“हिमाचल प्रदेश बिजली बोर्ड के अधिकारी, कर्मचारी और पेंशनर्स सोमवार को एक बैनर तले इकट्ठा होकर सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर आए”
शिमला 28 / 10 / 2024 नीतू कौशल की रिपोर्ट
हिमाचल सरकार द्वारा बिजली बोर्ड में की जा रही रैशनेलाइजेशन, आउटसोर्स कर्मचारियों की छंटनी, रिक्त पदों पर कर्मचारियों की भर्ती का नहीं होना और पुरानी पेंशन स्कीम को लेकर सरकार द्वारा साधी गई चुप्पी को लेकर कर्मचारियों ने संघर्ष का बिगुल फूंका।
प्रदेश भर में सैकड़ों बिजली बोर्ड कर्मचारीयों ने विभिन्न स्थानों पर रोष रैली निकाली।हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत कर्मचारी यूनियन के सचिव पंकज कुमार ने कहा कि प्रदेश सरकार एक के बाद एक गलत फैसले लेकर बोर्ड के कर्मचारियों को प्रभावित करने का काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि किसी भी बात को लेकर एक तरफा फैसला लागू करना सही नहीं है इसके लिए आवश्यक है कि सरकार को यूनियन के साथ मिल बैठकर सभी मसलों पर हल करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि अब भी सरकार अपने मनमाने फैसलों पर अडिग रही तो यूनियन को प्रदेश इकाई के नेतृत्व में और उग्र आंदोलन करने पर मजबूर होना पड़ेगा जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
प्रदेश व्यापी आह्वान पर सिरमौर जिला के पावटा साहिब में भी हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड के कर्मचारीयों और पेंशनरों ने सांकेतिक धरना देकर एक बार फिर अपनी मांगो को सरकार के सामने रखा है साथ ही इन्होंने सरकार पर अनदेखी के भी आरोप लगाए है।
मीडिया से बात करते हुए बिजली बोर्ड पाँवटा साहिब डिवीजन के सीनियर एक्सक्यूटिव अंशुल ठाकुर ने बताया कि हिमाचल प्रदेश की सरकार द्वारा लगातार कर्मचारियों और सेवानिवृत कर्मचारियों के विरोध में फैसले लिए जा रहे है जिससे कर्मचारी परेशान है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने बोर्ड के 81 चालकों को भी बिजली बोर्ड से निकाल दिया है इनके निकाले जाने से बोर्ड की सेवाएं प्रभावित हो रही है।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में सभी विभाग के कर्मचारियों को OPS के दायरे में लाया गया है जबकि बिजलीबोर्ड के कर्मचारियों को अभी तक OPS के दायरे में नहीं लाया गया है जो दुर्भाग्यपूर्ण है।