ईरान पर हमले की इनसाइड स्टोरी: अमेरिका का दावा- ‘तेजी से परमाणु बम बना रहा था तेहरान’ | The Politics Again
महाविनाश की तैयारी में था ईरान! अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट का दावा- ‘खुद बनाने लगा था सेंट्रीफ्यूज, इसलिए करना पड़ा हमला’
द पॉलिटिक्स अगेन डेस्क | 1 मार्च 2026 | शिल्पा की रिपोर्ट
ईरान पर बीते शनिवार की दोपहर को अमेरिका और इजरायल ने मिलकर अब तक का सबसे भीषण हवाई हमला किया है।
इजरायल का दावा है कि इस ऐतिहासिक मिलिट्री ऑपरेशन में उसके 200 से अधिक फाइटर जेट्स ने एक साथ हिस्सा लिया।
लेकिन पूरी दुनिया के जहन में एक ही सवाल था—जब ईरान को लेकर बातचीत की कोशिशें चल रही थीं, तो अचानक इस विनाशकारी हमले की नौबत क्यों आ गई?
अब इस हमले की असली वजह सामने आ गई है। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया है कि ईरान गुप्त रूप से अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम (Nuclear Program) को दोबारा खड़ा करने के लिए बहुत तेजी से काम कर रहा था।
तबाह हो चुके इन्फ्रास्ट्रक्चर को कर रहा था तैयार
नाम न छापने की शर्त पर एक अमेरिकी अफसर ने मीडिया को बताया कि खुफिया एजेंसियों (Intelligence Agencies) को पुख्ता इनपुट मिले थे कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम से जुड़े उस इन्फ्रास्ट्रक्चर की मरम्मत और पुनर्निर्माण में लगा हुआ है, जिसे पिछले साल (2025 में) किए गए अटैक में तबाह कर दिया गया था।
अधिकारी ने बताया, “मुझे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसलों पर आधिकारिक तौर पर बोलने की अनुमति नहीं है, इसलिए मैं अपना नाम सार्वजनिक नहीं कर सकता, लेकिन खुफिया रिपोर्ट बेहद गंभीर थीं।”
खुद डेवलप कर ली थी ‘सेंट्रीफ्यूज’ बनाने की क्षमता
अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, सबसे बड़ा खतरा तब पैदा हुआ जब खुफिया रिपोर्ट में यह पता चला कि ईरान ने उच्च गुणवत्ता (High Quality) वाले सेंट्रीफ्यूज (Centrifuges) खुद बनाने की क्षमता विकसित कर ली है।
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क्या होते हैं सेंट्रीफ्यूज?
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सेंट्रीफ्यूज वह एडवांस मशीनें होती हैं जिनका उपयोग यूरेनियम को संवर्धित (Enrich) करने के लिए किया जाता है।
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अगर किसी देश के पास अत्यधिक परिष्कृत सेंट्रीफ्यूज टेक्नोलॉजी आ जाए, तो वह बहुत तेजी से वेपन-ग्रेड (हथियार बनाने लायक) यूरेनियम तैयार कर सकता है। इसी यूरेनियम का इस्तेमाल सीधा परमाणु बम बनाने में किया जाता है।
दुनिया के लिए बड़ा खतरा बन रही थी ईरान की बढ़ती ताकत
वाशिंगटन के लिए यह जानकारी खतरे की सबसे बड़ी घंटी थी। अमेरिकी अधिकारी का मानना है कि ईरान की यह बढ़ती तकनीकी क्षमता केवल इजरायल के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे मध्य पूर्व (Middle East) और दुनिया की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बनने वाली थी।
इसी वजह से अमेरिका और इजरायल ने बिना समय गंवाए यह प्री-एम्प्टिव (Pre-emptive) स्ट्राइक की, ताकि ईरान के परमाणु सपनों को हमेशा के लिए दफन किया जा सके।
हालांकि, ईरान इन सभी दावों को लगातार खारिज करता आया है। ईरान का आधिकारिक स्टैंड यही है कि उसका न्यूक्लियर प्रोग्राम पूरी तरह से शांतिपूर्ण उद्देश्यों (जैसे बिजली उत्पादन) के लिए है, न कि परमाणु हथियार बनाने के लिए।












