दिल्ली में गैस संकट: विश्वास नगर निगम पार्षद ज्योति रानी का ठेले पर खाली सिलेंडर लादकर प्रदर्शन | The Politics Again
“दिल्ली में गैस किल्लत पर हाहाकार : विश्वास नगर में निगम पार्षद ज्योति रानी का अनोखा विरोध, ठेले पर खाली सिलेंडर रखकर किया प्रदर्शन “
शाहदरा (The Politics Again): श्रीमती शिल्पा की रिपोर्ट
देश भर में एलपीजी (LPG) गैस सिलेंडरों की किल्लत की खबरों के बीच अब राजधानी दिल्ली की सड़कों पर भी जनता का गुस्सा फूटने लगा है।
रविवार को पूर्वी दिल्ली के शाहदरा इलाके में गैस की भारी किल्लत से परेशान होकर सैकड़ों क्षेत्रवासियों ने सड़कों पर उतरकर अपना रोष व्यक्त किया।
इस जन-आंदोलन का नेतृत्व विश्वास नगर की तेज-तर्रार नगर निगम पार्षद सुश्री ज्योति रानी ने किया।
ठेले पर खाली सिलेंडर लादकर निकाला जुलूस
गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारों और खाली हाथों लौटती जनता की पीड़ा को दर्शाने के लिए निगम पार्षद ज्योति रानी ने विरोध का एक अनोखा और प्रतीकात्मक तरीका अपनाया।
उन्होंने एक हाथ-ठेले (रेहड़ी) पर खाली लाल सिलेंडरों को लादा और उसे खींचते हुए पूरे इलाके में एक विशाल विरोध जुलूस निकाला।
इस दौरान उनके साथ सैकड़ों की संख्या में स्थानीय नागरिक, महिलाएं और युवा मौजूद रहे, जिन्होंने केंद्र सरकार और संबंधित गैस एजेंसियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
‘जनता की समस्या समझे केंद्र, तुरंत हो गैस की आपूर्ति’
प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए सुश्री ज्योति रानी ने केंद्र सरकार की नीतियों और वितरण प्रणाली पर कड़े सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि आज के समय में रसोई गैस विलासिता नहीं, बल्कि हर आम आदमी की सबसे बुनियादी जरूरत है।
पार्षद ने कहा, “गैस की इस अचानक आई किल्लत ने आम घरों की रसोई का बजट और दिनचर्या पूरी तरह से बिगाड़ दी है। महिलाएं परेशान हैं और लोग कई-कई दिनों तक एजेंसियों के बाहर खड़े रहने को मजबूर हैं।”
उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि वह आम लोगों की इस गंभीर समस्या को तुरंत समझे और युद्धस्तर पर तत्काल प्रभाव से गैस सिलेंडरों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करे।
जनता में गहराता आक्रोश
जुलूस में शामिल महिलाओं और स्थानीय लोगों ने ‘The Politics Again’ के संवाददाता को बताया कि उन्हें बुकिंग के बावजूद कई दिनों से सिलेंडर की डिलीवरी नहीं मिल रही है।
यह प्रदर्शन इस बात का स्पष्ट संकेत है कि यदि जल्द ही एलपीजी की आपूर्ति सामान्य नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में यह संकट एक बड़े राजनीतिक आंदोलन का रूप ले सकता है।












