ओडिशा के राजेश कुमार (नाम परिवर्तित), जिन्होंने एएसएचएआरए-आईआरसीए पुनर्वास केंद्र की मदद से अपनी 23 साल पुरानी शराब की लत से मुक्ति पाई।
एक नई शुरुआत: पुनर्वास और दृढ़ संकल्प से राजेश ने पाई 23 साल पुरानी शराब की लत से मुक्ति, फिर से संवारा अपना जीवन”
ढेंकनाल (ओडिशा): द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
मादक पदार्थों और शराब की लत से जूझ रहे लोगों के लिए समय पर परामर्श और संस्थागत समर्थन एक वरदान साबित हो सकता है।
यह बात ओडिशा के ढेंकनाल जिले के निवासी 47 वर्षीय राजेश कुमार (बदला हुआ नाम) की सच्ची कहानी से साबित होती है।
राजेश की कहानी इस बात का जीवंत प्रमाण है कि कैसे संरचित पुनर्वास (Rehabilitation) इंसान को उसकी खोई हुई गरिमा और आत्मविश्वास लौटा सकता है।
राजेश कुमार पिछले 23 सालों से शराब की लत के शिकार थे। लंबे समय तक शराब पर उनकी निर्भरता ने उनके वैवाहिक और पेशेवर जीवन को पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया था।
पारिवारिक बिखराव: शराब के कारण घर में लगातार होने वाले झगड़ों और भावनात्मक तनाव के चलते उनका अपनी पत्नी से अलगाव हो गया था।
आर्थिक संकट: वे कैटरिंग (खानपान) के पेशे से जुड़े थे और बमुश्किल 10,000 रुपये महीना कमा पाते थे। सामाजिक कलंक और सीमित वित्तीय संसाधनों ने उनकी परेशानियों को और बढ़ा दिया था।
राजेश के जीवन में असली बदलाव तब आया जब उनकी मुलाकात ढेंकनाल स्थित ‘अरुण ग्रामीण कार्य संस्थान’ के अंतर्गत संचालित एएसएचएआरए (ASHARA) – एकीकृत व्यसनी पुनर्वास केंद्र (IRCA) के एक सामाजिक कार्यकर्ता से हुई। कार्यकर्ता ने उनकी स्थिति को समझा और उन्हें पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया।
राष्ट्रीय नशा मुक्ति कार्य योजना (NAPDDR) के तहत राजेश को आवासीय प्रवास के दौरान व्यापक और व्यवस्थित मदद मिली:
एक महीने का आवासीय उपचार: इस दौरान उन्हें नशामुक्ति सेवाएं, व्यक्तिगत परामर्श, व्यवहार चिकित्सा (Behavioral Therapy) और मनोवैज्ञानिक सहायता प्रदान की गई।
भावनात्मक स्थिरता: केंद्र के सुरक्षित माहौल ने उन्हें आत्म-नियंत्रण हासिल करने और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने में मदद की।
सफलतापूर्वक अपना पुनर्वास कार्यक्रम पूरा करने के बाद, राजेश ने नई ऊर्जा और जिम्मेदारी की भावना के साथ अपना कैटरिंग का काम फिर से शुरू किया।
आय में वृद्धि: शराब की लत छूटने और काम में निरंतरता आने से उनकी मासिक आय 10,000 रुपये से बढ़कर 16,000 रुपये हो गई है।
आत्मनिर्भरता: अब वे अधिक स्थिर, उत्पादक और स्वावलंबी जीवन जी रहे हैं।
राजेश की कहानी यह स्पष्ट संदेश देती है कि यदि समाज और संस्थागत स्तर पर सहानुभूतिपूर्ण देखभाल मिले, तो कोई भी व्यक्ति व्यसन के अंधकार से बाहर निकलकर अपने जीवन का पुनर्निर्माण कर सकता है।
| महत्वपूर्ण पहलू (Key Aspects) | विस्तृत जानकारी (Details) |
| 👤 व्यक्ति की पहचान | राजेश कुमार (नाम परिवर्तित), 47 वर्ष। |
| 📍 स्थान | ढेंकनाल जिला, ओडिशा। |
| 🛑 मुख्य चुनौती | 23 वर्षों से शराब की गंभीर लत, पत्नी से अलगाव। |
| 🏢 सहयोगी संस्था | एएसएचएआरए-आईआरसीए (ASHARA-IRCA) पुनर्वास केंद्र, ढेंकनाल। |
| 🤝 सरकारी योजना | राष्ट्रीय नशा मुक्ति कार्य योजना (NAPDDR)। |
| 📈 बदलाव और परिणाम | लत से पूर्ण मुक्ति; कैटरिंग व्यवसाय में वापसी। आय ₹10,000 से बढ़कर ₹16,000 हुई। |
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