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यूपी में 1 करोड़ वोटर्स पर लटकी तलवार? चुनाव आयोग के नोटिस से हड़कंप, अखिलेश बोले- ‘EC अब निष्पक्ष नहीं रहा’

“उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के बाद मतदाता सूची को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है”

लखनऊ | The Politics Again संतोष सेठ की रिपोर्ट 

चुनाव आयोग की सख्ती के बाद प्रदेश के करीब 1.04 करोड़ मतदाताओं को नोटिस भेजे जा रहे हैं। इससे न केवल जनता में बल्कि राजनीतिक दलों में भी हड़कंप मच गया है।

मामला इतना बढ़ गया है कि समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने सीधे चुनाव आयोग (EC) की मंशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्यों मिल रहे हैं नोटिस?

आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, SIR के बाद ड्राफ्ट लिस्ट में कुल 12.55 करोड़ वोटर्स के नाम शामिल थे।

इनमें से 1.04 करोड़ वोटर ऐसे हैं, जिन्होंने फॉर्म तो भरा और ड्राफ्ट लिस्ट में उनका नाम भी आ गया, लेकिन जांच के दौरान उनका रिकॉर्ड 2003 की वोटर लिस्ट से मैप (मिलान) नहीं हो पाया।

अब आयोग ने इन संदिग्ध वोटर्स को नोटिस भेजकर साक्ष्य (Proof) मांगा है।

कल बूथों पर लगेगा जमावड़ा

इस संकट से निपटने के लिए कल (रविवार) प्रदेश भर के सभी बीएलओ (BLO) अपने-अपने पोलिंग बूथ पर बैठेंगे।

  • बीजेपी और सपा दोनों ही पार्टियां अलर्ट मोड पर हैं।

  • दोनों दलों के कार्यकर्ता घर-घर जाकर वोटर्स की मदद कर रहे हैं ताकि नोटिस का सही जवाब दाखिल किया जा सके और वोट कटने से बच जाए।

  • बीएलओ घर-घर जाकर नोटिस तामील करा रहे हैं और साक्ष्य मांग रहे हैं।

अखिलेश यादव का आयोग पर बड़ा हमला

शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला।

उन्होंने आयोग पर “सरकार के साथ मिलकर काम करने” और “निष्पक्षता खोने” का गंभीर आरोप लगाया।

अखिलेश ने कहा,

“यह बेहद महत्वपूर्ण मामला है। 4 नवंबर 2025 को जब पुनरीक्षण की घोषणा हुई थी, तब आयोग ने वादा किया था कि सूची ‘शुद्ध और समावेशी’ होगी। दावा किया गया था कि टेक्नोलॉजी से एक भी वोटर नहीं छूटेगा। लेकिन अब हम देख रहे हैं कि बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हो रही हैं।”

कन्नौज का दिया उदाहरण

अपनी लोकसभा सीट के अंतर्गत आने वाले कन्नौज सदर विधानसभा क्षेत्र की विसंगतियों का जिक्र करते हुए अखिलेश ने कहा,

“अगर एक विधानसभा में यह हाल है, तो पूरे यूपी का अंदाजा लगाया जा सकता है। अधिकारियों ने सत्ता पक्ष के दबाव में काम किया है। संवैधानिक संस्थाएं अब निष्पक्ष नहीं रहीं।”

फिलहाल, यूपी में सियासी पारा चढ़ा हुआ है। एक तरफ 1 करोड़ लोगों की नागरिकता के अधिकार (वोट) का सवाल है, तो दूसरी तरफ विपक्ष इसे एक बड़ी साजिश बता रहा है।

Santosh SETH

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