूतावास ने ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए स्पष्ट किया: “ईरान की विशेषज्ञ सभा द्वारा नेतृत्व के लिए चुने गए संभावित उम्मीदवारों के बारे में मीडिया में प्रसारित हो रही खबरों का कोई आधिकारिक स्रोत नहीं है और इन्हें आधिकारिक तौर पर खारिज किया जाता है।”

हालांकि, इस्राइली मीडिया और कई वरिष्ठ अधिकारियों का दावा था कि आने वाले कुछ ही घंटों में मोजतबा खामेनेई को आधिकारिक उत्तराधिकारी घोषित किया जा सकता है।

ईरानी विदेश मंत्री का ट्रंप पर कड़ा प्रहार

नेतृत्व को लेकर मचे इस सस्पेंस के बीच ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर भी जोरदार हमला बोला है।

उन्होंने ट्रंप पर परमाणु वार्ताओं को बर्बाद करने और युद्ध भड़काने का आरोप लगाया। अराघची ने लिखा कि जब जटिल परमाणु कूटनीति को ‘रियल एस्टेट सौदे’ की तरह लिया जाता है और झूठ से हकीकत को छिपाया जाता है, तो बातचीत फेल होना तय है।

उन्होंने ट्रंप पर तंज कसते हुए कहा कि हठ में आकर बातचीत की मेज़ पर ही बमबारी कर दी गई, जो खुद उन अमेरिकियों के साथ विश्वासघात है जिन्होंने उन्हें चुना था।

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