Indian Railways Punctuality

24 डिवीजनों में 90% ट्रेनें समय पर: रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कैसे हाई-टेक हुआ भारतीय रेलवे | The Politics Again

” भारतीय रेलवे की रफ्तार और समय की पाबंदी में शानदार सुधार: 24 मंडलों में 90% ट्रेनें चल रहीं ‘ऑन टाइम’, तकनीक कर रही कमाल “

नई दिल्ली (The Politics Again): संतोष सेठ की रिपोर्ट 

भारतीय रेलवे ने अपनी कार्यप्रणाली और समय की पाबंदी (Punctuality) में एक ऐतिहासिक सुधार दर्ज किया है।

इस वित्त वर्ष में अब तक रेलवे के 24 डिवीजनों में 90% से अधिक और 19 डिवीजनों में 80 से 90% तक ट्रेनें बिल्कुल निर्धारित समय पर अपने गंतव्य तक पहुँच रही हैं।

केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण और आईटी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में यह विस्तृत जानकारी साझा की।

उन्होंने बताया कि रेलवे अब ट्रेनों को समय पर चलाने के लिए अत्याधुनिक तकनीक, हाई-टेक लोकोमोटिव और नए ट्रैक्स के जाल पर तेजी से काम कर रहा है।

तकनीक ने कैसे सुधारी रेलवे की ‘घड़ी’?

रेलवे में समय की पाबंदी को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। इसकी वास्तविक समय (Real-time) में निगरानी के लिए कई डिजिटल प्लेटफॉर्म अपनाए गए हैं:

  • लाइव ट्रैकिंग: इंजनों (Locomotives) में अब GPS उपकरण और ‘त्वरित समय पर ट्रेन सूचना प्रणाली’ (RTIS) लगाई गई है, जिससे ट्रेन की सटीक लोकेशन सीधे सैटेलाइट के जरिए कंट्रोल रूम तक पहुँचती है।

  • डेटा लॉगर: स्टेशनों की सिग्नलिंग प्रणाली को डेटा लॉगर से जोड़ा गया है, जो ट्रेनों के आगमन और प्रस्थान की एकदम सटीक और स्वचालित रिपोर्टिंग सुनिश्चित करता है।

  • IIT-मुंबई की मदद: ट्रेनों के टाइमटेबल को और अधिक तार्किक बनाने के लिए IIT-मुंबई के ‘ट्रैफिक सिमुलेटर’ का इस्तेमाल किया गया है।

कोहरे और खराब मौसम को मात देने की तैयारी

सर्दियों में कोहरे के कारण होने वाली देरी और हादसों को रोकने के लिए रेलवे ने बड़े कदम उठाए हैं:

  • ‘कोहरे से सुरक्षा उपकरण’ (FSD): लोको पायलटों को GPS-आधारित FSD दिए गए हैं। 31 जनवरी 2026 तक रेलवे में ऐसे 29,848 उपकरण उपलब्ध हैं, जो कोहरे में भी सिग्नल और लेवल क्रॉसिंग की जानकारी स्क्रीन पर पहले ही दे देते हैं।

  • MASS प्रणाली: स्वचालित सिग्नलिंग क्षेत्रों में ‘संशोधित अर्ध-स्वचालित स्टॉप सिग्नल’ (MASS) प्रणाली लागू की गई है, जो कम विजिबिलिटी में भी ट्रेनों को बिना ज्यादा देरी के सुरक्षित रूप से आगे बढ़ाती है।

तेज रफ्तार और सुरक्षा का नया दौर

रेलवे अब पुराने डिब्बों (ICF) को हटाकर जर्मन तकनीक वाले हल्के और सुरक्षित LHB डिब्बों का निर्माण कर रहा है।

अप्रैल 2018 से अब तक 50,000 से अधिक LHB डिब्बे बनाए जा चुके हैं। इसके साथ ही ‘वंदे भारत’, ‘नमो भारत रैपिड रेल’ और ‘अमृत भारत’ जैसी आधुनिक ट्रेनों के संचालन ने भी यात्रा के समय को काफी कम कर दिया है।

चुनौतियां और नए ट्रैक्स का बिछता जाल (2014 बनाम 2025)

रेलवे के सामने सबसे बड़ी चुनौती ‘मिश्रित यातायात’ (एक ही पटरी पर मालगाड़ी और यात्री ट्रेन का चलना) और ‘भारी यातायात’ (रोजाना 25,000 ट्रेनों का संचालन) है।

इसके समाधान के लिए मालगाड़ियों के लिए अलग से ‘डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर’ (EDFC और WDFC) बनाए जा रहे हैं।

इसके अलावा, रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने की गति में पिछले 11 वर्षों में दोगुने से अधिक की वृद्धि हुई है:

अवधि

शुरू किए गए नए ट्रैक

ट्रैक बिछाने की औसत गति

2009-2014

7,599 किलोमीटर

4.2 किलोमीटर / दिन

2014-2025

34,428 किलोमीटर

8.6 किलोमीटर / दिन (दोगुने से अधिक)

 

वर्तमान में रेलवे 6.75 लाख करोड़ रुपये की लागत वाली 431 इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं (35,966 किलोमीटर नई लाइन, दोहरीकरण आदि) पर तेजी से काम कर रहा है, जिससे भविष्य में ट्रेनों की देरी पूरी तरह खत्म होने की उम्मीद है।

We don’t spam! Read our privacy policy for more info.