Anna Hazare

AAP में टूट पर अन्ना हजारे की दो टूक: पार्टी सही होती तो नेता नहीं छोड़ते’

AAP में बगावत पर अन्ना हजारे का कड़ा प्रहार: ‘स्वार्थ के लिए दल बदलना असंवैधानिक; पार्टी सही होती तो नेता नहीं छोड़ते’

अहिल्यानगर/नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

आम आदमी पार्टी (AAP) में राघव चड्ढा समेत 7 राज्यसभा सांसदों की ऐतिहासिक बगावत और उनके भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने पर अब दिग्गज सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है।

अन्ना हजारे, जिनके 2011 के ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ (IAC) आंदोलन की कोख से ही आम आदमी पार्टी का जन्म हुआ था, ने इस दल-बदल को व्यक्तिगत स्वार्थ और संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ बताया है। इसके साथ ही, उन्होंने इस बिखराव के लिए AAP नेतृत्व पर भी सवाल खड़े किए हैं।

‘व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए दल-बदल लोकतांत्रिक नैतिकता के खिलाफ’

महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में प्रमुख समाचार एजेंसी से बात करते हुए अन्ना हजारे ने निर्वाचित प्रतिनिधियों के इस तरह रातों-रात पाला बदलने की कड़ी आलोचना की। उन्होंने लोकतांत्रिक नैतिकता को बनाए रखने पर जोर देते हुए कहा:

“एक पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में शामिल होना सही नहीं है। अपने व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए राजनीतिक दल बदलना उचित नहीं है। हमारे संविधान में इसका कोई उल्लेख नहीं है और हमारा देश संविधान के आधार पर चलता है। निर्वाचित प्रतिनिधियों को संविधान की भावना के अनुरूप ही कार्य करना चाहिए और व्यक्तिगत लाभ से प्रेरित निर्णयों से बचना चाहिए।”

AAP के नेतृत्व और कार्यशैली पर भी उठाया बड़ा सवाल

भले ही अन्ना हजारे ने राघव चड्ढा और अन्य बागी सांसदों की आलोचना की, लेकिन उन्होंने इस टूट की वजहों को लेकर अरविंद केजरीवाल और AAP नेतृत्व को भी कटघरे में खड़ा किया।

हजारे ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “अगर पार्टी सही रास्ते पर चल रही होती, तो राघव चड्ढा समेत अन्य राज्यसभा सदस्य उसे छोड़कर नहीं जाते।”

गौरतलब है कि अन्ना हजारे आम आदमी पार्टी के गठन के समय इसके वैचारिक मार्गदर्शक थे, लेकिन जब अरविंद केजरीवाल ने भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन को एक राजनीतिक दल में बदलने का फैसला किया, तब अन्ना ने खुद को पार्टी और मुख्यधारा की राजनीति से पूरी तरह अलग कर लिया था।

राज्यसभा में 2/3 सांसदों के BJP में विलय का घटनाक्रम

यह प्रतिक्रिया इस सप्ताह के उस अभूतपूर्व राजनीतिक घटनाक्रम के बाद आई है, जब आम आदमी पार्टी के 10 में से 7 राज्यसभा सांसदों ने पार्टी से नाता तोड़ लिया:

  • राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल सहित अन्य बागी सांसदों ने AAP से अलग होने की घोषणा की और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की मौजूदगी में BJP का दामन थाम लिया।

  • दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राघव चड्ढा ने पुष्टि की कि आम आदमी पार्टी के दो-तिहाई (2/3) सदस्यों का भाजपा में विलय हो गया है और संसदीय नियमों (दल-बदल कानून से बचाव) के तहत इसकी आधिकारिक सूचना राज्यसभा के सभापति को सौंप दी गई है।

AAP में डैमेज कंट्रोल शुरू: केजरीवाल और सिसोदिया की देर रात अहम बैठक

पार्टी के भीतर हुए इस ‘सियासी भूंकप’ के बाद आम आदमी पार्टी अब बचाव की मुद्रा में है और डैमेज कंट्रोल के लिए नई रणनीति बनाने में जुट गई है।

  • गुजरात नगर निगम चुनाव के प्रचार से वापस लौटते ही पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया सीधे AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल के आवास पर पहुंचे।

  • सूत्रों के अनुसार, देर रात दोनों शीर्ष नेताओं के बीच आधे घंटे से अधिक समय तक एक अहम बैठक चली।

  • इस दौरान राज्यसभा में हुए विभाजन के संभावित प्रभावों, पंजाब-दिल्ली की राजनीति पर पड़ने वाले असर और भविष्य की कानूनी व राजनीतिक रणनीतियों पर गहन चर्चा की गई।

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