पूर्वांचल विश्वविद्यालय : 15 करोड़ से बनेगा जल-ऊर्जा शोध संस्थान
” VBS पूर्वांचल विश्वविद्यालय को बड़ी सौगात: 15 करोड़ की लागत से बनेगा अत्याधुनिक ‘जल एवं ऊर्जा शोध संस्थान “
जौनपुर : द पॉलिटिक्स अगेन : मंगेश प्रजापति की रिपोर्ट
वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय (VBSPU) के छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए एक बड़ी और उत्साहजनक खबर है।
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान’ (PM-USHA) योजना के तहत विश्वविद्यालय परिसर में एक नए ‘अंतर्विषयक जल एवं ऊर्जा शोध संस्थान’ का निर्माण तेज गति से चल रहा है।
लगभग 5 करोड़ रुपये की लागत से बन रही इस इमारत के इस साल सितंबर तक पूरी तरह से तैयार होने की संभावना है।
10 करोड़ की लागत से लैस होगी राष्ट्रीय स्तर की प्रयोगशाला
इस नए शोध संस्थान को विश्वस्तरीय बनाने के लिए इसमें लगभग 10 करोड़ रुपये की अत्याधुनिक मशीनें और शोध उपकरण स्थापित किए जाएंगे।
इसका सबसे बड़ा फायदा विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं को मिलेगा, जिन्हें अब अपने उन्नत शोध कार्यों के लिए बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उन्हें अपने ही परिसर में राष्ट्रीय स्तर की हाई-टेक प्रयोगशाला सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
इन अहम विषयों पर होगा शोध
विश्वविद्यालय प्रशासन के मुताबिक, यह संस्थान भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए काम करेगा। यहाँ मुख्य रूप से इन विषयों पर शोध कार्य किए जाएंगे:
- सोलर एनर्जी (सौर ऊर्जा) और हाइड्रोजन एनर्जी
- पूर्वांचल में तेजी से गिरते भूजल स्तर का अध्ययन
- जल संरक्षण तकनीक और जल पुनर्भरण (रिचार्ज)
- जल गुणवत्ता परीक्षण और स्वच्छ पेयजल की वैज्ञानिक जांच
- अपशिष्ट जल शोधन (वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट)
मिलेंगी ये हाई-टेक सुविधाएं
शोध कार्यों को गति देने के लिए यहां सोलर सिमुलेटर, फोटोवोल्टाइक टेस्टिंग सिस्टम, हाइड्रोजन प्रोडक्शन एवं स्टोरेज यूनिट, इलेक्ट्रोलाइजर सेटअप और एडवांस वाटर एनालिसिस सिस्टम जैसी आधुनिक मशीनें लगाई जाएंगी।
साथ ही, एनर्जी एफिशिएंसी मापने वाले यंत्र, डेटा लॉगर और मॉडलिंग सॉफ्टवेयर भी उपलब्ध होंगे।
पूर्वांचल के लिए क्यों है यह खास?
विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्वांचल क्षेत्र में तेजी से गिरते भूजल स्तर और स्वच्छ जल की कमी एक गंभीर समस्या बनती जा रही है।
ऐसे में यह संस्थान न केवल शिक्षा के लिए, बल्कि क्षेत्रीय विकास के लिए भी एक मील का पत्थर साबित होगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा आधारित जल आपूर्ति प्रणाली और हाइड्रोजन को एक वैकल्पिक स्वच्छ ईंधन के रूप में विकसित करने की दिशा में यह संस्थान अहम भूमिका निभाएगा।












