ईरान में बड़ा सत्ता परिवर्तन: अयातुल्ला अलीरेजा अराफी बने नए अंतरिम ‘सुप्रीम लीडर’ | The Politics Again
“ईरान में बड़ा सत्ता परिवर्तन: अयातुल्ला अलीरेजा अराफी बने नए अंतरिम ‘सुप्रीम लीडर’, जानें कैसे काम करेगी नेतृत्व परिषद”
द पॉलिटिक्स अगेन डेस्क | 1 मार्च 2026 | संतोष सेठ की रिपोर्ट
अयातुल्ला अलीरेजा अराफी बने ईरान के नए अंतरिम ‘सुप्रीम लीडर’
खामेनेई की मौत के बाद ऐतिहासिक नेतृत्व परिवर्तन शुरू
🔴 संकट और बदलाव
- हमला: अमेरिका और इस्राइल के संयुक्त हमले में अली खामेनेई की मौत।
- संवैधानिक प्रक्रिया: मौत की पुष्टि के बाद ईरान में तुरंत अंतरिम नेतृत्व व्यवस्था लागू की गई।
- चुनौती: बाहरी सैन्य हमलों के दबाव के बीच देश को अस्थिरता से बचाना।
👑 कौन हैं अयातुल्ला अराफी?
- वरिष्ठता: ईरान के सबसे प्रभावशाली और वरिष्ठ धार्मिक नेताओं में से एक।
- भूमिका: नवगठित नेतृत्व परिषद में न्यायविद सदस्य (Jurist Member) नियुक्त।
- प्राथमिक लक्ष्य: संक्रमण काल में शासन को स्थिर रखना और नए ‘स्थायी सुप्रीम लीडर’ के चयन तक नेतृत्व करना।
⚖️ 3-सदस्यीय अंतरिम नेतृत्व परिषद
संविधान के अनुसार, यही संयुक्त नेतृत्व देश के प्रशासन और सुरक्षा के अहम फैसले लेगा:
मसूद पेजेशकियन
राष्ट्रपति (President)
अयातुल्ला अलीरेजा अराफी
वरिष्ठ धर्मगुरु (अंतरिम सुप्रीम लीडर)
गुलाम-हुसैन मोहसनी एजई
मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice)
पश्चिम एशिया में जारी भीषण सैन्य टकराव के बीच ईरान की सत्ता में एक ऐतिहासिक बदलाव हुआ है।
अमेरिका और इस्राइल के संयुक्त हमले में लंबे समय से (1989 से) ईरान के सर्वोच्च नेता रहे 86 वर्षीय अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद देश में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
इस बेहद संवेदनशील और संक्रमण काल में वरिष्ठ धर्मगुरु अयातुल्ला अलीरेजा अराफी को ईरान का नया ‘अंतरिम सुप्रीम लीडर’ नियुक्त किया गया है।
खामेनेई की मौत और सत्ता परिवर्तन का कारण
शनिवार को अमेरिका और इस्राइल ने ईरान के कई सैन्य और सरकारी ठिकानों पर एक बड़ा और अचूक हमला किया था।
इस सैन्य अभियान में विशेष रूप से ईरान के शीर्ष सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व से जुड़े स्थानों को निशाना बनाया गया।
इसी हमले में अली खामेनेई की जान चली गई। शुरुआत में ईरानी प्रशासन ने इन खबरों से इनकार किया था, लेकिन बाद में आधिकारिक तौर पर उनकी मौत की पुष्टि कर दी गई।
इसके तुरंत बाद, देश को अस्थिरता से बचाने के लिए संवैधानिक प्रक्रिया के तहत अंतरिम नेतृत्व व्यवस्था लागू कर दी गई है।
कौन हैं अयातुल्ला अलीरेजा अराफी ?
अयातुल्ला अलीरेजा अराफी की गिनती ईरान के सबसे वरिष्ठ और प्रभावशाली धार्मिक नेताओं में होती है।
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उन्हें नवगठित अंतरिम नेतृत्व परिषद में न्यायविद सदस्य (Jurist Member) के रूप में शामिल किया गया है।
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अराफी फिलहाल देश के सर्वोच्च धार्मिक और राजनीतिक पद की जिम्मेदारी संभालेंगे।
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उनका मुख्य काम इस मुश्किल संक्रमण काल में शासन व्यवस्था को स्थिर रखना और एक नए ‘स्थायी सुप्रीम लीडर’ के विधिवत चयन तक देश का नेतृत्व करना होगा।
कैसे काम करेगी ईरान की 3-सदस्यीय अंतरिम नेतृत्व परिषद ?
ईरान के संविधान के अनुसार, सुप्रीम लीडर की मृत्यु होने पर एक अंतरिम परिषद का गठन किया जाता है, जो संयुक्त रूप से देश के प्रशासन और सुरक्षा से जुड़े सभी अहम फैसले लेती है। इस शक्तिशाली परिषद में शामिल हैं:
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मसूद पेजेशकियन (Masoud Pezeshkian): ईरान के वर्तमान राष्ट्रपति।
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गुलाम-हुसैन मोहसनी एजई (Gholamhossein Mohseni Ejei) : देश के मुख्य न्यायाधीश।
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अयातुल्ला अलीरेजा अराफी : गार्जियन काउंसिल के वरिष्ठ धर्मगुरु (अंतरिम सुप्रीम लीडर के रूप में)।
यही त्रिकोणीय संयुक्त नेतृत्व अब देश की कमान संभालेगा।
दुनिया की प्रतिक्रिया : ट्रंप और नेतन्याहू ने किया था सबसे पहले दावा
हमले के तुरंत बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सबसे पहले खामेनेई की मौत का दावा किया था।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे ‘ईरान और पूरी दुनिया के लिए एक बड़ा बदलाव’ करार दिया है।
दूसरी ओर, ईरान इस वक्त दोहरे संकट में है—एक तरफ बाहरी सैन्य हमलों का भारी दबाव है, तो दूसरी तरफ अंदरूनी राजनीतिक सत्ता हस्तांतरण की चुनौती।
रक्षा और कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह सत्ता परिवर्तन केवल ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह पूरे पश्चिम एशिया (Middle East) की राजनीति और सुरक्षा संतुलन को स्थायी रूप से बदल कर रख सकता है।












